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पुलिस ने बेरहमी से बेटे को पीटा, बहू को जाना पड़ा थाना! अंश-अंशिका केस का दूसरा सच ये भी

Updated at : 15 Jan 2026 12:31 PM (IST)
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पुलिस ने बेरहमी से बेटे को पीटा, बहू को जाना पड़ा थाना! अंश-अंशिका केस का दूसरा सच ये भी
पुलिस के साथ अंश-अंशिका, Pic Credit- Prabhat Khabar

Ansh Anshika Case: अंश-अंशिका के सकुशल मिलने के बाद जहां बस्ती में जश्न था, वहीं दुकानदार कांती देवी 13 दिनों की प्रताड़ना और बेइज्जती से टूटती नजर आईं. उन्होंने सिर्फ सच बताया, लेकिन बदले में परिवार को थाने, मारपीट और दहशत झेलनी पड़ी. यह कहानी सिस्टम से सवाल करती है.

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Ansh Anshika Case: अंश-अंशिका के सकुशल मिलने की खबर से जहां बस्ती के लोग खुशी में झूम रहे थे, वहीं उसी मोहल्ले में रहने वाली दुकानदार कांती देवी की आंखों में आंसू थे. बच्चों के मिलने की खुशी के बीच कांती देवी अपने साथ हुई 13 दिनों की बेइज्जती और प्रताड़ना को याद कर टूटती नजर आयीं. कांती देवी का कहना है कि उन्होंने सिर्फ अपना फर्ज निभाया था. उन्होंने बच्चे को देखा और प्रशासन को यह जानकारी दी कि बच्चे यहां आये थे. लेकिन इसके बदले उन्हें ऐसी सजा मिली, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगी. उनका एक ही सवाल है- “हमारी क्या गलती थी?”

कांती देवी बोली- बेटे को बेरहमी से पीटा गया

कांती देवी ने बीती घटना को याद कर बताती है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी बहू को महिला थाना ले जाकर बैठा दिया गया, जबकि उनके बेटे के साथ बेरहमी से मारपीट की गयी. घर में कुत्ता घुमाकर तलाशी ली गयी. 12 दिनों तक दिन-रात पुलिस दरवाजा खटखटाती रही, जिससे पूरा परिवार दहशत में रहा. इस डर के कारण वे ठीक से सो तक नहीं पाए.

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बस्ती में निकलना तक हो गया था मुश्किल

कांती देवी ने कहा कि उनके साथ जो कुछ हुआ, वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए. इतनी बेइज्जती हुई कि बस्ती में निकलना तक मुश्किल हो गया था. उन्होंने बताया कि उनकी बहू ने बच्चे को सिर्फ चॉकलेट देकर वापस भेज दिया था और पैसे भी लौटा दिये थे, इसके बावजूद उन्हें थाने जाकर इसकी सजा भुगतनी पड़ी. उनका यह भी कहना था कि पूरे मोहल्ले के लोगों को भी प्रताड़ित किया गया, जबकि किसी की भी बच्चे से कोई दुश्मनी नहीं थी. वे भी बच्चे के लिए रो रहे थे और दुकान के बाहर से बच्चे के गायब होने के बाद प्रार्थना कर रहे थे कि वह जल्द मिल जाए.

कांती देवी बोलीं- अंश-अंशिका की मां की पीड़ा समझती हूं

कांती देवी कहती है कि वे अंश-अंशिका की मां की पीड़ा को समझती हैं, लेकिन वे खुद भी एक मां हैं. उनका बेटा बिना किसी गुनाह के अंदर गया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्हें तकलीफ नहीं होती? कांती देवी ने बताया कि सच का साथ देने की कीमत उन्हें बहुत भारी पड़ी. 12 दिनों तक उनके घर चूल्हा नहीं जला. बच्चों के मिलने के बाद भी त्योहार के दिन भी घर में उदासी छायी है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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