खून की भारी कमी, पर ब्लड बैंक ने 500 यूनिट से अधिक रक्त फेंका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :30 Jul 2017 9:12 AM (IST)
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कोलकाता : राज्य के सबसे बड़े ब्लड बैंक में इन दिनों रक्त की भारी किल्लत देखी जा रही है. एक ओर जहां ब्लड बैंक में खून की कमी है वहीं दूसरी ओर प्रबंधन की उदासीनता के कारण 500 यूनिट से अधिक एक्सपायर्ड हो चुके ब्लड को फेंक दिया गया है. यह घटना मानिकतल्ला स्थित सेंट्रल […]
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कोलकाता : राज्य के सबसे बड़े ब्लड बैंक में इन दिनों रक्त की भारी किल्लत देखी जा रही है. एक ओर जहां ब्लड बैंक में खून की कमी है वहीं दूसरी ओर प्रबंधन की उदासीनता के कारण 500 यूनिट से अधिक एक्सपायर्ड हो चुके ब्लड को फेंक दिया गया है. यह घटना मानिकतल्ला स्थित सेंट्रल ब्लड बैंक की है. इस ब्लड बैंक का पूरा नाम इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड ट्रांस्फ्यूशन मेडिसिन एंड इम्यूनो हेमाटोलॉजी है. पिछले 12 से 13 दिनों के भीतर 500 यूनिट से अधिक यूनिट ब्लड एक्सपायर्ड हो जाने के कारण फेंक दिया गया है.
गत बुधवार को भी रक्त नष्ट किया गया है. राज्य के इस सबसे बड़े ब्लड बैंक में करीब एक हजार यूनिट रक्त संग्रह कर रखने की क्षमता है. वहीं प्रतिदिन यहां से 200 से 250 यूनिट रक्त की सप्लाई की जाती है. ब्लड बैंक के निदेशक की मानें तो खून का एक्सपायर्ड होना आम बात है. वह रक्त के एक्सपायर्ड होने की बात से इनकार कर रहे हैं.
क्या है ममला : गरमी के दौरान रक्त की भारी किल्लत देखी जाती है. इस अभाव को कम करने के लिए हाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर कई जगह नियमित रूप से रक्तदान शिविर लगाये गये थे. ताकि जून व जुलाई महीने में रक्त की किल्लत न हो.
इधर मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद उक्त ब्लड बैंक में रक्त का स्टॉक बढ़ गया था. लेकिन सटीक वितरण प्रणाली के अभाव में होल ब्लड एक्सपायर्ड हो गया, जिस कारण उसे फेंक दिया गया. सूत्रों की मानें तो कुछ लैब टेक्नीशियनों की लापरवाही के कारण रक्त एक्सपायर्ड हो रहा है. रक्त की जांच के बाद सही समय पर वितरण न किये जाने से यह समस्या उत्पन्न हुई है. स्टॉक होने के बावजूद अगर किसी मरीज के परिजनों को पांच यूनिट रक्त की जरूरत है, तो उसे मात्र एक यूनिट ब्लड दे कर ही लौटा दिया जाता है. इससे रक्त की खपत नहीं हो पाती है, जो बाद में नष्ट हो जाता है. शनिवार सुबह से ही यहां रक्त की भारी किल्लत देखी गयी.
इतने समय बाद नष्ट हो जाता है ब्लड : जानकारी के अनुसार रक्त के विभिन्न घटक एक साथ एक ही समय नष्ट नहीं होते है. लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) और होल ब्लड सेल 35 दिनों के भीतर नष्ट हो जाता है. जबकि प्लाज्मा एक वर्ष तथा प्लेटलेट रक्त संग्रह करने के चार दिनों के भीतर नष्ट हो जाता है. इसलिए रक्तदान के बाद इसे जांच लिया जाता है. रक्त में किसी बीमारी के नहीं पाये जाने पर तुरंत रक्त के विभिन्न घटकों को अलग कर लिया जाता है.
एक्सपायर्ड ब्लड को ऐसे किया जाता है नष्ट : जानकारी के अनुसार एक्सपायर्ड हो चुके ब्लड को खुले में फेंकने से संक्रमण फैलने का डर रहता है. ऐसे में इसे ऑटोक्लेव मशीन में डाल कर नष्ट किया जाता है.
सेंट्रल ब्लड बैंक में रक्त की कीमत : नर्सिंग होम में भरती मरीज को होल ब्लड तथा आरबीसी प्रति यूनिट 1050 रुपये में दिया जाता है. वहीं प्लाज्मा तथा प्लेटलेट प्रति यूनिट 300 रुपये में दिया जाता है, जबकि सरकार अस्पतालों में भरती मरीज को नि:शुल्क रक्त दिया जाता है.
ब्लड बैंक में रक्त की कमी नहीं है. शनिवार को पांच जगहों पर आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप से हमें रक्त मिला है. वहीं रविवार को 12 जगहों पर आयोजित रक्तदान शिविर से हमें न्योता मिला है. रक्त का एक्सपायर्ड होना आम है. लेकिन 500 यूनिट रक्त एक्सपायर्ड होने वाली बात गलत है. वहीं ब्लड बैंक में रक्त की विशेष किल्लत भी नहीं है.
डॉ कुमारेश हलदार , निदेशक सेंट्रल ब्लड बैंक , कोलकाता.
ब्लड बैंक में कई दिनों से रक्त को नष्ट किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर, मरीजों को रक्त नहीं मिल रहा है. रक्तदान शिविरों के आयोजन पर प्रबंधन ध्यान नहीं दे रहा है. अगर यही हाल रहा तो भविष्य में भाजपा के आला नेताओं से सलाह लेकर वृह्तर आंदलोन किया जायेगा.
देवाशीष शील, संयोजक, सरकारी कर्मचारी परिषद
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