ढलती उम्र के साथ छूट रही बांसुरी, पेट पालने के लिए नहीं मिल रहा भत्ता
Updated at : 11 Oct 2018 4:34 AM (IST)
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बालुरघाट : बालुरघाट के बिस्मिल्लाह खान के नाम से जाने जानेवाले शहनाई वादक अमूल्य माली इनदिनों निर्धनता में दिन गुजारने को मजबूर हैं. आरोप है कि उन्हें आज तक ना तो कोई सम्मान मिला है और ना ही सरकारी सहयोग ही मिल रहा है. उम्र के साथ ही कई बीमारियों ने चपेट में ले लिया […]
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बालुरघाट : बालुरघाट के बिस्मिल्लाह खान के नाम से जाने जानेवाले शहनाई वादक अमूल्य माली इनदिनों निर्धनता में दिन गुजारने को मजबूर हैं. आरोप है कि उन्हें आज तक ना तो कोई सम्मान मिला है और ना ही सरकारी सहयोग ही मिल रहा है. उम्र के साथ ही कई बीमारियों ने चपेट में ले लिया है. सबसे ज्यादा परेशान उन्हें दमा की बीमारी से हो रहा है. दमा ने सबसे ज्यादा जकड़ कर रखा है. उन्होंने इंदिरा आवास के तहत मकान देने की मांग की है.
जानकारी के अनुसार कोलकाता में गुणीजन पुरस्कार मिला. बांग्ला फिल्म देवांशी के एक दृश्य में उन्होंने शहनाई बजायी है. शहनाई, बांसुरी, दोतारा लेकर कोलकाता, पूर्णिया, पुरुलिया, अलीपुरद्वार, सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी व मालदा से उत्तर प्रदेश के बनारस तक में वे अपनी कला का जादू बिखेर चुके हैं. आज भी उनकी बांसुरी ही उन्हें जीने की नयी उम्मीद भरता है.
अमूल्य माली दक्षिण दिनाजपुर जिले के बालुरघाट ब्लॉक अंतर्गत खराइल में निवास करते है. देश विभाजन के साथ ही वे बांग्लादेश के बादलगाछी थाना के दोनाइल गांव से पिता के साथ भारत आये थे. बालुरघाट ब्लॉक के 5 नंबर अंचल ग्राम पंचायत के खराइल गांव में बस गये. उसी समय से वे इलाके के विभिन्न कार्यक्रमों में शहनाई या बांसुरी बजाकर श्रोताओं का मन मोह रहे है. बासुरी व शहनाई से जब घर चलाना मुश्किल नजर आने लगा तो उसने रिक्शा चलाना शुरू किया.
इस तरह से एकदिन बालुरघाट के एक नामी नाट्य संस्था से उन्हें शहनाई बजाने के लिए बुलाया गया. इसके बाद से एक के बाद एक नाटक पर काम करते गये. दूरदर्शन में भी बांसुरी बजाने का मौका मिला. बांग्ला फिल्म देवांशी में भी उन्होंने शहनाई बजायी है. लेकिन आज एक उम्र के बाद ना तो रिक्शा चलाने की ताकत रही ना ही बांसुरी बजा पाते हैं.
उन्होंने बताया कि शिल्पी भत्ता या वृद्धा भत्ता कुछ भी नहीं मिलता है. उसका बेटा नलमिस्त्री का काम करके जो कमाता है उसी में परिवार चलता है. जिस नाट्य संगठन के लिए किसी समय बजाते थे, वह संस्था आज उसकी खबर नहीं लेती है. मामले पर दक्षिण दिनाजपुर जिला सूचना व संस्कृति विभाग के अधिकारी शांतनु चक्रवर्ती ने बताया कि मामले की सूचना नहीं थी. उन्होंने खोजखबर लेने का आश्वासन दिया है.
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