खुल रहीं परतें: पेंगोलिन तस्करी मामले में आया नया मोड़, कोलकाता के एनजीओ का नाम आया सामने

Published at :08 Aug 2017 8:33 AM (IST)
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खुल रहीं परतें: पेंगोलिन तस्करी मामले में आया नया मोड़, कोलकाता के एनजीओ का नाम आया सामने

सिलीगुड़ी. पेंगोलिन तस्करी मामले में एक नया खुलासा सामने आया है. तस्करी के तार कोलकाता के एक स्वयंसेवी संगठन के साथ जुड़ते दिख रहे हैं. गिरफ्तार आरोपी सजल सरकार ने इस संस्था के नाम का खुलासा किया है. सजल सरकार को सोमवार को जलपाईगुड़ी अदालत में पेश किया गया. वैकुंठपुर वन संभाग ने पूछताछ के […]

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सिलीगुड़ी. पेंगोलिन तस्करी मामले में एक नया खुलासा सामने आया है. तस्करी के तार कोलकाता के एक स्वयंसेवी संगठन के साथ जुड़ते दिख रहे हैं. गिरफ्तार आरोपी सजल सरकार ने इस संस्था के नाम का खुलासा किया है. सजल सरकार को सोमवार को जलपाईगुड़ी अदालत में पेश किया गया. वैकुंठपुर वन संभाग ने पूछताछ के बाद वाईल्ड लाइफ कोलकाता से मामले की तफ्तीश शुरू करने का अनुरोध किया है.
उल्लेखनीय है कि रविवार देर शाम वैकुंठपुर फॉरेस्ट डिवीजन के बेलाकोवा रेंज ने सिलीगुड़ी के निकट फांसीदेवा बाजार से दो पेंगोलिन व करीब दो किलो पेंगोलिन शल्क के साथ सजल राय नामक एक तस्कर को गिरफ्तार किया. आरोपी सजल राय वन्यप्राणी व वन्यप्राणियों के बेशकीमती देहावशेष व वन संपत्तियों के अंतराष्ट्रीय तस्कर गिरोह का सदस्य बताया गया है.

पूछताछ में उसने बेलाकोवा रेंज को बताया है कि वह अंतरराष्ट्रीय मोटर पार्ट्स की कंपनी का कर्मचारी है. इस गिरोह का वह एक छोटा सा मोहरा है. आरोपी के बयान के मुताबिक कोलकाता के दमदम हवाई अड्डा के निकट बागुईहाटी स्थित एक एनजीओ भी इस अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह में शामिल है. संस्था प्रभारी चंदन घोष तस्कर गिरोह का सक्रिय सदस्य है.उसी के निर्देश पर वह माल वाहक का काम करता था. वन विभाग को दिये बयान में उसने बताया कि मांग के अनुसार जंगलों से वन्यप्राणी, देहावशेष व अन्य कीमती वन संपत्तियां इक्ट्ठा किया जाता है. यह गिरोह काफी संतर्कता के साथ काम करता है. जंगल से माल जुटाने वाला सदस्य अधिक दिनों तक सामान को अपने पास नहीं रखता है. डील तय होने के बाद माल को ग्राहक तक पहुंचाने के लिये रवाना किया जाता है. वाहक को सामान के साथ गंतव्य की जानकारी देने के बाद मोबाइल का संपर्क बंद कर दिया जाता है. निर्धारित समय पर ग्राहक को माल पहुंचाने की जिम्मेदारी वाहक की होती है.

इस मामले में एनजीओ की संलिप्तता का खुलासा होने के बाद से वन विभाग ने उसकी तलाश शुरू कर दी है. लेकिन संस्था के प्रभारी व गिरोह के सक्रिय सदस्य चंदन घोष का मोबाईल नंबर बंद है. खुलासा होने के बाद वह अंडरग्राउंड हो गया है. वन विभाग उसका ठिकाना तलाश रहा है. इसके लिये कोलकाता वाइल्ड लाइफ की भी मदद मांगी गयी है. यहां बता दें कि उत्तर बंगाल के जंगलों में काफी कीमती वन्यप्राणी व अन्य संपत्तियां हैं. जिसकी मांग वर्मा, चीन, इंडोनेशिया आदि देशों में काफी अधिक है. उत्तर बंगाल से कई देशों की सीमाएं सटी हुई हैं. तस्करी के लिए सिलीगुड़ी को एक ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल किया जाता है. इस मामले की जांच वन विभाग प्राथमिकता के साथ कर रही है.
क्या कहते हैं एमआर बालोच
इस संबंध में उत्तर बंगाल के वनपाल (वन्यप्राणी) एमआर बालोच ने बताया कि वन्यप्राणियों, उनके देहावशेषों व अन्य कीमती वन संपत्तियो को सीमापार पहुंचाने के लिए तस्कर सिलीगुड़ी को ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल करते हैं. बीते रविवार को जब्त पेंगोलिन व उसके शल्क को सिलीगुड़ी में ही किसी ग्राहक को बेचने की योजना थी. फिर इसे चीन भेजा जाना था. लेकिन उससे पहले ही वन विभाग ने आरोपी को दबोच लिया. उसे आज जलपाईगुड़ी अदालत में पेश कर दिया गया है. इस मामले में कोलकाता के दमदम हवाई अड्डा के निकट बागुईहाटी स्थित एक एनजीओ का नाम सामने आया है. मामले की जांच में कोलकाता वाइल्ड लाइफ से भी मदद मांगी गयी है.
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