''आद्रा मंडल अधीन दामोदर पर बना रेलवे पुल खतरे में, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना''

Updated at : 29 Jul 2024 1:40 AM (IST)
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''आद्रा मंडल अधीन दामोदर पर बना रेलवे पुल खतरे में, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना''

अग्निमित्रा पाल दामोदर नदी में बालू के अवैध खनन पर विधानसभा में उठायेंगी आवाज

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आसनसोल. आसनसोल साउथ की विधायक सह भाजपा नेत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि दामोदर नदी में अवैध बालू खनन के कारण आद्रा रेल मंडल अधीन दामोदर नदी पर बना पुल खतरे में है, रेल प्रशासन पुल की मरम्मत कर रहा है लेकिन अंधाधुंध बालू के खनन से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. रेलवे पुल पिलर्स पर खड़ा है और बालू खनन होने से पिलर्स का बेस ओपन हो गया है, जिससे उन्हें खतरा उत्पन्न हो रहा है.

अवैध खनन का सीधा असर पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है. नदी में बालू का स्तर घट जाने से रेत के अंदर पानी पकड़े रखने की क्षमता लगातार कम हो रही है. जिसका सीधा असर नदी में स्थित वाटर प्लांट पर पड़ रहा है. इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. रविवार को दामोदर नदी पर भूतनाथ घाट इलाके में पहुंची विधायक श्रीमती पाल ने नदी का हाल देखने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए उक्त बाते कहीं. उन्होंने दामोदर नदी पर पुल नहीं बनाने के मुद्दे पर भी राज्य सरकार को कोसते हुए कहा कि क्लबों को देने के लिए करोड़ों रुपये हैं लेकिन लाखों लोगों की समस्या के समाधान को लेकर दामोदर नदी पर एक पुल बनाने के लिए पैसा नहीं है. इन सारे मुद्दों को मंगलवार को विधानसभा में उठाने की बात उन्होंने कही.

गौरतलब है कि पश्चिम बर्दवान जिले को बीच के रखकर दोनों ओर से दो नदियां दामोदर और अजय नदी बहती हैं. इन दोनों नदियों में बालू का काफी भंडार है. पिछले कुछ वर्षों से बालू के अंधाधुंध खनन से इलाके में पेयजल आपूर्ति पर काफी असर पड़ा है. इन दोनों नदियों के दर्जनों वाटर प्लांट हैं. नदी के बालू का स्तर कम होने से रेत के अंदर पानी पकड़े रखने की क्षमता कम हो रही है. जिससे वाटर प्लांट को अपनी क्षमता के अनुसार पानी नहीं मिल रहा है. जिसका असर पूरे इलाके पर पड़ रहा है. इसे लेकर भाजपा, माकपा, कांग्रेस लगभग सभी राजनैतिक पार्टियों के नेता आवाज उठा रहे हैं. रविवार को आसनसोल साउथ की विधायक श्रीमती पाल दामोदर नदी के भूतनाथ घाट इलाके में पहुंची और राज्य सरकार को कठघरे के खड़ा किया.

नियमों की धज्जियां उड़ाकर चल रहा था बालू खनन

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियम के अनुसार बारिश के सीजन में करीब चार माह तक नदियों से बालू का खनन बंद रहता है. यह समय सीमा 15 जून से 15 अक्टूबर तक की है. हालांकि 15 अक्टूबर के बाद भी खनन बंद रखने का निर्णय स्थानीय प्रशासन का होता है. इस दौरान नदी में ड्रेजिंग का काम भी बंद रहता है. रविवार को जब श्रीमती पाल दामोदर नदी के घाट पर पहुंची तब नदी के दूसरी ओर दर्जनों ट्रकों में बड़े-बड़े मशीनों से बालू लोड किया जा रहा था. श्रीमती पाल ने सवाल उठाया कि किस नियम के दायरे में यह खनन हो रहा है? इस तरह के अवैध कार्य से नदी का अस्तित्व भी खतरे में आ गया है. दामोदर नदी पर एक पुल बनाने की मांग लंबे समय से स्थानीय लोग करते आ रहे है. इस पुल के बनने से बांकुड़ा, पुरुलिया के लाखों लोगों को फायदा होगा. प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग जान हथेली पर लेकर नदी आर-पार करते हैं. मंत्री मलय घटक ने कहा था कि पुल बनाने की मंजूरी मिल गयी है. मुख्यमंत्री ने कहा कोई पुल नहीं बनेगा. लोगों की बुनियादी जरूरत से सरकार को कोई मतलब नहीं है. धड़ल्ले से खुलेआम लूट चल रही है, सरकार आंख बंद करके है. ये सारे मुद्दे विधानसभा में मंगलवार को उठाये जायेंगे.

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