सिलीगुड़ी अस्पताल से विदा हुए रिया व रिकी

Updated at :20 Jul 2017 10:03 AM
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सिलीगुड़ी अस्पताल से विदा हुए रिया व रिकी

सिलीगुड़ी. दिल तो बस लग जाता है. अगर एक बार दिल लग जाये तो अलग होना मुश्किल है.लेकिन कानून दिल व भावनाओं की भाषा नहीं समझता. कुछ ऐसा ही मामला सिलीगुड़ी में देखने को मिला. पिछले करीब एक वर्ष से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में तीन अनाथ बच्चे पल रहे थे. इन बच्चों से सभी का […]

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सिलीगुड़ी. दिल तो बस लग जाता है. अगर एक बार दिल लग जाये तो अलग होना मुश्किल है.लेकिन कानून दिल व भावनाओं की भाषा नहीं समझता. कुछ ऐसा ही मामला सिलीगुड़ी में देखने को मिला. पिछले करीब एक वर्ष से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में तीन अनाथ बच्चे पल रहे थे. इन बच्चों से सभी का दिल लग गया था.

बुधवार को कानून के मुताबिक जिला चाईल्ड वेलफेयर कमिटी के अधीन स्पेशल चाइल्ड एडॉप्शन एजेंसी को बच्चों को सौंप दिया गया. बच्चों को जब विदा किया जा रहा था तो उसका लालन-पालन कर रही नर्सों की आखें नम हो गयी.अस्पताल के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी अपनी आंसू नहीं रोक पाये. लेकिन कानून तो कानून है. सभी को इसके दायरे में रहकर ही कार्य करना है.

उल्लेखनीय है कि कई बार नवजात शिशुओं को सड़क के किनारे, कूड़े-कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है. बच्चियां इसकी अधिक शिकार होती हैं. समय-समय पर पुलिस इन मासूमों को बरामद कर उनकी चिकित्सा के लिये सरकारी अस्पतालों में भरती कराती है. ऐसे ही तीन बच्चे पिछले करीब एक साल से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में पल रहे थे. बुधवार को अस्पताल से उनका दाना-पानी और नर्सों का प्यार उठ गया. स्पेशल चाइल्ड एडॉप्शन एजेंसी के मार्फत ये तीनों बच्चे कूचबिहार, उत्तर व दक्षिण दिनाजपुर जिले में अलग-अलग जिंदगी गुजारेंगे. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, करीब एक वर्ष पहले इन तीन बच्चों को सिलीगुड़ी के विभिन्न इलाकों से बरामद कर पुलिस ने सिलीगुड़ी अस्पताल पहुंचाया था. तब से लेकर आज तक उनकी देखरेख अस्पताल प्रबंधन की निगरानी में की गयी. तीन बच्चों में दो लड़का और एक लड़की है. तीनों की उम्र करीब डेढ़ वर्ष है. अस्पताल प्रबंधन ने इन बच्चों में से दो का नाम रिया और रिकी रखा है. पिछले एक वर्षों से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल ही इन बच्चों का घर है. अस्पताल अधीक्षक से लेकर डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचारी ही इनके परिवार थे. कानून ने आज से इनका आंगन और परिवार दोनों बदल दिया. नियमानुसार एक वर्ष से अधिक उम्र का अनाथ बच्चा अस्पताल में नहीं रखा जा सकता. फलस्वरूप बुधवार को इन तीनों बच्चों को अस्पताल प्रबंधन ने जिला चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के मार्फत स्पेशल चाइल्ड एडॉप्शन एजेंसी को सौंप दिया. बच्चों को एजेंसी के हवाले करते समय अस्पताल के नर्सों की आंखे थोड़ी नम हो गयीं. उन लोगों ने बताया कि पिछले एक वर्ष से इन बच्चों का लालन-पालन हम लोग ही कर रहे हैं. इन्हें खाना खिलाना, इनके साथ खेलना हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गया था. लेकिन हम लोगों को कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा.
क्या कहते हैं अस्पताल अधीक्षक
इस संबंध में सिलीगुड़ी जिला अस्पताल अधीक्षक अमिताभ मंडल ने बताया कि इन बच्चों को पुलिस ने करीब एक वर्ष पहले शहर के विभिन्न स्थानों से बरामद कर अस्पताल पहुंचाया था. तब से इनकी देखरेख अस्पताल में हो रही है. इन बच्चों के साथ सभी का एक लगाव सा हो गया था. लेकिन नियम के अनुसार इन बच्चों को चाइल्ड एडॉप्शन एजेंसी को सौंप दिया गया.
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