मेयर अशोक भट्टाचार्य ने राज्य सरकार पर साधा निशाना, कर्मचारियों की कमी से निगम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा बदहाल
Updated at : 17 Nov 2018 5:29 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी में स्वास्थ्य सेवा का अजब गजब हाल है . कहने को तो राज्य सरकार ने अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन बना दिए ,लेकिन चिकित्सा सुविधा अभी भी नदारद है. आलम यह है कि इन अस्पतालों में डॉक्टरों,नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों की बेहद कमी है. जिसकी वजह से सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में स्वास्थ्य […]
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सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी में स्वास्थ्य सेवा का अजब गजब हाल है . कहने को तो राज्य सरकार ने अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन बना दिए ,लेकिन चिकित्सा सुविधा अभी भी नदारद है. आलम यह है कि इन अस्पतालों में डॉक्टरों,नर्सों तथा अन्य कर्मचारियों की बेहद कमी है. जिसकी वजह से सिलीगुड़ी नगर निगम इलाके में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई है.
चिकित्सा सुविधा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन चल रहे स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों का टोटा लगा हुआ है. इन की तनख्वाह इतनी कम है कि कोई भी डॉक्टर सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन संचालित स्वास्थ्य केंद्रों में काम करना नहीं चाहता. फुल टाइम डॉक्टर को मात्र 40 हजार रूपये की तनख्वाह दी जाती है. जिसके कारण सिलीगुड़ी नगर निगम के स्वास्थ्य केंद्रों में मात्र 7 फुल टाइम डॉक्टर काम कर रहे हैं. जबकि नर्सें मात्र दो से तीन हैं.
यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने किया है .वह शुक्रवार को अपने कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे. उन्होंने बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाले मेडिकल ऑफिसरों को मात्र 40 हजार रूपये की तनख्वाह दी जाती है. इससे अधिक तनख्वाह तो क्लर्कों की है. भला कोई डॉक्टर 40 हजार रूपये महीने में काम करने क्यों आएगा. पार्ट टाइम डॉक्टरों की तनख्वाह तो और भी कम है.इनको मात्र 24000 रूपये राज्य सरकार देती है.
अन्य कर्मचारियों का भी बुरा हाल है. श्री भट्टाचार्य ने आगे बताया कि सिलीगुड़ी नगर निगम के स्वास्थ्य केंद्रों में 20 डॉक्टरों के पोस्ट निर्धारित हैं. वर्तमान में फुल टाइम तथा पार्ट टाइम मिला कर सिर्फ एक ग्यारह डॉक्टर ही काम कर रहे हैं. ये डॉक्टर भी जबतब नौकरी छोड़ने की धमकी देते हैं. हाथ पैर पकड़कर डॉक्टरों को काम करने के लिए कहा जाता है.
उन्होंने इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अस्पतालों के बड़े-बड़े भवन तो बना दिए गए लेकिन पर्याप्त मात्रा में डॉक्टरों तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई. सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन कुल 10 स्वास्थ्य केंद्र राज्य सरकार की ओर से बनाए गए हैं.
जिसमें से 9 का काम पूरा हो चुका है एवं एक स्वास्थ्य केंद्र का काम चल रहा है. स्वास्थ्य केंद्र बनाने को लेकर उनकी राज्य सरकार से कोई शिकायत नहीं है. मुख्य शिकायत कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर रही है. सिर्फ डॉक्टर ही कम नहीं हैं. नर्स, टेक्निशियन तथा अन्य कर्मचारियों की भी भारी कमी है. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि डॉक्टर तथा अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार सिलीगुड़ी नगर निगम के पास नहीं है.
राज्य सरकार इनकी नियुक्ति करती है, जो अभी पूरी तरह से बंद है. उनके अनुसार जीएनएम के कुल 20 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ एक पद पर ही नियुक्ति की गई है. जबकि लैब टेक्नीशियन के भी 8 पद खाली पड़े हुए हैं. मात्र 2 टेक्निशियनों की सहायता से ही नगर निगम के स्वास्थ्य केंद्रों को संचालित किया जाता है. उन्होंने आगे कहा कि एएनएम के सभी पद रिक्त हैं. कुल 20 एएनएम की नियुक्तियां होनी है जिसमें अब तक एक भी एनएम की नियुक्ति नहीं की गई है.
श्री भट्टाचार्य ने आगे कहा कि सीमित संसाधन के बाद भी वह नगर निगम के अधीन स्वास्थ्य केंद्रों में रोगियों को सही चिकित्सा व्यवस्था देने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले साल 64 हजार 842 रोगियों की चिकित्सा नगर निगम के स्वास्थ्य केंद्रों में की गई. जबकि इस साल अक्टूबर तक 40 हजार 93 रोगियों की चिकित्सा की गई है.
उन्होंने मातृ सदन की बदहाली का भी रोना रोया. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों की तरह ही मातृ सदन में भी कर्मचारियों की भारी कमी है. उसके बाद भी नगर निगम की ओर से मातृ सदनों में प्रसव की बेहतर सुविधा देने की कोशिश की जा रही है.उन्होंने राज्य सरकार से सिलीगुड़ी नगर निगम के अधीन सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की भी मांग की.
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