बिना आरएमओ के चल रही डायलिसिस यूनिट

Updated at :18 Jul 2017 10:20 AM
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बिना आरएमओ के चल रही डायलिसिस यूनिट

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का स्तर लगातार गिड़ता जा रहा है. नीले और सफेद रंग का बाहर से चमकदार दिखनेवाला अस्पताल भवन भीतर से खोखला हो गया है. पहले तो मेडिसिन के चार डॉक्टर एक साथ छुट्टी पर चले गये थे. अब पीपीपी मॉडल में सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में चल रही डायलिसिस […]

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सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था का स्तर लगातार गिड़ता जा रहा है. नीले और सफेद रंग का बाहर से चमकदार दिखनेवाला अस्पताल भवन भीतर से खोखला हो गया है. पहले तो मेडिसिन के चार डॉक्टर एक साथ छुट्टी पर चले गये थे. अब पीपीपी मॉडल में सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में चल रही डायलिसिस यूनिट की परिसेवा सवालों के घेरे में है. पिछले दो साल से सिलीगुड़ी जिला अस्पताल का डायलिसिस यूनिट बिना आरएमओ के चल रही है. तीन में से दो टेक्निशियन किसी भी सरकारी संस्थान से प्रशिक्षित नहीं हैं. अस्पताल की रोगी कल्याण समिती ने एक आपातकालीन बैठक में एक रिपोर्ट बनाकर स्वास्थ भवन को भेजा है.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में डायलेसिस यूनिट की शुरुआत वर्ष 2015 में हुयी. पीपीपी मॉडल के तहत राज्य स्वास्थ विभाग के एग्रीमेंट कर बैरकपुर की एक निजी संस्था बैरकपुर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमआरसी) ने सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में डायलेसिस यूनिट चालू किया. यूनिट चालू होने के समय से ही यूनिट के मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) नहीं है. पिछले दो वर्षों से डायलेसिस यूनिटा बिना आरएमओ के ही चल रहा है. इसके अतिरिक्त इस यूनिट में तीन टेक्निशियन हैं, जिनमें से दो किसी भी सरकारी संस्थान से प्रशिक्षित नहीं है. एक रोगी का डायलेसिस करने में करीब साढ़े चार घंटे का समय लगता है.

आरोप है कि सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के डायलिसिस यूनिट में तीन घंटे में ही डायलिसिस की प्रक्रिया समाप्त कर रोगी को बाहर निकाल जाता है. यूनिट की सफाई भी ठीक तरह से नहीं की जाती है. मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी अस्पतालों में सभी प्रकार की परिसेवा मुफ्त करने का निर्देश दिया था. लेकिन सिलीगुड़ी जिला अस्पताल में डायलेसिस करानेवाले रोगियों को दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती हैं. जबकि एग्रीमेंट के मुताबिक डायलेसिस के लिए दवाई यूनिट से ही मुहैया कराया जायेगा. यूनिट प्रति रोगी के हिसाब से बिल बनाकर अस्पताल प्रबंधन को जमा कराती है. जिसके एवज में उसे रुपया प्रदान किया जाता है. डायलिसिस यूनिट के कई महीनों का लाखों का बिजली बिल भी बकाया है. पिछले दो वर्षों से जर्जर व्यवस्था में चल रही इस डायलेसिस यूनिट के खिलाफ सिलीगुड़ी जिला अस्पताल ने कोई कदम नहीं उठाया. जबकि हरेकबार सिलीगुड़ी जिला अस्पताल ने बेहतर परिसेवा प्रदान करने का दावा करती रही है. कुछ महीने पहले डायलेसिस कराने के दौरान एक रोगी की मौत हो गयी थी. अस्पताल अधीक्षक से इस मामले की शिकायत भी की गयी थी लेकिन किसी भी प्रकार की कारवायी नहीं हुई.

हाल में ही सिलीगुड़ी जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग के चार डॉक्टर एक साथ छुट्टी पर चले गये थे, जिसकी वजह से अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गयी थी. जिला स्वास्थ विभाग ने चारों डॉक्टरों को अविलंब वापस ज्वाइन करने का निर्देस जारी किया था. छुट्टी पर गये चारों डॉक्टरों में से दो वापस कार्य पर लौटे हैं. जबकि जिला स्वास्थ विभाग के निर्देश की अवहेलना कर दो डॉक्टर अब भी छुट्टी पर हैं. उनमे से एक अभी भी अपने निजी चेंबर में परिसेवा प्रदान कर रहे हैं लेकिन अस्पताल में आधिकारिक तौर पर छुट्टी पर ही हैं. इसके अतिरिक्त एक्स-रे यूनिट की परिसेवा भी सवालों के घेरे में है. आरोप है कि इस यूनिट में महिला अटेडेंट नहीं है. महिलाओं का एक्स-रे भी पुरुष अटेंडेंट ही करते हैं. डायलिसिस यूनिट चालू होने के दो वर्ष बाद सिलीगुड़ी जिला अस्पताल प्रबंधन की नजर यूनिट की चरमाराती परिसेवा पर पड़ी. सोमवार को अस्पताल रोगी कल्याण समिती के चेयरमैन रूद्रनाथ भट्टाचार्य ने आपातकालीन बैठक कर पूरी जानकारी ली.

श्री भट्टाचार्य ने बताया कि पिछले दो वर्षों से डायलिसिस यूनिट चलाने वाली संस्था को आरएमओ नियुक्त करने का बार-बार निर्देश दिया गया है. लेकिन वे अनसुना करते रहे हैं. आज की बैठक में बीएमआरसी के प्रशासनिक अधिकारी राजीव बनर्जी को भी बुलाया गया था. पूरी रिपोर्ट स्वास्थ भवन को भेज दिया जायेगा. अस्पताल की अन्य लापरवाह भरी परिसेवाओं से अस्पताल प्रबंधन ने कन्नी काट लिया. जहां राज्य सरकार स्वास्थ परिसेवा को सुदृढ़ करने का लगातार प्रयत्न कर रही हैं. वहीं डायलेसिस यूनिट की गैरजिम्मेदाराना परिसेवा कतई बरदाश्त नहीं किया जायेगा. दूसरी तरफ बीएमआरसी के प्रशासनिक अधिकारी राजीव बनर्जी ने भी शुरू से ही आरएमओ नहीं होने की बात को स्वीकार किया है. उन्होंने बताया कि एक डॉक्टर से बातचीत जारी है. एक दो दिन में आरएमओ को नियुक्त कर दिया जायेगा. यूनिट से दवा मुहैया ना कराने के आरोप पर श्री बनर्जी ने कहा कि मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी.

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