कैसे रांची से रामगढ़ पहुंचे दो मासूम? अंश-अंशिका केस में चौंकाने वाले खुलासे


Ansh Anshika Case: रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र से लापता अंश और अंशिका के अपहरण मामले में SIT की पूछताछ से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. मानव तस्कर पति-पत्नी ने बच्चों को बैलून का लालच देकर अगवा किया, फिर कई ठिकानों पर छिपाने के बाद रजरप्पा ले गये. इस खबर में हम जानेंगे कि आरोपियों ने किन किन जगहों पर मासूमों को रखा था. साथ ही यह भी जानेंगे कि रांची एसएसपी की रणनीति से मामले का कैसे नाटकीय अंत हुआ.
Ansh Anshika Case: राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र के शहीद मैदान (शालीमार बाजार के समीप) से दो जनवरी की दोपहर ढाई बजे से लापता अंश-अंशिका के मामले की परत-दर-परत खुल रही है. बरामद बच्चे और दोनों आरोपी मानव तस्कर पति 24 वर्षीय नभ खेरवार और पत्नी 20 वर्षीया सोनी कुमारी से एसआइटी ने पूछताछ की है. नभ खेरवार बिहार के औरंगाबाद जिले के बारुण का और सोनी रामगढ़ जिले के कोठार की रहनेवाली है. पुलिस ने दोनों पति-पत्नी और अंश से पूछताछ की. दंपती ने बताया कि दो जनवरी को करीब साढ़े तीन बजे के करीब वह अंश और अंशिका को लेकर गये थे.
बच्चों को पैदल ही नगड़ी ले गये 2 जनवरी को
वहीं, पुलिस की पूछताछ में अंश ने बताया है कि शहीद मैदान से उसे ऑटो से ले जाया गया था, जबकि आरोपी पति-पत्नी का कहना है कि उन लोगों ने बैलून दिखा कर बच्चों का ध्यान खींचा. इसके बाद दोनों को पैदल ही नगड़ी थाना क्षेत्र के बालालौंग में ले जाकर उन्हें एक झोपड़ी में रखा था.फिर अगले दिन तीन जनवरी को बच्चों को वहां से ले जाकर हटिया इलाके में रखा था.
4 जनवरी को बच्चों को लेकर पहुंचे थे रजरप्पा
चार जनवरी को दोनों बच्चों को लेकर वे रेलवे लाइन के किनारे-किनारे ऑटो-टोटो बदल कर रामगढ़ जिले के रजरप्पा थाना अंतर्गत चितरपुर पहुंचे. वहां रौशन आरा के किराये के घर में रह रहे थे. सात जनवरी को उन लोगों ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था. तब से पति-पत्नी बच्चों को लेकर वहीं रह रहे थे. आरोपी दंपती बताते हैं कि वे बच्चों को उनकी पसंद की चीजें खिलाते थे. इसलिए बच्चे उनसे घुल-मिल गये थे. लेकिन पुलिस के एक्टिव रहने के कारण वे लोग वहां से बाहर निकल नहीं पा रहे थे.
मामला शांत होने के बाद निकलने की फिराक में थे आरोपी दंपती
गिरफ्तार आरोपी दंपतियों का कहना था कि जब पुलिस ने बच्चों पर चार लाख के इनाम की घोषणा की तो उन्हें लगा कि वे ही पुलिस को बच्चों को सौंपकर इनाम की राशि ले लें. लेकिन पूर्व की घटनाओं में पुलिस को मिली सफलता को देखकर उन्होंने ऐसा नहीं किया. मामला शांत होने के बाद वे लोग निकलते, लेकिन इससे पहले ही वे पकड़े गये.
पुलिस अधिकारियों ने सूचना देने वालों को दिये 4 लाख का इनाम
पुलिस के आलाधिकारी ने सूचना दाता के साथ अलग से बात की और उन्हें चार लाख रुपये इनाम की राशि दी. इस तरह नाटकीय अंदाज में अंशअंशिका एसआइटी के हाथ लगे. आम तौर पर किसी बच्चे की गुमशुदगी में कांटेक्ट नंबर पुलिस का होता है, लेकिन बहुत से लोग पुलिस के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते. इसलिए बच्चों के पोस्टर और अखबारों में दिये विज्ञापन में रांची एसएसपी ने पुलिस के अलावा अंश-अंशिका के पिता सुनील कुमार का नाम और नंबर भी जारी किया था. यह ट्रिक काम कर गया. अंशअंशिका वापस लौट आये.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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