गोरखालैंड आंदोलन से सिलीगुड़ी के अस्पताल बीमार

Updated at :13 Jul 2017 10:34 AM
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गोरखालैंड आंदोलन से सिलीगुड़ी के अस्पताल बीमार

सिलीगुड़ी: पहाड़ पर गोरखालैंड आंदोलन की वजह से सिलीगुड़ी की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. अब तक सिलीगुड़ी शहर का थोक कारोबार ही गोरखालैंड आंदोलन से प्रभावित हो रहा था. लेकिन अब यहां के विभिन्न अस्पतालों में भी गोरखालैंड आंदोलन की मार पड़ने लगी है. सिलीगुड़ी शहर में छोटे-बड़े करीब 50 निजी अस्पताल है. इन […]

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सिलीगुड़ी: पहाड़ पर गोरखालैंड आंदोलन की वजह से सिलीगुड़ी की पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है. अब तक सिलीगुड़ी शहर का थोक कारोबार ही गोरखालैंड आंदोलन से प्रभावित हो रहा था. लेकिन अब यहां के विभिन्न अस्पतालों में भी गोरखालैंड आंदोलन की मार पड़ने लगी है. सिलीगुड़ी शहर में छोटे-बड़े करीब 50 निजी अस्पताल है. इन अस्पतालों में इलाज कराने के लिए सिलीगुड़ी तथा इसके आसपास के इलाके से तो लोग आते ही हैं, साथ ही दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र एवं सिक्किम से भारी संख्या में मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं.
पिछले करीब एक महीने से दार्जीलिंग में बेमियादी बंद जारी है. दुकानें तो बंद हैं ही, वाहनों की आवाजाही भी नहीं हो रही है. सिलीगुड़ी शहर में कई बड़े अस्पताल हैं, जहां पहाड़ से आनेवाले रोगियों की संख्या काफी होती है. इनमें नेवटिया, आनंदलोक, पैरामाउंट, चैंग नर्सिंग होम आदि का नाम शामिल है. एक अनुमान के मुताबिक, इन अस्पतालों में प्रति महीने 150 से 180 मरीज भरती होते हैं. इसके अलावा ओपीडी में इलाज कराने के लिए आनेवाले मरीजों की संख्या भी काफी अधिक है. इन बड़े अस्पतालों में महीने में लगभग एक हजार से 1200 मरीज ओपीडी में चिकित्सा कराने आते हैं. छोटे अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या कम नहीं होती. पिछले एक महीने से ऐसे अस्पतालों का आलम बदल गया है.
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पहाड़ से आनेवाले मरीजों की संख्या में 70 से 80 प्रतिशत की कमी आ गयी है. पहले जहां महीने में 150 से 180 मरीज भरती होते थे, वहीं पिछले एक महीने के दौरान इनकी संख्या घट कर 25 से 30 हो गयी है. ओपीडी में भी हर दिन केवल पांच से सात मरीज ही इलाज कराने के लिए आ रहे हैं.
पहले जब पहाड़ पर बेमियादी बंद होता था, तो इसका अधिक असर यहां के अस्पतालों पर नहीं पड़ता था क्योंकि सिक्किम के मरीज नियमित रूप से यहां इलाज कराने आते थे. हाल ही में सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने गोरखालैंड मांग का समर्थन किया है. इतना ही नहीं उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को गोरखालैंड समस्या दूर करने के लिए चिट्ठी भी लिखी है. इसके परिणामस्वरूप सिक्किम के मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल सरकार तथा यहां के लोगों के निशाने पर आ गये हैं. पिछले दस दिनों के दौरान सिक्किम नंबर की गाड़ियों पर हमले की कई घटनाएं सिलीगुड़ी में हुई हैं. इसके अलावा सिक्किम के लोगों के साथ मारपीट भी की गयी है.
सिक्किम के ड्राइवर सिलीगुड़ी आने से डर रहे हैं. इतना ही नहीं सिलीगुड़ी में आम लेागों द्वारा अघोषित रूप से आर्थिक नाकेबंदी भी की जा रही है. पहाड़ तथा सिक्किम से आने वाली गाड़ियों की कुछ लोग नियमित रूप से चेकिंग कर रहे हैं. पहाड़ पर रसद न पहुंचे, इसके लिए एंबुलेंस तक की चेकिंग की जा रही है. परिणामस्वरूप, सिक्किम के लोग भी सिलीगुड़ी आने से कतरा रहे हैं. कुछ इसी प्रकार का डर पश्चिम बंगाल नंबर के गाड़ियों के चालकों में है. डब्ल्यूबी नंबर की गाड़ी सिक्किम नहीं जा रही है. ऐसे हालात में स्वाभाविक रूप से आम लोगों के साथ साथ मरीज भी नहीं आ रहे हैं. इसी वजह से मरीजों की संख्या कम हो रही है. एक अनुमान के मुताबिक पहाड़ पर बेमियादी बंद से हेल्थकेयर सेक्टर को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. इसके अलावा सरकारी राजस्व को भी लाखों रुपये का चूना लगा है.
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