राष्ट्रीय राजमार्ग पर पशुओं का जमावड़ा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Oct 2017 4:23 AM (IST)
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जहां-तहां विचरते रहते हैं गाय-बैल आये दिन हो रहे हादसे, कई मवेशी भी मरे बागडोगरा. राष्ट्रीय राजमार्ग पर काफी संख्या में मवेशी इन दिनों छुट्टा घूम रहे हैं. इसकी वजह से आये दिन कोई ना कोई दुर्घटना होती है, लेकिन इस मामले को देखनेवाला कोई नहीं है. खासकर रात के अंधेरे में तो सिलीगुड़ी से […]
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जहां-तहां विचरते रहते हैं गाय-बैल
आये दिन हो रहे हादसे, कई मवेशी भी मरे
बागडोगरा. राष्ट्रीय राजमार्ग पर काफी संख्या में मवेशी इन दिनों छुट्टा घूम रहे हैं. इसकी वजह से आये दिन कोई ना कोई दुर्घटना होती है, लेकिन इस मामले को देखनेवाला कोई नहीं है. खासकर रात के अंधेरे में तो सिलीगुड़ी से बागडोगरा की ओर गाड़ी चलाने में काफी जोखिम है. पिछले एक सप्ताह के अंदर ही सड़क हादसे में छह पशुओं की मौत हो गयी है, जबकि वाहन पर सवार लोग और चालक भी इस प्रकार के हादसों में घायल हुए हैं.
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर बागडोगरा इलाके में अवारा गाय तथा बैलों को साम्राज्य है. हर ओर ऐसे आवारा पशु विचरते रहते हैं. ऐसी परिस्थिति में वाहनों की आवजाही होती है. इसी दौरान किसी वाहन के टक्कर में पशुओं की मौत हो जाती है. स्थानीय लोगों को कहना है कि आवारा पशुओं के सड़क पर कब्जा कर लिये जाने से दो तरह की समस्या हो रही है. एक तो पशु की मौत होती है, साथ ही उसके शव को सड़क से हटाने को लेकर भी काफी परेशानी होती है. मृत गाय को हटाने वाला कोई नहीं होता है.
राष्ट्रीय राजमार्ग का इलाका ग्राम पंचायत के अधीन है. पंचायतों के पास मृत पशुओं को उठाने तथा उसको ठिकाने लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है. अगर किसी दुकान या घर से सामने पशु मर जाये तो शव कई दिनों तक वहीं पड़ा रहता है. बाद में परेशान लोगों को मोटी रकम खर्च करके मृत पशु को ठिकाने लगवाना पड़ता है. स्थानीय लोगों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, सड़क पर जो गाय और बैल खुलआम विचरते रहते हैं वह मुख्य रूप से बागडोगरा, गोसाईंपुर आदि इलाकों के हैं. यहां के लोग गायों को पालते हैं, लेकिन चरने-खाने के लिए खुला छोड़ देते हैं. इनका काम बस गाय से सुबह-शाम दूध निकालना भर रह गया है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह गाय का दूध निकालने के बाद मालिक उसको छोड़ देते हैं. शाम को गाय फिर चर कर आती है तो दूध निकाल कर फिर छोड़ दिया जाता है. रही बात बैलों की तो उन्हें कोई रखता ही नहीं. ग्रामीण लोग ऐसे ही बैल से छुटकारा पाना चाहते हैं. गाय और बैल जहां-तहां विचरते रहते हैं और मालिकों को इसकी जरा भी चिंता नहीं होती. ऐसा नहीं है कि गायों की कीमत कम है. बैल को लेकर भले ही ग्रमीणों को इसको पालने में दिलचस्पी नहीं हो, लेकिन गाय पालकर मोटा मुनाफा कमाने की इच्छा जरूर होती है. एक गाय की कीमत करीब 15 हजार रुपये के आसपास है. इसके बावजूद गायों को खुला छोड़ दिया जाता है.
इस मामले में गोसाईंपुर निवासी सुब्रत राय का कहना है कि हर दिन ही सड़क पर कहीं ना कहीं किसी पशु की मौत सड़क हादसे में हो रही है. दूसरी और पशुओं को सड़कों पर विचरण से गाड़ी चालक भी आतंकित हैं.
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