शिक्षक दिवस के माैके पर प्रभात खबर कार्यालय में एक खास परिचर्चा का आयोजन, शिक्षकों को छात्रों के लिए बनना होगा रोल मॉडल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Sep 2017 8:37 AM (IST)
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कोलकाता: देश के दूसरे राष्ट्रपति व महान शिक्षक डॉ सवर्पल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है. डॉ राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं से छात्रों को प्रेरित करने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते थे. छात्र उनको रोल मॉडल मानते थे. टेक्नोलॉजी के इस दौर में आज भी अगर शिक्षक अपने […]
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कोलकाता: देश के दूसरे राष्ट्रपति व महान शिक्षक डॉ सवर्पल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर पांच सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है. डॉ राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं से छात्रों को प्रेरित करने के साथ उनका मार्गदर्शन भी करते थे. छात्र उनको रोल मॉडल मानते थे. टेक्नोलॉजी के इस दौर में आज भी अगर शिक्षक अपने छात्र-छात्राओं के प्रति समर्पित हैं तो छात्र भी उनके प्रति बहुत सम्मान व श्रद्धा व्यक्त करते हैं. एक शिक्षक अगर बच्चे को पढ़ाई व अनुशासन सिखाने के साथ-साथ उसकी भावनाओं को भी समझने की कोशिश करता है तो बच्चे भी पूरे सम्मान के साथ अपने शिक्षक का अनुसरण करते हैं. ऐसी ही राय प्रभात खबर कार्यालय में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक विशेष सत्र में शिक्षकों ने दी.
बलवंत सिंह (वरिष्ठ हिंदी शिक्षक, ला मॉर्टिनीयर फॉर ब्वॉयज) : मेरी पढ़ाई एक सरकारी स्कूल में हुई है, उस दौर में स्कूलों का परिवेश अलग था, आज अलग है. फिर भी छात्र गुरु के प्रति आज भी पूरा सम्मान व्यक्त करते हैं. हमारे स्कूल में काफी सम्पन्न घरों के बच्चे पढ़ने आते हैं, फिर भी वे शिक्षकों के प्रति काफी आस्था व्यक्त करते हैं.
मोहम्मद शाहबुद्दीन (टीचर इनचार्ज, जूलियन डे स्कूल) : इंटरनेट के इस दौर में भले ही शिक्षा के मानदंड बदल गये हैं, लेकिन गुरु-शिष्य के रिश्ते में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं आया है. छात्र अपने शिक्षकों का सम्मान आज भी करते हैं. यह शिक्षक पर निर्भर है कि वे बच्चों के साथ कैसे पेश आते हैं. उनका व्यवहार कैसा है. दरअसल शिक्षकों को छात्रों का रोल मॉडल बनना होगा. छात्र बोलने से नहीं सामने देखने से अनुसरण करते हैं. अगर शिक्षक बच्चों के प्रति समर्पण भाव रखते हैं तो वे भी बहुत अनुशासित व संयमति रहते हैं. उनको स्नेह की जरूरत होती है.
कविता अरोड़ा (वरिष्ठ हिंदी शिक्षिका, हेरीटेज स्कूल) : शिक्षक एक कुम्हार की तरह होता है जो कच्ची मिट्टी को अलग-अलग आकार देकर उसे मूर्त रूप देता है. बच्चे भी कच्ची मिट्टी के समान हैं. शिक्षक अपने व्यवहार, अपने ज्ञान व गुणों से छात्रों को एक अच्छा इंसान बना सकते हैं. छात्रों के चरित्र-निर्माण व उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने में शिक्षकों की बहुत बड़ी भूमिका है.
अरविंद कुमार (वरिष्ठ हिंदी शिक्षक, सेंट ऑगस्टीन स्कूल) : चाहे सरकारी स्कूल हो या निजी स्कूल, अगर शिक्षक अपने पेशे के प्रति गंभीर है तो ऐसा हो नहीं सकता कि छात्र अपने शिक्षक की बात न सुने या उनका अनुसरण न करे. शिक्षक अपने ज्ञान व मधुर व्यवहार से छात्रों को आकर्षित कर सकते हैं. पहले तो स्कूलों में टीचर दंड भी देते थे. कान मरोड़ना या ऊठक-बैठक लगाना भी एक एक्सरसाइज के रूप में था. आज ऐसा परिवेश नहीं है. आज संयुक्त परिवार भी नहीं है, जिससे बच्चे उपेक्षा व अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं, क्योंकि उनको वो प्यार या अटेंशन नहीं मिल रहा है, जो मिलना चाहिए. इस स्थिति में शिक्षक का प्रेमपूर्वक व्यवहार, बच्चों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, क्योंकि प्यार की भाषा बहुत ताकतवर होती है.
अंजना वाही (वरिष्ठ हिंदी शिक्षिका, डीपीएस, न्यूटाउन) : अपने शिष्यों से अच्छा रिश्ता बनाये रखने के लिए गुरु को श्रेष्ठ बनना होगा. उसकी बात को समझना होगा. मैं एक कोएड स्कूल में पढ़ाती हूं. कई बार स्कूल में सीनियर बच्चों के साथ फ्रेंडली व्यवहार करना पड़ता है, उसकी भी एक गरिमा है. एक शिक्षक में इतनी क्षमता होनी चाहिए कि वह छात्रों पर अपना विश्वास व सम्मान बनाये रखे. टेक्नोलॉजी के दाैर में यह भी बहुत जरूरी है कि इंटरनेट या स्मार्ट फोन देने के साथ बच्चों की गतिविधियों पर भी नजर रखी जाये. शिक्षक को बच्चों के लिए मिसाल कायम करनी होगी.
शीला कुमार (सीनियर टीचर, वैलेंड गोल्ड स्मिथ, स्कूल) : स्कूली शिक्षा पर भी टेक्नोलॉजी का असर पड़ा है. न केवल बच्चे, बल्कि बड़े भी फेसबुक, ह्वाट्सएप पर लेग रहते हैं, इससे कहीं रिश्तों में दूरी बढ़ रही है. किसी के पास दूसरों के लिए समय नहीं है, लेकिन बच्चों को तो पूरा प्यार व अटेंशन देना ही पड़ेगा. तभी वे अनुशासित व संयमित रह सकते हैं. स्कूल में एक शिक्षक व शिक्षिका का भी दायित्व है कि वे पढ़ाने के साथ-साथ बच्चों के मन की भवानाओं को भी समझें.
अनुपमा इमाम (शिक्षिका, वैलेंड गोल्ड स्मिथ स्कूल, बहुबाजार) : एक शिक्षक का काम केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं है. शिक्षक का व्यक्तित्व ऐसा होना चाहिए कि वे बच्चों की समस्या या उनके तनाव को भी दूर कर सके. सबसे जरूरी है, क्लास में बच्चों को मोटिवेट करना. अगर किसी बच्चे की कोई कमजोरी भी है तो उसे कभी भी हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. एक अच्छा शिक्षक वही है जो बिना किसी तुलना के कमजोर बच्चे के अंदर भी पढ़ाई के प्रति रुचि व नयी ऊर्जा का संचार कर दे. अगर किसी बच्चे की कोई जिज्ञासा है तो उसको शांत करना भी एक शिक्षक का काम है.
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