कोलकाता की सड़कों से लुप्त हो रहे हाथ रिक्शे

Published at :02 Aug 2017 8:42 AM (IST)
विज्ञापन
कोलकाता की सड़कों से लुप्त हो रहे हाथ रिक्शे

कोलकाता: देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में कोलकाता पूरे विश्व में एक अनोखा शहर है. कोलकाता का जिक्र होते ही पर्यटकों की जुबान पर हावड़ा ब्रिज, दुर्गा पूजा, फुटबॉल, हाथ से चलने वाले रिक्शे व सड़कों पर चलती ट्राम की चर्चा होने लगती है. इनमें ऐतिहासिक हाथ रिक्शों का एक अलग ही आकर्षण है. […]

विज्ञापन
कोलकाता: देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में कोलकाता पूरे विश्व में एक अनोखा शहर है. कोलकाता का जिक्र होते ही पर्यटकों की जुबान पर हावड़ा ब्रिज, दुर्गा पूजा, फुटबॉल, हाथ से चलने वाले रिक्शे व सड़कों पर चलती ट्राम की चर्चा होने लगती है. इनमें ऐतिहासिक हाथ रिक्शों का एक अलग ही आकर्षण है. फिल्म दो बीघा जमीन में नायक बलराज साहनी गांव से कोलकाता आते हैं तो ऐसे ही हाथ रिक्शा को खींचने का काम करते हैं. बताया जाता है कि बलराज सहनी ने शूटिंग से पहले हाथ रिक्शा खींचने का पूरा अभ्यास किया था. ऋतुपर्णो घोष की फिल्म रेनकोट के अलावा भी कुछ अन्य फिल्मों में कोलकाता के इस ऐतिहासिक हाथ रिक्शों का दृश्य दिखाई देता है. महानगर की कई सड़कों से ये हाथरिक्शा प्राय: लुप्त हो गये हैं.
न्यू मार्केट व जान बाजार के बीच हाथ रिक्शा चलानेवाले माइकल (उम्र 60) का कहना है कि वह लगभग 30 साल से रिक्शा चला रहा है. ये रिक्शा ब्रिटिश जमाने से चले आ रहे हैं. जब उसके माता-पिता जिंदा थे. उसका कोई परिवार नहीं है न ही उसका कोई घर है. एक किराये के छोटे से कमरे में वह अपना गुजारा करता है. कई बार वह अपने रिक्शा पर ही सो जाता है. रिक्शा मालिक को उसे 300 रुपये एक सप्ताह के देने पड़ते हैं. उसका कहना है कि पूरे शहर में चलनेवाले ऑटो व टैक्सी की यूनियनें बनी हुई हैं, लेकिन हाथ रिक्शा चालकों की कोई यूनियन नहीं है. उनके हक के लिए कोई नहीं लड़ता है. बरसात के मौसम में जब सब जगह पानी भर जाता है, तब हाथ रिक्शा चालकों को ही लोग ज्यादा खोजते हैं. जलजमाव के कारण सड़क के गड्ढे भी दिखाई नहीं देते हैं, उस समय अपने हाथ से रिक्शा खींचनेवालों का जोखिम बढ़ जाता है.
फ्री स्कूल स्ट्रीट में हाथ रिक्शा चलानेवाले सुदामा गुप्ता का कहना है कि वह बिहार का रहने वाला है. 15-20 साल से कोलकाता में हाथ रिक्शा चला रहा है. अब पहले जैसी बात नहीं रही है. अब गली-गली व हर चौराहे पर ऑटो चलने से हाथ रिक्शा बंद हो गये हैं. कई हाथ रिक्शा चालक तो वापस अपने गांव चले गये हैं.
लोटस व वेलिंगटन के आसपास हाथ रिक्शा चलानेवाले मुख्तार अंसारी का कहना है कि पहले मौलाली, जान बाजार, न्यू मार्केट, बड़ाबाजार, खिदिरपुर में हाथ रिक्शा चालकों की भरमार होती थी. अब वे काफी कम हो गये हैं, हाथ से सवारी को ढोना व उसको मंजिल तक पहुंचाना एक जोखिम वाला काम है. कमाई कम होने पर कई लोगों ने यह काम छोड़ दिया. कुछ-कुछ स्थानों पर अभी भी हाथ रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन बहुत कम.
वहीं 25 साल से हाथ रिक्शा चला रहे रहमान का कहना है कि उसके पिताजी भी हाथ रिक्शा चलाते थे. वे अक्सर अंग्रेजों के किस्से सुनाते थे. उन्हीं से हाथ रिक्शा सीखा, जो आज तक चला रहे हैं. स्थानीय लोगों से ज्यादा बाहर से आने वाले पर्यटकों से अच्छा पैसा मिलता है. वे बहुत कौतूहल से रिक्शा को देखते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola