बंगाल :पहाड़ पर अब कभी भी बंद का एलान नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jan 2018 8:50 AM (IST)
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सिलीगुड़ी : अलग राज्य गोर्खालैंड को लेकर पहाड़ पर हुए 104 दिनों की हिंसक आंदोलन के बाद गोर्खाओं के नये व कद्दावर नेता के रुप में उभरकर आये विनय तमांग और अनित थापा ने रविवार को सुकना में अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया. साथ ही दोनों नेताओं ने शांति और विकास के जरिये […]
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सिलीगुड़ी : अलग राज्य गोर्खालैंड को लेकर पहाड़ पर हुए 104 दिनों की हिंसक आंदोलन के बाद गोर्खाओं के नये व कद्दावर नेता के रुप में उभरकर आये विनय तमांग और अनित थापा ने रविवार को सुकना में अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन किया. साथ ही दोनों नेताओं ने शांति और विकास के जरिये दार्जिलिंग पहाड़ को नये सिरे से विकसित करने की हुंकार भरी.
गोजमुमो के सुप्रीमो सह जीटीए के कार्यवाहक चेयरमैन विनय तमांग ने आज सुकना के स्कूल मैदान में विराट जनसभा को अपने विशेष अंदाज में संबोधित कर राजनैतिक तजुर्बेकार के रुप में अपने को रु-ब-रु कराया. उन्होंने सबसे पहले स्व. सुभाष घीसिंग के साथ 80 के दशक से गोर्खालैंड आंदोलन से जुड़ने और अब-तक के अपने राजनैतिक सफर से सबों को परिचय कराया. साथ ही पहाड़ पर बेवजह 104 दिनों के लगातार हिंसक आंदोलन भड़काने वाले मोर्चा के तत्कालीन सुप्रिमो विमल गुरुंग और दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद एसएस अहलुवालिया पर जोरदार तंज कसते हुए दोनों को बाबा घोषित किया.
श्री तमांग ने विमल को पहाड़ वाले बाबा और अहलुवालिया को चंडीगढ़ के दाढ़ी वाला बाबा करार दिया. उन्होंने कहा कि दोनों ही बाबा पहाड़ के अपने शिष्यों को हिंसक आंदोलन की आग में झोंक कर अंतरध्यान हो गये हैं. भाषाई आंदोलन और गांधीवादी आंदोलन के आड़ में पहाड़ पर हिंसक आंदोलन भड़का कर विमल बाबा अपने परम शिष्य रोशन गिरि को साथ लेकर कभी सिक्किम, कभी नेपाल तो कभी दिल्ली भागते फिर रहे हैं.
कहां छुपे हैं किसी को सही जानकारी तक नहीं है. वहीं, दाढ़ी वाले बाबा को पहाड़ की दो लाख शिष्यों का वोट मिलने के बाद उनकी सुध लेने तक का समय नहीं है. साथ ही श्री तमांग ने दोनों को भ्रष्टाचारी बाबा भी करार दिया. उन्होंने पहाड़ के विकास के नाम विमल बाबा के राज में जीटीए में हुए करोड़ों रुपये के घपले के हिसाब-किताब पर सवाल खड़ा किया. वहीं, दाढ़ी वाले बाबा पर सांसद कोष के करोड़ों रुपये डकारे जाने पर भी प्रश्न खड़ा किया. उन्होंने भाजपा पर करारा प्रहार किया. श्री तमांग ने कहा पहाड़ की जनता ने 2008 और 2014 में दो बार दार्जिलिंग लोकसभा सीट से भाजपा को जीत दिलायी.
लेकिन दोनों ही बार भाजपा ने गोर्खाओं की भावनाओं को छला. उन्होंने अब पहाड़ की जनता को किसी के बहकावे में न आने की सलाह दी. मोदी ने चुनाव से पहले ‘गोर्खाओं का सपना, मेरा सपना’ कहकर पहाड़ की जनता की सहानुभूति ली लेकिन आज तक गोर्खाओं का सपना अपना नहीं हुआ.
