सिलीगुड़ी : तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा शहीद जीवन गुरुंग का शव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Jan 2019 1:28 AM
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सिलीगुड़ी : शहीद जवान जीवन गुरुंग का पार्थिव शरीर उनके जन्मस्थान पर पहुंचते ही गांव के लोगों की आंखें छलक गयीं. मां की आंख से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कलेजे के टुकड़े का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देखकर मां का कलेजा फट गया. दूसरी ओर देश के लिए जान न्यौछावर […]
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सिलीगुड़ी : शहीद जवान जीवन गुरुंग का पार्थिव शरीर उनके जन्मस्थान पर पहुंचते ही गांव के लोगों की आंखें छलक गयीं. मां की आंख से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कलेजे के टुकड़े का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर देखकर मां का कलेजा फट गया.
दूसरी ओर देश के लिए जान न्यौछावर करनेवाले सपूत के शहीद होने पर फक्र भी था. पूरे सैनिक सम्मान के साथ शहीद जवान का अंतिम संस्कार सोमवार की सुबह दार्जिलिंग के लामा हट्टा में किया जायेगा.
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आइईडी ब्लास्ट में दो भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे. इनमें दार्जिलिंग के लामा हट्टा निवासी राइफल मैन जीवन गुरुंग और पुणे के मेजर शशिधरन वी नायर शामिल हैं.
रविवार शाम 4.45 बजे जीवन गुरुंग का पार्थिव शरीर बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंचा. एयरपोर्ट पर भारतीय सेना के जवानों ने शहीद को सलामी दी. श्रद्धांजलि अर्पित करने राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देव समेत कई गणमान्य लोग पहुंचे.
इसके बाद पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से दार्जिलिंग के लामा हट्टा के लिए रवाना किया गया. भारतीय सेना की गाड़ी देखते ही लामा हट्टा निवासी गाड़ी के पीछे-पीछे चलने लगे.
इसके बाद गाड़ी जीवन गुरुंग के द्वार पर लगी. जवानों ने नम आंखों से ताबूत आंगन में रखा. ताबूत के भीतर तिरंगे में लिपटा शहीद का पार्थिव शरीर देखकर परिवार और इलाकावासी बिलखने लगे. सेना ने घर पर भी शहीद को सलामी दी.
गांववालों से मिली जानकारी के अनुसार, जीवन गुरुंग को वे लोग गानेवाला के नाम से पुकारते थे. बचपन से ही चंचल-नटखट जीवन गुरुंग गीत गाया करता था. उसका गला भी बहुत अच्छा था.
वह संगीतकार बनना चाहता था, लेकिन वर्ष 2014 में सेना में भर्ती हो गयी. राइफलमैन के पद पर उसकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई. फौज में सिर्फ साढ़े चार वर्ष की सेवा के बाद ही जीवन गुरुंग शहीद हो गये.
गांव के लोगों ने बताया कि बीते अक्टूबर महीने में ही वह छुट्टी पर आया था. दशहरा व दीपावली में उसने कई गीत भी सुनाये थे. नवंबर महीने में वह फिर से ड्यूटी पर गया था, लेकिन इस बार तिरंगे में लिपटा ताबूत में बंद उसका पार्थिव शरीर वापस आया.
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