बालू का महानंदा व बलासन नदी से अवैध खनन जारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jan 2018 8:49 AM (IST)
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जितेन्द्र पाण्डेय सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग जिले के महानन्दा व बलासन नदियों में एनजीटी व केंद्रीय वन व पर्यावरण विभाग का खनन का आदेश नहीं है. उसके बाद भी करीब 500 जगहों पर धड़ल्ले से बालू व पत्थर का अवैध रूप से खनन हो रहा है. इससे सरकार को करोड़ो रूपये के राजस्व का तो नुकसान […]
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जितेन्द्र पाण्डेय
सिलीगुड़ी : दार्जिलिंग जिले के महानन्दा व बलासन नदियों में एनजीटी व केंद्रीय वन व पर्यावरण विभाग का खनन का आदेश नहीं है. उसके बाद भी करीब 500 जगहों पर धड़ल्ले से बालू व पत्थर का अवैध रूप से खनन हो रहा है.
इससे सरकार को करोड़ो रूपये के राजस्व का तो नुकसान हो ही रहा है साथ ही पर्यावरण पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
देखें तो इन दोनों नदियों में एनजीटी का आदेश महज 50-60 जगहों पर ही खनन का है.जबकि 500 से अधिक स्थानों पर खनन हो रहा है.
जिला प्रशासन से लेकर शासन तक पैठ रखने वाले खनन सिंडिकेट के दम पर नदी के बीच से बालू खनन और लोड करने का काम धड़ल्ले से चल रहा है. इस पर बालू माफियाओं का दबदबा है. नदी के बीच से बालू निकाल कर उसे वैध बना लिया जाता है.इससे जलीय पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, साथ ही अपराधिक घटनाएं भी बढ़ रही है.
इसको लेकर कई बार आवाज उठी, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा. दिलचस्प मामला यह है कि सब कुछ खुली आंखों के सामने हो रहा है. देखा जा रहा है कि किसी भी जिम्मेदार अधिकारी की इन अवैध बालू खनन पर नजर नहीं पड़ रही है. इस खेल में बालू माफिया दिन-रात जुटे हैं.
कई घाटों का हो चुका है टेंडर फिर भी बालू माफिया कर रहे हैं अवैध खनन
जानकारी के अनुसार चम्पासारी, मिलनमोड़, मिलिट्री घाट, नौकाघाट, पलास, डेमाल, लालसारा, डुमरीगुड़ीघाट, ताराबाड़ी, निमाई , प्रतिराम,माटीगाड़ा, सालुगाड़ा व कावाखाली घाटों का टेंडर हो चुका है.
फिर भी इन जगहों से बालू माफिया के लोग अवैध खनन कर रहे हैं. इनलोगों ने नदी से ट्रकों को निकलने के लिए एक अलग मार्ग का भी निर्माण कर लिया है. सूत्र बताते हैं कि दोनों नदियों से अवैध रूप से हजारों ट्रक बालू निकाले जा रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार बिना चालान के ही बालू नदी से निकल कर लोगों के घर तक पहुंच जाते हैं.
शहर में बालू लदे ट्रकों से सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ रही है. ट्रकों का फिटनेस भी सही नहीं है. बालू माफियाओं को किसी प्रकार का डर नहीं है.ना तो गाड़ियों के कागजात सही होते हैं और ना ही फिटनेस. पुलिस भी दूसरे डिपार्टमेंट के सर पर ठिकरा फोड़ते नजर आती है. सड़क पर मौजूद पुलिस वालों को अवैध बालू से लदे ट्रक वाले 50-60 रूपये देकर आगे निकल जाते हैं. इस पर भी पुलिस के आला अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है.
क्या कहा पुलिस आयुक्त ने
नदी से बालू के अवैध खनन पर पुलिस रोक नहीं लगा सकती, क्योंकि यह विभाग पुलिस का नहीं है. यदि कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी का आदेश आता है, तो पुलिस कार्रवाई करेगी. बालू लदे ट्रकों का पुलिस जांच पड़ताल करती है. उनके पास चालान होते है. पर वह चालान सही है या गलत इसकी जांच पुलिस नहीं कर पाती. यह जांच लैंड डिपार्टमेंट का है.
सुनील चौधरी, पुलिस आयुक्त, सिलीगुड़ी
क्या कहना है डीएम का
बलासन व महानन्दा नदी में अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए लगातार छापेमारी की जाती है. बालू का अवैध खनन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगी. साथ ही उन्होनें कहा कि बलासन नदी में बच्चों द्वारा बालू के अवैध खनन कराऐ जाने का मामला सामने आया है.
उस पर भी छापेमारी की गयी. पर महिलाएं सामने आ जाती है और कहती है की उनसे कोई बालू माफिया खनन नहीं करा रहा. यह अपनी रोजी रोटी के लिए कर रहे है. फिर भी इसकी जांच की जा रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि कई घाटों को लीज पर दिया गया है.
जयशी दासगुप्ता, डीएम, दार्जिलिंग
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