वन उन्नयन निगम पर ही लगा पेड़ काटने का आरोप

Published at :24 Oct 2017 11:28 AM (IST)
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वन उन्नयन निगम पर ही लगा पेड़ काटने का आरोप

मालबाजार: जो रक्षक वही भक्षक. इसी उक्ति को चरितार्थ कर रहा है पश्चिमबंग वन उन्नयन निगम.उत्तर बंगाल विकास विभाग के आवासीय परियोजनओं के लिये वनों के विकास के लिये गठित पश्चिमबंग वन उन्नयन निगम पर अपनी ही जमीन पर लगे पेड़ों को काटने का आरोप है. उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिये वन उन्नयन […]

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मालबाजार: जो रक्षक वही भक्षक. इसी उक्ति को चरितार्थ कर रहा है पश्चिमबंग वन उन्नयन निगम.उत्तर बंगाल विकास विभाग के आवासीय परियोजनओं के लिये वनों के विकास के लिये गठित पश्चिमबंग वन उन्नयन निगम पर अपनी ही जमीन पर लगे पेड़ों को काटने का आरोप है. उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिये वन उन्नयन निगम की जमीन पर लगे 33 पेड़ों को काटने की योजना है. वन उन्नयन निगम के अधिकारियों से इस बारे में जब पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भेंटकर आपत्ति जताई तो उन्होंने बातचीत के जरिये समस्या को सुलझाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन बाद में उन्होंने बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई. इसके बाद ही इन कार्यकर्ताओं ने पेड़ों की कटाई रुकवाने के लिये अदालत जाने की चेतावनी दी है.
उल्लेखनीय है कि लाटागुड़ी के नतूनपाड़ा इलाके में माल-मयनागुड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग-34 के समीप वन उन्नयन निगम की कई बीघा जमीन है. एक-दो माह पूर्व इसी जमीन पर उत्तर बंगाल विकास विभाग ने पांच करोड़ रुपए की लागत से आवासीय परियोजना शुरु करने का निर्णय लिया है. उसके बाद ही विगत 16 अक्टूबर से उसी जमीन पर लगे बेशकीमती सागौन और कृष्णचूड़ा के पेड़ों को काटने का सिलसिला शुरु कर दिया गया है. हैरत की बात है कि वन उन्नयन निगम की जमीन पर लगे पेड़ों को निगम के ही कर्मचारी काट रहे हैं. जबकि वन विभाग के कानून के मुताबिक ही इन पेड़ों को काटना अवैध है. जानकारी मिलने पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को पेड़ काटने से रोका. वहीं, दूसरी ओर अन्य कार्यकर्ताओं ने वन उन्नयन निगम के जलपाईगुड़ी वन विभाग के डिवीजनल मैनेजर दिलीप कुमार योंजन से भेंट की. इसका नतीजा हुआ कि उस रोज पेड़ काटने का काम रोक दिया गया. लेकिन सोमवार से पेड़ काटने का काम फिर से चालू कर दिया गया.
पेड़ों को वन उन्नयन निगम के ही द्वारा काटे जाने को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता अनिर्वाण मजुमदार ने बताया कि जहां ये पेड़ काटे जा रहे हैं वहां बिना पेड़ काटे भी आवासीय परिसर तैयार किया जा सकता है. उन्होंने संगठन की ओर से निगम और ब्लॉक प्रशासन से न्यूनतम पेड़ काटकर काम करने की सलाह दी थी.
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