उम्मीद: सूरत बदलने आज पहाड़वासी उतरेंगे सड़क पर, संलग्न इलाके में खुलीं दुकानें, उत्सव के रंग में रंगने को पहाड़ बेताब

Published at :05 Sep 2017 8:34 AM (IST)
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उम्मीद: सूरत बदलने आज पहाड़वासी उतरेंगे सड़क पर, संलग्न इलाके में खुलीं दुकानें, उत्सव के रंग में रंगने को पहाड़ बेताब

सिलीगुड़ी: दुर्गोत्सव के माहौल में रंगने के लिए पहाड़ बेताब हो गया है. अपनी सूरत-ए- बदहाल बदलने की कोशिश में पहाड़वासी सड़को पर उतरने को तैयार हैं. पिछले तीन महीने से पहाड़ पर जारी अलग राज्य गोरखालैंड आंदोलन अब समाप्त होने की ओर बढ़ रहा है. आंदोलन पर गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग की पकड़ ढ़ीली […]

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सिलीगुड़ी: दुर्गोत्सव के माहौल में रंगने के लिए पहाड़ बेताब हो गया है. अपनी सूरत-ए- बदहाल बदलने की कोशिश में पहाड़वासी सड़को पर उतरने को तैयार हैं. पिछले तीन महीने से पहाड़ पर जारी अलग राज्य गोरखालैंड आंदोलन अब समाप्त होने की ओर बढ़ रहा है. आंदोलन पर गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग की पकड़ ढ़ीली पड़ने लगी है.

आंदोलन की वजह से पिछले तीन महीने से लगातार जारी बंद के बादल छटने लगे हैं. सोमवार को सिलीगुड़ी के निकट मिलन मोड़, पानीघाटा आदि इलाकों में बंद का असर नहीं दिखा. समतल सहित पहाड़ पर बाजार व दुकान-पाट खुलने लगे हैं. इस बार के आंदोलन के दैरान पहली बार हिल तृणमूल पहाड़ पर शांति रैली करने जा रही है.

मिली जानकारी के अनुसार हिल तृणमूल की ओर से मंगलवार को कर्सियांग इलाके में शांति रैली का आयोजन किया गया है. अलग राज्य आंदोलन के बीते इन तीन महीनों में पहली बार तृणमूल बंद के खिलाफ रैली का आयोजन कर रही है. यह रैली आंदोलन के आखिरी दिनों को साफ दर्शा रहा है. इसी के साथ बंद का असर कम होने लगा है. आंदोलन के शुरूआती दौर में पहाड़ से सटे समतल इलाकों में गोजमुमो समर्थकों ने आग बरसाया. पानीघाटा इलाके में रास्ते पर आग जलाकर मंत्री गौतम देब को वापस लौटा दिया था. उसी पानीघाटा, मिलन मोड़ आदि इलाके के लोग अब बंद के खिलाफ सड़कों पर उतरने लगे हैं. गोजमुमो नेताओं की गिरफ्तारी के खिलाफ बीते रविवार को मिलनमोड़ इलाके में सन्नाटा छाया हुआ था. सोमवार को मिलनमोड़ बाजार की रौनक बदली हुयी दिखी. पानीघाटा में भी दुकान-पाट खुलने लगे है. कर्सियांग में भी दुकान-पाट, बाजार खुलने के साथ बंद के खिलाफ लोगों का रूख देखकर तृणमूल ने रैली निकालने का निर्णय लिया है. आंदोलन शुरू होते ही बंद की हवा पहाड़ से नीचे की तरफ उतरी थी लेकिन अब समतल इलाकों में बंद उठने लगा है. पहाड़ के कर्सियांग में लोग बंद के खिलाफ सड़क पर उतरने को बेकाबू हैं.
इस संबंध में राज्य के पर्यटन मंत्री गौतम देब ने बताया कि बंगाल का सबसे बड़े उत्सव दुर्गोत्सव के चंद दिन बचे हैं. राज्य उत्सव के माहौल में रंगने लगा है. चारों तरफ दुर्गोत्सव की तैयारियां शुरू हो गयी है. जबकि आंदोलन की वजह से पहाड़ व समतल के कई इलाकों की सूरत बदल गयी है. पिछले तीन महीने से गोजमुमो की बाते सुनकर नागरिक थक चुके हैं. राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहाड़ के विकास को एक नया मोड़ दिया है. आंदोलन से नहीं बल्कि विकास कार्यों से पहाड़ की स्थिति बदलेगी, यह बात पहाड़वासियों के समझ में आ गयी है. यह आंदोलन अब समाप्ति की ओर है. 12 सितंबर को उत्तरकन्या में मुख्यमंत्री के साथ होने वाली बैठक के बाद स्थिति पूरी तरह से बदल जायेगी. इधर,पहाड़ पर धीरे-धीरे स्थिति समान्य होने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को मिरिक में तृणमूल कांग्रेस ने रैली निकाली.
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