लंदन-पेरिस यूरोस्टार से हो रही ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर की तुलना, रोमांच से भरे सफर में मिलेगी 5G इंटरनेट सेवा

पानी के नीचे भी लोग ले सकेंगे 5G इंटरनेट का मजा.
5G Internet Under Water Metro: भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने दुनिया में अपना लोहा मनवाया है. पानी के अंदर चलने वाली मेट्रो ट्रेन में लोगों को 5G इंटरनेट की सुविधा मिलेगी.
5G Internet in Under Water Metro: हाल के कुछ वर्षों में भारतीय इंजीनियरों और वैज्ञानिकों ने दुनिया में अपना लोहा मनवाया है. फिर चाहे वह चांद की बात हो, या फिर समुद्र का सीना चीरकर ब्रिज बनाना हो. अब इंजीनियरों ने एक और चमत्कार कर दिया है, जिसे देखकर कर दुनिया भारतीय इंजीनियरों की प्रतिभा की मिसाल देगी. देश में पहली बार नदी के नीचे सुरंग से मेट्रो सेवा शुरू होने जा रही है. इस सुरंग का उद्घाटन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे.
कोलकाता के नाम एक और रिकॉर्ड
इस सुरंग के उद्घाटन के साथ ही कोलकाता महानगर का नाम फिर मेट्रो सेवा को लेकर एक और उपलब्धियों में शामिल हो जायेगा. देश में पहली बार मेट्रो कोलकाता में ही दौड़ी थी और अब नदी के नीचे भी पहली मेट्रो सेवा की शुरुआत इसी महानगर में होने जा रही है.
यह मेट्रो टनल भारत में किसी भी नदी के नीचे बनी पहली सुरंग है, जहां हुगली नदी के तल से 32 मीटर नीचे मेट्रो दौड़ेगी. हुगली नदी के नीचे चलने वाली देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो रेल हावड़ा को कोलकाता से कनेक्ट करेगी. इससे लोगों का आने-जाने का समय तो कम होगा ही, साथ ही यह सफर भी रोमांच से भरा होगा.
ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के अंतर्गत हुआ है सुरंग का निर्माण
ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर पर काम किसी भी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. यह परियोजना कई बार विभिन्न कारणों की वजह से बाधित हुई. कोलकाता मेट्रो का काम कई चरणों में आगे बढ़ा है. मौजूदा चरण में महानगर के ईस्ट-वेस्ट मेट्रो कॉरिडोर के लिए नदी के नीचे सुरंग बनायी गयी है. यहीं से होकर अंडरवाटर मेट्रो को गुजरना है.
जानकारी के मुताबिक, हावड़ा मैदान-एस्प्लानेड मेट्रो टनल भारत में किसी भी नदी के नीचे बनी पहली सुरंग है. इसके साथ ही हावड़ा मेट्रो स्टेशन अब भारत का सबसे गहराई में स्थित मेट्रो स्टेशन बन गया है. यहां माझेरहाट मेट्रो स्टेशन भी इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है, जहां पर रेलवे ट्रैक को प्लेटफार्म के ठीक ऊपर बनाया गया है. ऐसा यह एकमात्र मेट्रो स्टेशन होगा.
520 मीटर लंबी है देश की पहली अंडरवाटर मेट्रो की सुरंग
हावड़ा से एस्प्लानेड तक का रास्ता करीब 4.8 किलोमीटर लंबा है. इस रूट पर हुगली नदी के नीचे 520 मीटर लंबी मेट्रो सुरंग है. इस प्रोजेक्ट में अंडरग्राउंड पूरी टनल करीब 10.8 किलोमीटर लंबी है, जो हावड़ा मैदान से फूलबागान तक है. हुगली नदी के नीचे 33 मीटर की गहराई के साथ हावड़ा मेट्रो स्टेशन देश का सबसे गहरा स्टेशन होगा. पानी के नीचे 520 मीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को काफी कम समय लगेगा.
पानी के नीचे भी मिलेगी 5जी इंटरनेट सेवा
अंडरवाटर मेट्रो में भी यात्रियों की सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है. यहां यात्रियों को 5जी इंटरनेट की सुविधा भी मिलेगी. बता दें, इस मेट्रो टनल का काम 2017 में शुरू हुआ था. पानी के नीचे टनल बनाने के लिए हजारों टन मिट्टी भी निकाली गयी है. अधिकारियों का दावा है कि अंडरवाटर मेट्रो टनल में पात्री की एक बूंद भी प्रवेश नहीं कर सकती है.
होंगे ये फायदे
- सड़कों पर भीड़ होगी कम
- पानी के नीचे मेट्रो चलने से कोलकाता और हावड़ा की दूरी होगी कम
- शहरी परिवहन आधारित संरचना का विकास
- कोलकाता और हावड़ा के लोगों के लिए आवाजाही और जीवनयापन में होगी आसानी
- शहरी और उपनगरीय यात्रियों की यात्रा के समय में आएगी कमी
- पर्यावरण अनुकूल परिवहन से कार्बन उत्सर्जन होगा कम
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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