नागराकाटा : डुआर्स के 28 चाय श्रमिकों को बकाया भुगतान

Updated at : 12 Feb 2019 5:11 AM (IST)
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नागराकाटा :   डुआर्स के 28 चाय श्रमिकों को बकाया भुगतान

नागराकाटा : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार के श्रम विभाग ने डुवार्स के 28 चाय बागानों के श्रमिकों के 12 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है. इससे इन चाय बागानों में खुशी की लहर है. श्रम विभाग के अनुसार 16 हजार से अधिक श्रमिकों को इसका लाभ मिला है. हालांकि तीन […]

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नागराकाटा : सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार राज्य सरकार के श्रम विभाग ने डुवार्स के 28 चाय बागानों के श्रमिकों के 12 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया है. इससे इन चाय बागानों में खुशी की लहर है. श्रम विभाग के अनुसार 16 हजार से अधिक श्रमिकों को इसका लाभ मिला है.

हालांकि तीन हजार से अधिक श्रमिकों के कागजात नहीं मिलने के चलते उनकी ग्रैच्यूटी की राशि नहीं दी जा सकी है. हालांकि इस बारे में सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर करने वाले संगठनों में शामिल पश्चिमबंग खेतमजूदर समिति के पक्ष से सामाजिक कार्यकर्ता अनुराधा तलवार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहीं नहीं कहा है कि कागजात देखकर ही भुगतान करना होगा.

बंद चाय बागानों के कागजात हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त लिक्विडेटर के पास है. अब यह राज्य सरकार का काम है कि वह उससे जरूरी कागजात हासिल करे. उल्लेखनीय है कि मुख्य रुप से बरसों से बंद रेड बैंक, ढेकलापाड़ा, सुरेंद्रनगर, रामझोड़ा, कठालगुड़ी चाय बागानों के श्रमिकों की बकाया रकम का भुगतान नहीं किया जा सका है.

कई चायबागान के नहीं मिले कागजात
श्रम विभाग के उत्तर बंगाल के ज्वाइंट लेबर कमिश्नर चंदन दासगुप्त ने बताया कि कई चाय बागानों से कोशिश के बावजूद जरूरी कागजात नहीं मिल सके हैं. इसलिये उन बागानों के श्रमिकों के बकाया का भुगतान नहीं हो सका. हालांकि कागजात मिल जायें तो विभाग श्रमिक को भुगतान करने के लिये तैयार है. ऐसे श्रमिकों को दोबारा जरूरी दस्तावेज के साथ आवेदन करने के लिये कहा गया है. राज्य सरकार चाहती है कि मालिकान द्वारा बकाया रखे ग्रैच्यूटी की राशि का जल्द से जल्द भुगतान हो सके.
भुगतान किये जाने का तृणमूल समर्थित चाय बागान तृणमूल मजदूर यूनियन के प्रमुख नेता बाबलु मुखर्जी ने स्वागत करते हुए कहा है कि एक बार और साबित हुआ कि राज्य सरकार चाय श्रमिकों के साथ मजबूती के साथ खड़ी है. वहीं, ज्वाइंट फोरम के संयोजक जियाउल आलम ने कहा कि जो बागान बंद रहने के बाद खुले हैं उन्हें ही इसका लाभ मिला है.
लेकिन जो बागान आज भी बंद हैं उनके मामले में कागजात की दुहाई दी जा रही है. यह उचित नहीं है. कागाजात नहीं मिल रहे हैं यह गलती श्रमिक की नहीं, चाय बागान की है जिसकी सजा उसे मिल रही है.
इन बागानों के श्रमिकों को मिली राशि
श्रम विभाग के सूत्र के अनुसार जिन चाय बागानों के श्रमिकों की बकाया का निपटान कर दिया गया है वे हैं, रामझोड़ा, मुजनाई, जयवीरपाड़ा, श्रीनाथपुर, बामनडांगा-टंडू, सामसिंग, हान्टापाड़ा, गरगंडा, डिमडिमा, रेड बैंक, बंधापानी, ढेकलापाड़ा, मधु, सुरेंद्रनगर, कुमलाई, धरणीपुर, तुलसीपाड़ा और लंकापाड़ा. सूत्र के अनुसार करीब एक हजार आवेदनों का निपटान जरूरी तथ्यों के अभाव में संभव नहीं हो सका है.
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