चिंता: गोरखालैंड आंदोलन के बाद अब बाढ़ ने व्यवसायियों की तोड़ी कमर, सब्जी व मछली का संकट

Published at :17 Aug 2017 8:22 AM (IST)
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चिंता: गोरखालैंड आंदोलन के बाद अब बाढ़ ने व्यवसायियों की तोड़ी कमर, सब्जी व मछली का संकट

सिलीगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन के बाद अब बाढ़ ने कच्चे माल व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है. दुर्गा पूजा के समय सब्जियों की भारी किल्लत होने की संभावना व्यवसायी जता रहे हैं. सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट पिछले सात दिनों से वीरान पड़ा है. इस मार्केट की रौनक ढलते ही खुदरा व्यापारियों ने भाव बढ़ा दिया है. पिछले […]

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सिलीगुड़ी. गोरखालैंड आंदोलन के बाद अब बाढ़ ने कच्चे माल व्यवसायियों की कमर तोड़ दी है. दुर्गा पूजा के समय सब्जियों की भारी किल्लत होने की संभावना व्यवसायी जता रहे हैं. सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट पिछले सात दिनों से वीरान पड़ा है. इस मार्केट की रौनक ढलते ही खुदरा व्यापारियों ने भाव बढ़ा दिया है.
पिछले सात दिन से उत्तर बंगाल में भारी बारिश ने कोहराम मचा रखा है. दक्षिण बंगाल सहित देश के कई भागों से उत्तर बंगाल का संपर्क टूट गया है. जिसकी वजह से सिलीगुड़ी सहित आस-पास के इलाकों में फल, सब्जियां और मछली की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है. उत्तर बंगाल का सबसे बड़ा कच्चे माल का थोक बाजार सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट वीरान पड़ा है.

रेल व सड़क मार्ग कट जाने से कच्चा माल सिलीगुड़ी नहीं पहुंच पा रहा है. पड़ोसी राज्य बिहार की सीमा किशनगंज, दालखोला इलाके में बाढ़ की भयावह स्थिति है. इधर मालदा में भी कई नदियां उफान पर है. जिसकी वजह से कच्चे माल रास्ते में ही सड़ रहे हैं. पिछले 50 वर्षों में सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट का ऐसा दृश्य पहले नहीं दिखा. मिली जानकारी के अनुसार उत्तर बंगाल के विभिन्न भागों से यहां सब्जी व मछली लायी जाती है. अभी यह काम बंद है. बाढ़ ने खेत में लगी फसलों को नष्ट कर दिया है. तालाबों में पल रही मछलिया बाढ़ के पानी में तितर-बीतर हो गयी है. बाढ़ की वजह से उत्तर बंगाल के किसानों पर ऐसा कहर बरपाया है जिससे उबरने में उन्हें वर्षों लग जायेंगे. बाढ़ ने किसानों के साथ सिलीगुड़ी रेगुलेटड मार्केट के व्यवसायियों की भी कमर तोड़ दी है. मौके की नजाकत को देखते हुए कच्चे माल के खुदरा व्यवसायियों ने नागरिकों के जेब पर हमला बोल दिया है.


इस मार्केट के व्यवसासियों से मिली जानकारी के अनुसार हरी सब्जियां बाजार में नहीं है. कहीं से भी हरी सब्जियां नहीं आ रही है. हरी सब्जियां उत्पादित करने वाले उत्तर बंगाल के इलाके जलमग्न है. सब्जियां नष्ट हो चुकी है. बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, नासिक व दक्षिण बंगाल से आने वाली हरी सब्जियां रास्ते में सड़ रही है. दक्षिण बंगाल व बिहार से आने वाली मछलियां भी ट्रक में लदी रास्ते में पड़ी हैं. बाहर का एक भी ट्रक सिलीगुड़ी रेगुलेटेड मार्केट नहीं पहुंच रहा है. स्टॉक में सिर्फ आलू, प्याज और लहसन है. जिससे अगले तीन से चार दिनों तक बाजार में मांग की आपूर्ति की जा सकती है. बारिश की वजह से आलू सड़ भी रहा है.
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