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चाय श्रमिकों की समस्या दूर नहीं करना चाहती है पश्चिम बंगाल सरकार: माकपा

Updated at : 08 Aug 2018 1:56 AM (IST)
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चाय श्रमिकों की समस्या दूर नहीं करना चाहती है पश्चिम बंगाल सरकार: माकपा

सिलीगुड़ी : चाय बगान श्रमिकों की मूलभूत सुविधाओं तथा न्यूनतम मजदूरी की मांग की जानकारी राज्य सरकार को पहले से है. जिसे लेकर कल सोमवार को मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक भी हुयी. लेकिन उस बैठक में राज्य के श्रम मंत्री शामिल नहीं हुए. सिर्फ इतना ही नहीं बैठक चलने के दौरान ही सरकार […]

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सिलीगुड़ी : चाय बगान श्रमिकों की मूलभूत सुविधाओं तथा न्यूनतम मजदूरी की मांग की जानकारी राज्य सरकार को पहले से है. जिसे लेकर कल सोमवार को मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक भी हुयी. लेकिन उस बैठक में राज्य के श्रम मंत्री शामिल नहीं हुए. सिर्फ इतना ही नहीं बैठक चलने के दौरान ही सरकार के प्रतिनिधि बीच में ही बैठक छोड़ कर वहां से निकल गये.
इससे जाहिर है राज्य सरकार चाय श्रमिकों की समस्या दूर नहीं करना चाहती. यह आरोप माकपा ने लगाया है. इसके साथ ही माकपा ने पिछले दिनों में सिलीगुड़ी से गिरफ्तार भूमाफियाओं को लेकर भी राज्य सरकार पर जमकर प्रहार किया. मंगलवार को माकपा कार्यालय अनिल विश्वास भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में माकपा के दार्जिलिंग जिला संयोजक जीवेश सरकार ने कहा कि चाय श्रमिकों को लेकर राज्य सरकार जो खेल खेल रही है, उसका विरोध करते हैं.
श्रम मंत्री कहने के बाद भी बैठक में नहीं आते हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि श्रम मंत्री कहीं इसलिए तो उत्तर बंगाल नहीं आ रहे कि उन्हें चाय श्रमिकों की समस्या दूर करनी होगी. श्री सरकार ने सोमवार को त्रिपक्षीय बैठक के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी की सवाल खड़ा किया है. उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान जन प्रतिनिधियों को वहां प्रवेश करने नहीं दिया जा रहा था.
बल्कि उस बैठक में शामिल होने आये ज्वाइंट लेवर कमिश्नर को भी पुलिस ने अंदर जाने से रोक दिया. इसी बीच सरकार के एक प्रतिनिधि भी बैठक छोड़ कर चले गये. जिससे बीच में ही बैठक रद्द हो गयी. उन्होंने राज्य सरकार पर श्रमिकों की मूलभूत सुविधाओं तथा न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को लेकर खेल खलने का आरोप लगाया है.
भूमाफिया को लेकर भी लपेटा
श्री सरकार ने त्ताधारी पार्टी पर तंज कसते हुए आगे कहा कि राज्य सरकार के आश्रय में अनेकों भूमाफिया पले-बढ़े हैं. कोई सत्ताधारी पार्टी का होकर चुनाव लड़ता है तो कोई पार्टी के विभिन्न कमेटी का सदस्य है. आज पार्टी के बड़े-बड़े नेता इससे अपना पल्ला झाड़ रहे है.
श्री सरकार ने भूमाफियाओं के वाम मोरचा के शासनकाल में पनपने के आरोपों पर भी व्यंग्य किया. उन्होंने कहा कि वाम मोरचा के शासनकाल में तृणमूल कांग्रेस का भी गठन हुआ था, तो मुख्यमंत्री उसे क्यों नहीं छोड़ देती.
एक ओर मुख्यमंत्री भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करने का निर्देश दे रही हैं,वहीं दूसरी ओर उन भूमाफियाओं के खिलाफ हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. जिसके चलते आरोपियों को किसी भी वक्त जमानत मिल सकती है. अगर ऐसा हुआ तो आने वाले दिनों में माकपा कोर्ट परिसर में जाकर वृहद आंदोलन करेगी. संवाददाता सम्मेलन में सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर तथा विधायक आशोक भट्टाचार्य व अन्य उपस्थित थे.
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