टीएमसीपी नेता के लिए प्रवेश परीक्षा में देरी

Published at :22 Oct 2017 10:16 AM (IST)
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टीएमसीपी नेता के लिए प्रवेश परीक्षा में देरी

गौड़बंग विवि पर फिर अनियमितता का आरोप प्रसून राय के एमफिल में दाखिले पर उठे सवाल मालदा : गौड़बंग विश्वविद्यालय पर तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के एक जिला स्तरीय नेता को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए एमफिल की भर्ती प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि इसी […]

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गौड़बंग विवि पर फिर अनियमितता का आरोप
प्रसून राय के एमफिल में दाखिले पर उठे सवाल
मालदा : गौड़बंग विश्वविद्यालय पर तृणमूल छात्र परिषद (टीएमसीपी) के एक जिला स्तरीय नेता को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अनुचित फायदा पहुंचाने के लिए एमफिल की भर्ती प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया गया है. आरोप है कि इसी अनियमितता के चलते स्वामी विवेकानंद छात्रवृत्ति से विश्वविद्यालय के एमफिल विद्यार्थी वंचित हुए हैं. विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस मुद्दे पर आंदोलन करने का फैसला लिया है.
आरोप है कि जान-बूझकर भर्ती परीक्षा देर से लेने के अलावा उसके परिणाम देर से घोषित किये गये. वहीं, विवि के उपकुलपति (वीसी) प्रो गोपालचंद्र मिश्र का कहना है कि दरअसल, बाढ़ के चलते ही परीक्षा लेने और परिणाम प्रकाशित करने में देर हुई. जबकि प्रसून राय का आरोप है कि उन्होंने कोई विशेष लाभ नहीं उठाया है. उन्होंने अपनी मेधा के बल पर ही एमफिल में प्रवेश लिया है.
छात्र-छात्राओं का आरोप है कि प्रसून राय अभी बीएड के छात्र हैं. उस कोर्स को पूरा करे बिना वे एमफिल में दाखिला नहीं ले सकते हैं. इसीलिए विवि प्रशासन ने बाढ़ का बहाना कर एमफिल प्रवेश प्रक्रिया को पूरा करने में देर की है. इसी वजह से राज्य सरकार की स्वामी विवेकानंद छात्रवृत्ति योजना से एमफिल और पीएचडी के विद्यार्थी वंचित हुए हैं. पहले से गौड़बंग विश्वविद्यालय प्रशासन पर अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं. इस नये आरोप ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.
उधर, आरोपों के लपेटे में आये तृणमूल छात्र परिषद के नेता प्रसून राय ने बताया कि आरोप बेबुनियाद है. कुछ लोग जान-बूझकर इस तरह के आरोप लगा रहे हैं. कहीं भी ऐसा कोई निषेध नहीं है कि बीएड का विद्यार्थी एमफिल में दाखिला नहीं ले सकता है. वहीं, छात्र परिषद के जिलाध्यक्ष बाबुल शेख ने बताया कि तृणमूल छात्र नेता को एमफिल में प्रवेश अवसर देने के लिए ही देरी की गयी. इससे बहुत से छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति के लाभ से वंचित रह गये हैं.
इस संबंध में विवि के कई अध्यापकों ने कहा कि पहले से ही आरोपों से घिरे विवि प्रशासन पर एक और आरोप लगा है. वे लोग कोई बयान दे भी नहीं सकते. बयान देने पर ही उन पर भाजपा या अन्य कुछ लेबल लग जा सकता है. एक अन्य अध्यापक ने आरोप लगाया कि जिस अधिकारी को शिक्षा मंत्री के निर्देश पर परीक्षा नियामक के पद से हटाया गया था वे अभी भी विवि में अपने पद पर बने हुए हैं.
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