मालदा : गंगा के कहर से एक ग्राम पंचायत की बिगड़ी सूरत

Published at :07 Apr 2018 5:14 AM (IST)
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मालदा : गंगा के कहर से एक ग्राम पंचायत की बिगड़ी सूरत

सीटों की संख्या घट कर रह गयी 22 से पांच अधिकांश गांव नदी के कटाव में बह गए पंचायत चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं मालदा : पिछले दो दशक के दौरान गंगा नदी ने एक पर एक कई गांवों को लील लिया है. जिसकी वजह से ग्राम पंचायतों में सीटों की संख्या कम हो […]

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सीटों की संख्या घट कर रह गयी 22 से पांच
अधिकांश गांव नदी के कटाव में बह गए
पंचायत चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं
मालदा : पिछले दो दशक के दौरान गंगा नदी ने एक पर एक कई गांवों को लील लिया है. जिसकी वजह से ग्राम पंचायतों में सीटों की संख्या कम हो गई है.
पहले मालदा के कालियाचक-2 ब्लॉक के अधीन राजनगर ग्राम पंचायत में कुल सीटों की संख्या 22 थी. अब सीटों की संख्या घट कर पांच हो गई है. दरअसल जैसे-जैसे गंगा नदी ने गांवों को लिलना शुरू किया वैसे-वैसे सीटों की संख्या भी कम होती चली गई. पूरे राज्य में किसी ग्राम पंचायत में सिर्फ पांच सीटें हों, ऐसा उदाहरण शायद कम ही देखने को मिलेगा. इस ग्राम पंचायत के एक तरह से कहें तो गंगा ने 17 सीटों को भी लिल लिया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि मालदा के नक्शे से एक पर एक गांव गायब होते चले गये. अब तो ग्राम पंचायतों के चुनाव में किसी तरह का उत्साह ही नहीं है. हालांकि स्थानीय लोग बचे हुए गांव ने ही सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है. स्थानीय पंचायत सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पांच सदस्यीय इस ग्राम पंचायत पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है.
पांच सीटों में से कांग्रेस ने तीन सीटें जीती हैं, जबकि एक सीट माकपा तथा एक सीट भाजपा की झोली में है. यहां के प्रधान समाउन शेख हैं, जबकि प्रधान की जिम्मेदारी नूरजा बीबी संभाल रही हैं. तीसरे कांग्रेसी पंचायत सदस्य का नाम मोइनुर शेख है, जबकि विरोधी दल नेता की जिम्मेदारी भाजपा की ज्योत्सना मंडल संभाल रही हैं. माकपा के पंचायत सदस्य का नाम असीम घोष है.
पंचायत प्रधान ने कहा कि यहां किसी तरह की राजनीतिक तोड़-जोड़ नहीं होती है. मात्र पांच ही सदस्य हैं. सभी लोग मिलजुल कर काम करते हैं. इलाके के विकास के लिए मिल बैठकर रणनीति बनायी जाती है. राजनगर गांव के निवासी राजू मंडल, पंकज मंडल, गौतम घोष आदि ने बताया कि यह पूरा ही इलाका गंगा के कटाव से प्रभावित है. इन लोगों ने कहा कि राज्य सरकार इलाके के विकास के लिए काम तो कर रही है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या गंगा कटाव है. जब तक गंगा कटाव रोकने की कोई ठोस पहल नहीं की जायेगी, तब तक कोई भी विकास बेमानी है.
इन लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि फरक्का बैरेज प्रबंधन की ओर से नदी कटाव को रोकने की कोई कोशिश नहीं की जा रही है. इधर, जिला पंचायत कार्यालय सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार गंगा के उस पार राजनगर ग्राम पंचायत है. 1978 में 22 सदस्यों को लेकर इस ग्राम पंचायत की शुरूआत हुई थी. करीब-करीब तब से ही गंगा ने भी अपना कहर बरपाना शुरू किया है. बीच-बीच में गंगा के बाढ़ में गांव बह जाते हैं. धीरे-धीरे कर इस ग्राम पंचायत के काफी गांव गंगा के गर्भ में समा गये.
बाद में सिर्फ पांच सदस्यों को लेकर इस ग्राम पंचायत का काम चल रहा है. इस पंचायत के अधीन बेगमगंज, दोगाछी, गाजियापाड़ा, हकीमाबाद, चरबारपुर, इस्लामपुर, नयाग्राम मोजा के कई गांव गंगा के गर्भ में समा गये हैं. नयाग्राम मोजा में पहले 11 सीटें थी, जो अब घटकर तीन रह गई है. इसी तरह से और भी कई मोजों के गांव गंगा में समा गये.
पंचायत प्रधान समाउन शेख ने बताया है कि इस इलाके के अधिकांश लोग खेतीबाड़ी तथा दिन-मजदूरी करते हैं. गंगा के कटाव से कमोवेश सभी लोग प्रभावित हैं. इस बार पंचायत चुनाव को लेकर किसी में कोई खास उत्साह नहीं है. राजनीतिक दलों को लगता है इस ग्राम पंचायत से कोई लेना-देना नहीं है.
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