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मेट्रो रेल के बाद अब कोलकाता शहर में नदी के नीचे से गुजरेंगी लॉरियां, ट्रकों की आवाजाही में तेजी की पहल

Updated at : 03 Apr 2024 11:31 PM (IST)
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मेट्रो रेल के बाद अब कोलकाता शहर में नदी के नीचे से गुजरेंगी लॉरियां, ट्रकों की आवाजाही में तेजी की पहल

कोलकाता में हुगली नदी के नीचे अब सुरंग से होकर ट्रक भी गुजरेंगे. इससे शहर के ट्रैफिक का बोझ घटेगा और जाम की समस्या कम होगी. मेट्रो पहले ही गंगा के नीचे दौड़ने लगी है.

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कोलकाता, अमर शक्ति : पूरे देश में कोलकाता एकमात्र ऐसा शहर है, जहां नदी के नीचे से मेट्रो ट्रेन गुजर रही है और लोग इस सफर का आनंद ले रहे हैं. अब मेट्रो रेल के बाद कोलकाता शहर में नदी के नीचे एक और सुरंग बनाने की योजना बनायी जा रही है, जहां से ट्रकों की आवाजाही होगी.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट की है सुरंग बनाने की योजना

केंद्रीय पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की अधीनस्थ एक स्वायत्त संस्था, श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (एसएमपी) कोलकाता ने यह सुरंग बनाने की योजना बनायी है. बताया गया है कि कोलकाता पोर्ट से माल वाहक वाहनों की आवाजाही की गति को और तेज करने के लिए एसएमपी कोलकाता की ओर से यह टनल निर्माण किया जायेगा. यह टनल बनने से महानगर के पोर्ट क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था में काफी हद तक सुधार हो जायेगा.

टनल के निर्माण पर खर्च होंगे 2000 करोड़ रुपये

जानकारी के अनुसार, कोलकाता पोर्ट के नेताजी सुभाष डॉक के पास से हावड़ा की ओर से शालीमार-बी गार्डेन तक छह लेन वाला डेढ़ किलोमीटर लंबा टनल का निर्माण किया जायेगा, जिसमें लगभग 800 मीटर सड़क गंगा के नीचे होगा. बताया गया है कि इस टनल के निर्माण के लिए कुल 2000 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे. इस टनल के माध्यम से कोलकाता पोर्ट से माल वाहक लॉरियां सीधे कोना एक्सप्रेस वे पर पहुंंच जायेंगी, जिससे खिदिरपुर व विद्यासागर सेतु की ट्रैफिक जाम की समस्या का स्थायी समाधान हो जायेगा.

टनल बनने से माल परिवहन व्यवस्था में होगा सुधार

कोलकाता शहर में बड़े मालवाहक ट्रकों की आवाजाही पर कुछ प्रतिबंध लगाये गये हैं. दिन के अधिकांश समय बड़े ट्रकों को शहर की सड़कों से नहीं चलाया जा सकता है. कोलकाता पोर्ट पर चलने वाली अधिकांश मालवाहक लॉरियां विद्यासागर सेतु से होते हुए कोना एक्सप्रेस वे की ओर से जाती हैं. बड़ी लॉरियों को सिर्फ रात में विद्यासागर सेतु से गुजरने की अनुमति है.

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ट्रकों की वजह से ट्रैफिक जाम की बढ़ जाती है समस्या

रात के समय बड़ी संख्या में ट्रकों के आने से ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो जाती है. गंगा के नीचे सुरंग बनने से यह समस्या नहीं रहेगी. ऐसी स्थिति में, पोर्ट से ट्रकों के संचालन की गति में तेजी आयेगी और यहां माल परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी. यह टनल बन जाने के बाद बंदरगाह पर आने वाले ट्रकों को खिदिरपुर इलाके की सड़कों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा.

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अगले कुछ महीने में डीपीआर तैयार का काम होगा पूरा

एसएमपी कोलकाता के सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने का काम चल रहा है, जो अगले कुछ महीने में पूरा हो जायेगा. एक बार डीपीआर पूरा हो जाने पर, परियोजना के कार्यान्वयन के लिए वैश्विक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआइ) और निविदाएं बुलाई जायेंगी. जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए पोर्ट प्रबंधन निजी निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दे रहा है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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