कामयाबी: बीएसएफ की चौकसी से तस्करी का रूट बदला रायपुर से 90 गायों के साथ 15 तस्कर गिरफ्तार

Published at :11 Sep 2017 8:48 AM (IST)
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कामयाबी: बीएसएफ की चौकसी से तस्करी का रूट बदला रायपुर से 90 गायों के साथ 15 तस्कर गिरफ्तार

मालदा. गायों की तस्करी पर लगाम कसने के लिए बीएसएफ ने भारत-बांग्लादेश सीमा के वैष्णवनगर व कालियाचक इलाके में चौकसी बढ़ा दी है. इसके बाद गाय तस्करों ने तस्करी का नया रूट तैयार कर लिया है. यह रूट है इंग्लिशजाबार व ओल्ड मालदा का असंरक्षित सीमावर्ती इलाका. लेकिन अब इस रूट पर भी तस्करों का […]

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मालदा. गायों की तस्करी पर लगाम कसने के लिए बीएसएफ ने भारत-बांग्लादेश सीमा के वैष्णवनगर व कालियाचक इलाके में चौकसी बढ़ा दी है. इसके बाद गाय तस्करों ने तस्करी का नया रूट तैयार कर लिया है. यह रूट है इंग्लिशजाबार व ओल्ड मालदा का असंरक्षित सीमावर्ती इलाका. लेकिन अब इस रूट पर भी तस्करों का धंधा चौपट होता नजर आ रहा है.

रविवार तड़के ओल्ड मालदा थाने के रायपुर इलाके से गाय तस्करी के दौरान 15 तस्कर पुलिस के हत्थे चढ़ गये. पुलिस ने इन तस्करों के चंगुल से 90 गायों को जब्त किया है. सभी तस्करों को रविवार को जिला अदालत में पेश किया गया. शनिवार रात को ओल्ड मालदा थाना पुलिस को रायपुर सीमा से बड़ी संख्या में गाय तस्करी होने की खबर मिली. सूचना के तहत ओल्ड मालदा थाना की पुलिस ने जाल फैलाया. रविवार तड़के रायपुर गांव से 90 गाय समेत 15 तस्कर पकड़े गये. ये सभी तस्कर भारतीय हैं. इनके पास से दो ट्रक भी जब्त किये गये. अदालत ने तस्करों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखने का निर्देश दिया.

बीएसएफ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गाय के अलावा जाली नोटों की तस्करी पर शिकंजा कसने के लिए वैष्णवनगर व कालियाचक थाना क्षेत्रों के सीमावर्ती इलाकों में बीएसएफ कड़ी निगरानी कर रही है. ऐसे में तस्करों की समस्या बढ़ गयी है. ऐसे में तस्करों ने इंग्लिशबाजार व ओल्ड मालदा के भारत-बांग्लादेश सीमावर्ती असंरक्षित इलाकों को अपना कॉरिडोर बना लिया है. ओल्ड मालदा के रायपुर स्थित महानंदा नदी को पार करते ही बांग्लादेश की सीमा शुरू हो जाती है.

कैसे होती है गायों की तस्करी
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन शाम को तस्कर सक्रिय हो जाते हैं. अंधेरा होते ही गायों को अस्थायी नौकाओं से पार कराया जाता है. इन गायों के शरीर पर नंबर दिया रहता है. उसपार पहुंचते ही बांग्लादेशी तस्कर नंबर देखकर अपनी-अपनी गायें ले जाते हैं. इस काम में स्थानीय ग्रामीण और सुरक्षा बलों के भी कुछ लोग मिलीभगत किये रहते हैं.
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