सालबाड़ी जमीन विवाद पर आखिरकार एकजुट हुआ समाज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Jul 2018 1:18 AM
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सिलीगुड़ी : श्री दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी गौशाला की सालबाड़ी स्थित विवादित जमीन को लेकर शनिवार को आखिरकार गोसेवकों का पूरा समाज एकजूट हुआ. पिछले दिनों तीन जुलाई की रात को गौशाला की दीवार तोड़कर जबरन जमीन दखल करने को लेकर स्थानीय बाबूपाड़ा-मिलनपल्ली स्थित गोशाला के सभाकक्ष में वरिष्ठ गोसेवक सांवरमल आलमपुरिया की अध्यक्षता मेंसचिव बनवारी लाल करनानी […]
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सिलीगुड़ी : श्री दार्जिलिंग-सिलीगुड़ी गौशाला की सालबाड़ी स्थित विवादित जमीन को लेकर शनिवार को आखिरकार गोसेवकों का पूरा समाज एकजूट हुआ. पिछले दिनों तीन जुलाई की रात को गौशाला की दीवार तोड़कर जबरन जमीन दखल करने को लेकर स्थानीय बाबूपाड़ा-मिलनपल्ली स्थित गोशाला के सभाकक्ष में वरिष्ठ गोसेवक सांवरमल आलमपुरिया की अध्यक्षता मेंसचिव बनवारी लाल करनानी ने मीटिंग की शुरुआत की.
इस मीटिंग में भू-माफियाओं के चुंगल से गौशाला की जमीन को हर हाल में बचाने के लिए गोसेवकों ने संकल्प लिया और कई सख्त निर्णय भी पारित हुआ. सर्वसम्मति से भावी आंदोलन की रुपरेखा भी खींची गयी. जरुरत पड़ने पर पर्यटन मंत्री गौतम देव, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी से भी गुहार लगाने पर प्रस्ताव पारित हुआ. लेकिन कमेटी ने फिलहाल दो-तीन दिनों में एसडीओ कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का निर्णय लिया है.
किसने, क्या प्रस्ताव दिया
गोसेवक गौरीशंकर गोयल ने अपने प्रस्ताव में कहा कि सालबाड़ी स्थित गौशाला की जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास, गोशाला के कर्मचारियों को धमकी, छह गाय और तकरीबन 15 हजार रुपये चोरी करने के दुस्साहस को किसी भी हाल में हल्के से नहीं लिया जा सकता. इसके लिए केवल गोशाला कमेटी ही नहीं बल्कि पूरे समाज के गोसेवकों को एकजूट होने की जरुरत है. इसके तहत हमें हजारों की तादाद रैली व अन्य माध्यमों से आवाज बुलंद करने की जरुरत है.
जरुरत पड़ने पर पर्यटन मंत्री गौतम देव, दार्जिलिंग जिला अधिकारी (डीएम) व अन्य संबंधित आलाधिकारियों के दफ्तर के सामने भी आंदोलन करने का प्रस्ताव दिया. सलाहकार समिति के एक गोसेवक सुशील रामपुरिया ने भी श्री गोयल के प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए पर्यटन मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री और राज्यपाल से पूरे घटनाक्रम के लिए गुहार लगाने का प्रस्ताव सबके सामने रखा. साथ ही उन्होंने सबों को जोश के साथ नहीं, बल्कि होश के साथ निर्णय लेने की सलाह दी.
कमेटी के सह-सचिव सुशील धानोटिवाला ने कहा कि गौशाला की जमीन पर गैर-कानूनी तरीके से दखल करनेवाले कथित भू-माफिया अब सुलह करने के मूड में हैं, लेकिन अब मामला काफी आगे बढ़ जाने की वजह से किसी भी कीमत पर सुलह न करने प्रस्ताव उन्होंने सबों के सामने रखा. सलाहकार समिति के एक गोसेवक विमल डालमिया का कहना है कि गौशाला की संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं.
यह गौशाला और उससे जुड़ी समस्त चल-अचल संपत्ति पूरे समाज की है. इसलिए इस पूरे मामले में पूरे समाज को एकजूट करना आवश्यक है. साथ ही उन्होंने प्रस्ताव दिया कि गोपालन और गोमाताओं के संरक्षण हेतु जो भी आंदोलन हो वह पूरी तरह कानून के दायरे में हो.
कानूनी सलाहकारों की 11 सदस्यीय कमेटी बनी
गौशाला की जमीन की रक्षा और हरेक कानूनी लफड़ों से बचाने के लिए गौशाला के अधिवक्ता राजेश अग्रवाल के प्रस्ताव पर आज की मीटिंग में ही कानूनी सलाहकारों की 11 सदस्यीय कमेटी बना दी गयी. इस कमेटी में पांच अधिवक्ता श्री अग्रवाल, करन सिंह जैन, किशन लोहिया, सुरेश मित्रुका व विपुल शर्मा का नाम पारित हुआ.
साथ ही इनके अलावा इस कमेटी में अध्यक्ष सांवरमल आलमपुरिया, उपाध्यक्ष किशन बापोड़िया, सचिव बनवारी लाल करनानी, धर्म चंद अग्रवाल व अनिल बंसल का नाम रखा गया है. इस दौरान श्री अग्रवाल ने मीटिंग मौजूद सभी गोसेवकों के सामने और एक प्रस्ताव रखा कि सालबाड़ी गोशाला की कुल जमीन 15 एकड़ 57 डिस्मिल है, लेकिन बीएलआरओ के रिकॉर्ड में मात्र 14 एकड़ 17 डिस्मिल जमीन ही है. बाकि जमीन का भी पूरा रिकॉर्ड निकालने की जरुरत है.
इसके अलावा माटीगाड़ा के तुंबाजोत में भी गौशाला की 100 बीघा जमीन थी. जिसकी पुरानी कमेटी की लापरवाही के वजह से सरकार ने अधिग्रहित कर ली. श्री बापोरिया के साथ ही वरिष्ठ गोसेवक कैलाश नकीपुरिया ने भी राजेश समेत सभी गोसेवकों के प्रस्तावों का समर्थन किया. सबों की सर्वसम्मति से श्री आलमपुरिया सभी प्रस्तावों पर मंजूरी देते हुए कल से सभी गोसेवकों को सालबाड़ी स्थित गोशाला में पांच-10 सदस्यों के साथ केवल हरेक दो-तीन घंटे पर अलग-अलग टीम द्वारा मौके का जायजा लेने का भी सलाह दिया.
आज की मीटिंग में केसरी चंद अग्रवाल, बाबूलाल नेमानी, विपिन बिहारी गुप्ता, अतुल झंवर, विष्णु केड़िया, विजय गुप्ता, संदीप मित्तल, संदीप करनानी, दीपक मानसिंहका समेत भारी तादाद में गोसेवक शामिल हुए.
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