जिला अस्पताल में लगेगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन

Published at :04 Jan 2018 6:47 AM (IST)
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जिला अस्पताल में लगेगी ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन

एक करोड़ की परियोजना सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाये जाने की कवायद शुरू कर दी गयी है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल उत्तर बंगाल का पहला अस्पताल होगा जहां यह मशीन लगेगी. इस मशीन को लगाने के लिए कमरा व इंटीरियर कार्य पूरा किया जा चुका है. कोलकाता से मशीन लाने […]

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एक करोड़ की परियोजना

सिलीगुड़ी : सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाये जाने की कवायद शुरू कर दी गयी है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल उत्तर बंगाल का पहला अस्पताल होगा जहां यह मशीन लगेगी. इस मशीन को लगाने के लिए कमरा व इंटीरियर कार्य पूरा किया जा चुका है. कोलकाता से मशीन लाने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. एक करोड़ की इस परियोजना को मार्च तक समाप्त करने का आश्वासन रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन डा. रूद्रनाथ भट्टाचार्य ने दिया है.
सिलीगुड़ी में रक्त की कमी हमेशा की समस्या है. शायद ही कभी सिलीगुड़ी अस्पताल में आसानी से रक्त उपलब्ध हो. बीते कुछ महीने पहले ही सिलीगुड़ी महकमा इलाके में डेंगू ने भयावह कोहराम मचाया था. डेंगू के मरीजो से सिलीगुड़ी के सरकारी व निजी सभी अस्पताल भरे हुए थे. प्लेटलेट्स गिरने की वजह से कई मौतें भी हुयी. इस दौरान सिलीगुड़ी में प्लेटलेट्स का हाहाकार भी मचा था. सरकारी से लेकर निजी व संवेच्छासेवी संगठनों के ब्लउ बैंको में भी ब्लड व प्लेटलेट्स की भारी कमी हो गयी थी. इसके अतिरिक्त आये दिन सड़क दुर्घटना आदि की घटनाएं होती है. जिसमें रक्त की काफी आवश्यकता होती है. जबकि ग्रुप के अनुसार ब्लड की मांग पूरी नहीं होती है. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की स्थिति भी अच्छी नहीं है. 600 यूनिट क्षमता वाली सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 200 यूनिट औसतन रक्त रहता है. गर्मी के दिनों में यह आंकड़ा 50 के नीचे पहुंच जाता है.
रक्त संकट को मिटाने के लिए सिलीगुड़ी के कई स्वेच्छासेवी संस्थाएं समय-समय पर रक्तदान शिविर का आयोजन करती हैं. इन शिविरों के मार्फत रक्त संग्रह किया जाता है. जबकि तकनीक के अभाव में काफी यूनिट रक्त बर्बाद हो जाता है. रक्त में लाल रक्त कण, श्वेत रक्त कण, प्लाज्मा व प्लेटलेट्स जैसे कई अवयव पाये जाते हैं. एक मरीज को रक्त के इन सभी अवयवों की आवश्यकता नहीं होती है. किसी को लाल रक्त, तो किसी को श्वेत व किसी को प्लेटलेट्स तो किसी को प्लाज्मा की जरूरत होती है. लेकिन तकनीक के अभाव में रक्त के किसी भी अवयव की आवश्यकता होने पर मरीज को पूरा रक्त ही चढ़ाया जाता है. फलस्वरूप उस मरीज के शरीर में अनायास ही रक्त के अन्य अवयवों को चढ़ा दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ रक्त के किसी एक अवयव की वजह से किसी मरीज की मौत हो जाती है. तकनीक के अभाव की वजह से रक्त संकट को मिटाना भी अपने आप में एक समस्या बन गयी है.
एक यूनिट रक्त से करीब चार मरीजों की जान बचायी जा सकती है. इसके लिए रक्त के अवयवों को अलग-अलग करने के उपकरण उपलब्ध होना आवश्यक है. उत्तर बंगाल के दो मेडिकल कॉलेज में रक्त के अवयवों को अलग-अलग करने की व्यवस्था उपलब्ध है. उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज व मालदा मेडिकल कॉलेज में ब्लड कॉम्पोनेंट सेपरेटर मशीन लगा हुआ है.
मार्च तक काम कर लिया जायेगा पूरा : डॉ रुद्रनाथ
इस संबंध में सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के रोगी कल्याण समिति के चेयरमैन डॉ रुद्रनाथ भट्टाचार्य ने बताया कि रक्त संकट की समस्या समाधान के लिए ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था. काफी पहले ही प्रस्ताव को मंजूरी मिल गयी थी. मशीन को लगाने के लिए अस्पताल परिसर में ही कमरा निर्धारित कर दिया गया है. उसकी मरम्मती व इंटीरियर का काम भी पूरा हो चुका है. कोलकाता से मशीन लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है.
मार्च महीने तक योजना का कार्य समाप्त कर मशीन का उद्घाटन कर दिया जायेगा. इस मशीन के कार्यान्वित होने के बाद सिलीगुड़ी में रक्त संकट का काफी हद तक समाधान हो जायेगा. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी जयंत हांस्दा ने बताया कि यहां 600 यूनिट रक्त रखने की क्षमता है. जबकि औसतन 200 यूनिट रक्त रहता है. गर्मी के दिनों में यूनिट का आंकड़ा 50 के भी नीचे उतर जाता है. यह मशीन लगने के बाद समस्या का काफी हद तक समाधान हो जायेगा. और अधिक संख्या में मरीजों को रक्त के अवयव मुहैया कराना संभव हो पायेगा.
उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में 20 वर्ष पहले लगी थी मशीन
मिली जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज में 20 वर्ष पहले यह मशीन लगायी गयी थी. फिर भी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में रक्त संकट गहराया रहता है. कारण उत्तर बंगाल के विभिन्न हिस्सों के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य बिहार, सिक्किम व पड़ोसी देश नेपाल, भूटान व उत्तर बंगाल से सटे बांग्लादेश के कुछ हिस्सों से मरीज यहां आते हैं. अब सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में भी ब्लड कॉम्पोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने की कवायद तेज कर दी गयी है. इससे अधिक संख्या में आवश्यकता के अनुसार मरीजो को रक्त का अवयव मुहैया कराना संभव होगा और रक्त संकट की समस्या का काफी हद तक निपटारा संभव होगा. इस मशीन को लगाने के लिए सिलीगुड़ी जिला अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है.
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