विनय तमांग ने सुकना से एलान करते हुए कहा कि उनके रहते अब पहाड़ पर कभी बंद नहीं होगा और न ही हड़ताल. पहाड़ का केवल विकास होगा. उन्होंने अन्य राजनैतिक दलों से भी बंद की राजनीति से परे हटकर विकास के रथ में चढ़ने और सहयोग करने की गुहार लगायी.
उन्होंने कहा कि नये साल में नये सिरे से पहाड़ के विकास की गाथा लिखी जायेगी. पहाड़ की मूलभूत समस्या रोटी, कपड़ा और मकान पर काम करना उनकी प्राथमिकता होगी. पानी, सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि का चहुमुखी विकास होगा. अप्रैल 2018 तक पहाड़ पर हर घर में बिजली पहुंचाने पर कार्य शुरु हो गया है. इसी साल से पहाड़वासी को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति होगी.
स्वास्थ्य परिसेवा में सुधार किया जायेगा. दार्जिलिंग, कार्सियांग, मिरिक के अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में तब्दील किया जायेगा. दार्जिलिंग को वापस शिक्षा, आइटी व इंडस्ट्रीज हब में तब्दील किया जायेगा. पहाड़ पर अलग से एक विश्वविद्यालय की स्थापना की जायेगी. उच्च शिक्षा के लिए पहाड़ के बच्चों को देश-दुनिया में न भटकना पड़े इसके लिए पहाड़ पर ही आइटी हब व इनसे संबंधित इंस्टीट्यूट खोले जायेंगे.
शिक्षा, स्वास्थ्य परिसेवा का स्तर सुधारने के लिए विशेषज्ञों की बहाली की जायेगी. पहाड़ के युवाओं को नौकरी दी जायेगी.
कई अहम रहस्यों का किया खुलासा
सुकना में आयोजित जनसभा से विनय ने पहाड़ पर हुए 104 दिनों के हिंसक आंदोलन से जुड़े कई अहम रहस्यों का भी खुलासा किया.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दार्जिलिंग में किये गये प्रशासनिक बैठक के दौरान पुलिस पर हुई फायरिंग हो या आंदोलन के बाद विमल गुरुंग के अंडरग्राउंड होने या उनके रैन बसेरा पातेलाबास पर पुलिस का छापा और उनके ठिकाने व पार्टी दफ्तर से आग्नेयास्त्रों का जखीरा मिलने का मामला या फिर आंदोलन के दौरान श्री तमांग को ही मरवाने की साजिश जैसे कई अहम रहस्यों से उन्होंने पर्दा हटाया.
इन सब के लिए एक मात्र जिम्मेवार विमल गुरुंग को ही ठहराया. साथ ही श्री तमांग ने अंडरग्राउंड होकर सोशल साइटों के माध्यम से उन्हें गाली-गलौज करने वाले विमल गुरुंग और उनके समर्थकों को सामने आकर गाली देने के लिए ललकारा. श्री तमांग ने कहा कि जो उन्हें कुत्ता कहते हैं तो मैं पहाड़ पर शांति बरकार रखने और गोर्खा समुदाय के चहुमुखी विकास के लिए स्वामी भक्त कुत्ता हूं और इसका मुझे गर्व है.
घीसिंग के नाम पर सड़क
साथ ही उन्होंने रोहिणी टॉल प्लाजा को इसी वर्ष अप्रैल से हटाने का एलान किया. वहां कार्यरत लोगों को अन्य विभाग में स्थानांतरित करने की भी बात कही. वहीं, रोहिणी सड़क का नाम बदल कर गोर्खालैंड आंदोलन के जनक दिवंगत सुभाष घिषिंग के नाम करके उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने की वकालत की.
उन्होंने पहाड़ की जीवन रेखा एनएच-10, एनएच-55, जीटीए की सड़क व पीडब्ल्यूडी की सड़कों को दुर्घटना मुक्त सड़क बनाने का भी एलान किया. आज की जनसभा में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कार्सियांग, मिरिक के अलावा तराई-डुआर्स के विभिन्न इलाकों से हजारों की तादाद में मोर्चा समर्थक शामिल हुए.
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