जिउतिया : संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

Published at :14 Sep 2017 10:48 AM (IST)
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जिउतिया : संतान की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत

सिलीगुड़ी/बिन्नागुड़ी. जिउतिया पर्व प्रतिवर्ष पितृ पक्ष के दौरान बिहारी बिरादरी की महिलाओं द्वारा मनाया जानेवाला पौराणिक पर्व है. बुधवार को बिहारी बिरादरी की महिलाओं ने अपने पूर्वजों को पिंडदान किया और संतानों के दीर्घायु के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रख रही है. धार्मिक रीतिनुसार आज व्रति महिलाएं अपने पूर्वजों और कुश से निर्मित […]

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सिलीगुड़ी/बिन्नागुड़ी. जिउतिया पर्व प्रतिवर्ष पितृ पक्ष के दौरान बिहारी बिरादरी की महिलाओं द्वारा मनाया जानेवाला पौराणिक पर्व है. बुधवार को बिहारी बिरादरी की महिलाओं ने अपने पूर्वजों को पिंडदान किया और संतानों के दीर्घायु के लिए 24 घंटे का निर्जला व्रत रख रही है.

धार्मिक रीतिनुसार आज व्रति महिलाएं अपने पूर्वजों और कुश से निर्मित भगवान जीमूत वाहन की मूर्ति को सरसों तेल व खल्ली चढ़ा कर प्रार्थना करती हैं. साथ ही मिट्टी और गाय के गोबर से बनी चील और सियार की मूर्ति की भी पूजा-अर्चना कर कथावाचन हुआ. वहीं, सूर्यास्त से पहले व्रति महिलाएं नदियों के किनारे अपने पूर्वजों को पूरे विधि-विधान के साथ पिंड दान भी किया.

पिंडदान कर व्रति महिलाओं ने अपने संतानों के दीघार्यु के साथ पूरे परिवार में वैभव-शांति और कल्याण करने की कामना की. वहीं, कई महिलाओं ने संतान प्राप्ति के लिए भी पूरे दिन निर्जला रहकर जिउतिया पर्व मनाया. आज शाम को सिलीगुड़ी शहर के ह्रदयस्थल से बहनेवाली महानंदा नदी के किनारे जिउतिया पर्व मनाने और अपने पूर्वजों को पिंडदान करने के लिए बिहारी बिरादरी की महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा. शहर के खुदीराम पल्ली निवासी व्रति महिला जयमाला देवी का कहना है कि यह पर्व तीन दिनों का होता है.


कल सप्तमी यानी मंगलवार को नहाये-खाय से यह पर्व शुरु हुआ. इसके तहत कल अपने दिवंगत सास-ससुर व अन्य पूर्वजों का चरण पखार खास व्यंजनों का भोग लगाया गया. पर्व के दूसरे दिन अष्टमी यानी आज सुबह अपने पूर्वजों व चिलो-सियारो की पूजा कर बगैर नमक व प्याज-लहसुन के बने सब्जी और चूड़ा-दही के साथ प्रसाद चढ़ाया गया. यह प्रसाद आहार के रुप में संतानों को ग्रहण कराया गया. इसके बाद निर्जला व्रत आरंभ हुआ. वहीं एक अन्य व्रति महिला अनिता ठाकुर ने कहा है कि पर्व के तीसरे दिन नवमी यानी गुरुवार की सुबह भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना कर बाजरा और चने से बने प्रसाद का भोग लगाया जायेगा. प्रसाद ग्रहण के बाद हम अपना व्रत तोड़ेंगे. इधर डुवार्स में भी इस त्योहार को मनाया गया. बिन्नागुड़ी से हमारे संवाददाता के अनुसार बिन्नागुड़ी,बानरहाट,उदलाबाड़ी, वीरपाड़ा, नागराकाटा,गैरकाटा,जयगांव आदि इलाके में नदी घाटों पर आज दोपहर महिलाओं को यह व्रत विधान पूर्वक करते देखा. बिन्नागुड़ी शिव मंदिर के आचार्य श्री अवध किशोर झा ने कहा कि कल सुबह सूर्योदय होते ही गाय के कच्चे दूध से इस व्रत का पारण होगा.इस प्रकार विधिवत व्रत करने से पुत्र के दीर्घायु ,जीवन में सुख शांति की कामना पूरी होती है तथा पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है. बिन्नागुड़ी की व्रती विजयलक्ष्मी झा एवं कल्याणी मिश्रा ने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से पुत्रों को दीर्घायु मिलती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
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