पहाड़ पर बेमियादी बंद जारी रखना मुश्किल

Published at :20 Sep 2017 9:31 AM (IST)
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पहाड़ पर बेमियादी बंद जारी रखना मुश्किल

सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में 90 दिनों से भी अधिक से समय से जारी गोरखालैंड आंदोलन की वजह से वहां की स्थिति पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है. खासकर बेमियादी बंद की वजह से लोगों का जीना दूभर हो गया है. आम लोग गोरखालैंड राज्य बनाने के पक्ष में तो हैं, लेकिन बेमियादी बंद तत्काल खत्म […]

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सिलीगुड़ी. दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में 90 दिनों से भी अधिक से समय से जारी गोरखालैंड आंदोलन की वजह से वहां की स्थिति पूरी तरह से अस्त-व्यस्त है. खासकर बेमियादी बंद की वजह से लोगों का जीना दूभर हो गया है. आम लोग गोरखालैंड राज्य बनाने के पक्ष में तो हैं, लेकिन बेमियादी बंद तत्काल खत्म करना चाहते हैं. न केवल बाजार-हाट, बल्कि स्कूल-कॉलेज भी बंद रहने से बच्चों के भविष्य पर विपरीत असर पड़ रहा है. पहाड़ पर गोरखालैंड विकास से ज्यादा भावनात्मक मुद्दा है.

यही वजह है कि 90 दिनों से भी अधिक समय से पहाड़ के लोग न केवल बंद का समर्थन कर रहे हैं, बल्कि हर दिन जुलूस आदि में भी शामिल हो रहे हैं. लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से पहाड़ की स्थिति बदलने लगी है. पुलिस की शक्ति के बाद जुलूस एवं रैलियों का दौर खत्म हो गया है. पहले जो लोग दिन भर रैलियां निकालते थे और थाने आदि का घेराव करते थे, वह सभी अब घरों से नहीं निकल रहे हैं.

इसके अलावा पिछले कुछ दिनों के दौरान बैंक और सरकारी कार्यालय आदि खुलने लगे हैं. ऐसी परिस्थिति में बिमल गुरूंग के लिए पहाड़ पर ज्यादा दिनों तक बेमियादी बंद चला पाना संभव नहीं दिख रहा है. तीन-चार दिनों पहले ही उन्होंने अज्ञात स्थान से एक ऑडियो जारी कर गोरखालैंड समर्थकों से बंद को जोरदार करने के लिए विभिन्न स्थानों पर पिकेटिंग करने का निर्देश दिया था.

उनके इस निर्देश के बाद कालिम्पोंग में कुछ गोरखालैंड समर्थक बंद के समर्थन में रैली निकालते देखे गये. तब पुलिस के साथ इनका संघर्ष भी हुआ था. पहाड़ के अन्य स्थानों पर गोरखालैंड समर्थक पिकेटिंग आदि करने के लिए बाहर नहीं निकले. स्वाभाविक तौर पर बिमल गुरूंग पर दबाव काफी बढ़ गया है. न केवल विरोधी, बल्कि उनके अपने रहे विनय तमांग तथा अनित थापा जैसे गोजमुमो नेता ही उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं. एक पर एक दर्जनों मुकदमें दर्ज होने के बाद बिमल गुरूंग भूमिगत हो गये हैं. वह कहां हैं, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है. ऐसे पुलिस का मानना है कि बिमल गुरूंग पड़ोसी राज्य सिक्किम में कहीं छिपे हुए हैं. बिमल गुरूंग के विरोधी इसी का फायदा उठाते हुए बिमल गुरूंग को सामने आने की चुनौती दे रहे हैं. इस मामले में विनय तमांग का कहना है कि पहाड़ पर बेमियादी बंद से कुछ मिलने वाला नहीं है. बिमल गुरूंग को अपने गुप्त ठिकाने से बाहर निकल कर दार्जिलिंग आना चाहिए. दूसरी तरफ गोरामुमो की ओर से भी कुछ ऐसे ही मांग की जा रही है. गोरामुमो नेता महेन्द्र छेत्री का कहना है कि बिमल गुरूंग जहां भी कहीं हों, वह दार्जिलिंग आयें. राज्य के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गई है. केन्द्र सरकार से भी गोरखालैंड को लेकर त्रिपक्षीय वार्ता बुलाने की मांग की जानी चाहिए. बिमल गुरूंग को भूमिगत नहीं होकर बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होना चाहिए.

दूसरी तरफ गोजमुमो की प्रवक्ता विनिता रोका का कहना है कि बिमल गुरूंग सही समय पर दार्जिलिंग आयेंगे. उन्होंने कहा कि पहाड़ के लोगों को किसी भी कीमत पर गोरखालैंड राज्य चाहिए. यहां के लोग जातीय पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बार आरपार की लड़ाई है.
विमल का दार्जिलिंग आना असान नहीं
विनय तमांग के साथ ही बिमल गुरूंग के विरोधी जान रहे हैं कि बिमल गुरूंग का दार्जिलिंग आना इतना आसान नहीं है. उनके ऊपर देशद्रोह के साथ-साथ विस्फोटक कानून के तहत भी एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं. यहां तक कि उनकी पत्नी तथा बच्चों के खिलाफ भी मुकदमे हैं. पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए लगातार अभियान चला रही है. विनय तमांग को पता है कि यदि बिमल गुरूंग दार्जिलिंग आये तो उनकी गिरफ्तारी तय है. उसके बाद पहाड़ पर गोजमुमो नेतृत्वहीन हो जायेगा. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विनय तमांग गोजमुमो पर कब्जा करने के लिए बिमल गुरूंग को गिरफ्तार कराना चाहते हैं. एक बार बिमल गुरूंग की गिरफ्तारी हो गई, तो उनके लिए जेल की सलाखों से निकल पाना आसान नहीं होगा. इसका सीधा लाभ विनय तमांग को होगा.
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