भागीरथी से सागरदीघी तक बनायी जा रही नहर

Published at :02 Apr 2018 9:36 AM (IST)
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भागीरथी से सागरदीघी तक बनायी जा रही नहर

रायखर, बांस पाबदा बोड़ो टेंगरा मछली की है काफी मांग मालदा : भागीरथी नदी से कैनाल(नहर) बनाकर सागरदीघी को जोड़ा जा रहा है. सागरदीघी में नदी में पायी जानेवाली मछलियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में पाला जायेगा. इसके जरिये इन मछिलयों की विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का भी प्रयास होगा. कैनाल की खुदाई का काम […]

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रायखर, बांस पाबदा बोड़ो टेंगरा मछली की है काफी मांग
मालदा : भागीरथी नदी से कैनाल(नहर) बनाकर सागरदीघी को जोड़ा जा रहा है. सागरदीघी में नदी में पायी जानेवाली मछलियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में पाला जायेगा. इसके जरिये इन मछिलयों की विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण का भी प्रयास होगा. कैनाल की खुदाई का काम शुरू हो चुका है. करीब दो किलोमीटर लंबी कैनाल बनाकर नदी से दीघी तक पानी लाया जायेगा. इस खबर को लेकर मछली के कारोबार से जुड़े लोगों और मछली खाने के शौकीन लोगों में उत्साह है.
मत्स्य विभाग सूत्रों ने बताया कि नदी में पाये जाने वाली रायखर, बांस पाबदा, बोड़ो टेंगरा की काफी मांग है. ये मछलियां अब बाजार में आसानी से नहीं मिलतीं. अगर कभी बाजार में आती भी हैं तो इनके दाम आसमान पर होते हैं.
इसके अलावा कई जगह ये मछलियां नदी की जगह तालाबों में पालकर बेची जाती हैं जिनमें वह प्राकृतिक स्वाद नहीं होता. सागरदीघी में नदी का पानी लाकर प्राकृतिक परिवेश में नदी की मछलियों को पाला जायेगा.
मालदा के इंगलिशबाजार ब्लॉक की काजीग्राम ग्राम पंचायत में यह सागरदीघी स्थित है. मत्स्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक यह मीठे पानी में मत्स्य पालन का देश का सबसे बड़ा सरकारी केन्द्र है. यहां कतला, रोहू, मृगेल, कालबोस, बाटा जैसे मछलियों का प्रजनन कराया जाता है. यहां से न्यूनतम सरकारी दर पर मछलियां बेची जाती हैं. इसके लिए यहां पर एक मछली विक्रय केन्द्र भी है.
उल्लेखनीय है कि सागरदीघी से कुछ ही दूरी पर भागीरथी नदी है, जो गंगा की ही एक शाखा है. बारिश के मौसम में इस नदी का जलस्तर बहुत बढ़ जाता है. नदी भयंकर रूप धारण करके कटाव शुरू कर देती है. अब इसी भागीरथी से कैनाल निकालने का काम चल रहा है.
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