अब ड्रोन कैमरे से होगी रेलवे पुलों की निगरानी

Published at :30 Mar 2018 5:31 AM (IST)
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अब ड्रोन कैमरे से होगी रेलवे पुलों की निगरानी

पानी के नीचे पीलरों की भी होगी जांच विशेष उपकरणों से लैस गोताखोर तैनात सिलीगुड़ी : पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त करते हुए कई खास उपाय किए हैं.इसके तहत रेलवे पुलों की निगरानी विशेष रुप से की जाएगी. इस काम के लिए ड्रोन कैमरे की मदद भी ली जाएगी. यह जानकारी […]

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पानी के नीचे पीलरों की भी होगी जांच
विशेष उपकरणों से लैस गोताखोर तैनात
सिलीगुड़ी : पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त करते हुए कई खास उपाय किए हैं.इसके तहत रेलवे पुलों की निगरानी विशेष रुप से की जाएगी. इस काम के लिए ड्रोन कैमरे की मदद भी ली जाएगी. यह जानकारी पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के सीपीआरओ प्रणव ज्योति शर्मा ने दी है.
श्री शर्मा ने बताया है कि तकनीकी का इस्तेमाल करना आज के दिन बेहद जरूरी है. पूर्वोत्तर सीमा रेलवे ने इसी दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है. ड्रोन कैमरे की मदद से पुलों की निगरानी की जाएगी. इससे किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल निगरानी रखी जा सकेगी.
उन्होंने आगे बताया कि पुलों का निरीक्षण एक विकसित एवं विस्तृत प्रक्रिया है.क्योंकि हमेशा ही पुलों से ट्रेनों की आवाजाही होती रहती है. जिसके कारण आमतौर पर पुलों पर नियमित निगरानी रख पाना संभव नहीं है. इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रोन कैमरे की मदद से पुलों की निगरानी रखने का निर्णय लिया गया है.
कैमरे की मदद से संदिग्ध वस्तुओं की तत्काल मिलेगी जानकारी
श्री शर्मा ने आगे बताया कि ड्रोन कैमरे की मदद से पुल तथा उसके सुपर स्ट्रक्चर एवं पीलरों की तस्वीर पूरी तरह से साफ आती है. इन कैमरों की मदद से जहां तुरंत संदिग्ध वस्तुओं का पता चल सकेगा वहीं पुल को अगर किसी प्रकार का नुकसान है तो उसकी जानकारी भी मिल सकेगी.
इसकी शुरुआत पूर्वोत्तर सीमा रेलवे के गुवाहाटी लामडिंग सेक्शन में कर दी गई है.यहां पुलों की निगरानी ड्रोन कैमरे की मदद से की गजा रही है.उन्होंने आगे कहा कि इस सुविधा का विस्तार धीरे -धीरे पूरे पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र में किया जाएगा.
रेलवे सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार सिलीगुड़ी तथा न्यू जलपाईगुड़ी सहित सभी रेल खंडो पर पुलों निगरानी ड्रोन कैमरे की मदद से की जाएगी.
इसके लिए कुल 28 पुलों की एक सूची भी बनाई गई है. इनमें सरायघाट पुल, नर नारायण पुल तथा दयालपुर पुल भी शामिल है. इस बीच महत्वपूर्ण पुलों के निरीक्षण का काम भी जारी है. सिर्फ पुल के ऊपरी हिस्से की निगरानी ही नहीं की जा रही है, बल्कि नदी के नीचे पुलों के पीलरों पर भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है.
इसके लिए प्रशिक्षित गोताखोर नियुक्त किए गए हैं . जो विशेष उपकरणों की मदद से पानी के नीचे पुलों की नींव की स्थिति पता करेंगे और इसकी जानकारी रेलवे को देंगे. माना जा रहा है कि इस नई व्यवस्था से ना केवल सुरक्षा के इंतजाम होंगे बल्कि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने में भी कामयाबी मिलेगी.
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