13 साल बाद राइटर्स बिल्डिंग लौटेगा बंगाल सचिवालय, बीबीडी बाग के छोटे दुकानदारों की चमकेगी किस्मत

Writers Building West Bengal Secretariat News: पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सचिवालय को वापस ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग शिफ्ट किया जायेगा. जानें कैसे इस फैसले से बीबीडी बाग के चाय, नाश्ता और जेरॉक्स दुकानदारों की जिंदगी में लौटेंगे अच्छे दिन.
खास बातें
Writers Building West Bengal Secretariat News: पश्चिम बंगाल की सत्ता एक बार फिर अपनी ऐतिहासिक पहचान यानी राइटर्स बिल्डिंग में लौटने वाली है. शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नयी सरकार ने राज्य सचिवालय को दोबारा राइटर्स बिल्डिंग से संचालित करने का जो फैसला लिया है, उसने डलहौजी और बीबीडी बाग इलाके के हजारों छोटे व्यापारियों के मुरझाये चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है.
13 साल बाद छोटे कारोबारियों के आयेंगे अच्छे दिन
करीब 13 साल पहले जब सचिवालय को हुगली नदी के उस पार हावड़ा स्थित ‘नबान्ना’ शिफ्ट किया गया था, तब से इस इलाके की रौनक और दुकानदारों की रोजी-रोटी मानो छीन-सी गयी थी. अब कर्मचारियों की वापसी की खबर से व्यापारियों को अच्छे दिनों की उम्मीद जागी है.
सूनी दुकानों में फिर लौटेगी चाय-नाश्ते की खुशबू
राइटर्स बिल्डिंग के इर्द-गिर्द चाय की दुकान चलाने वाले प्रबीर साहा बताते हैं कि पहले उनके पास सिर खुजलाने तक की फुर्सत नहीं होती थी. सरकारी बाबू, पुलिसकर्मी और वकीलों की भीड़ से दुकान गुलजार रहती थी. लेकिन 2013 के बाद सन्नाटा पसर गया. नाश्ते की दुकान चलाने वाली रीना शॉ कहती हैं- पहले हमारे यहां 6 कर्मचारी काम करते थे. अब मैं और मेरे पति ही मुश्किल से दुकान खींच रहे हैं. अगर सचिवालय वापस आता है, तो यह पूरा इलाका फिर से जीवंत हो जायेगा.
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जेरॉक्स और स्टेशनरी वालों का खत्म होगा बुरा दौरा
सबसे ज्यादा मार फोटोकॉपी (जेरॉक्स) और स्टेशनरी दुकानदारों पर पड़ी थी. सचिवालय शिफ्ट होने के बाद कागजी कामकाज खत्म हो गया. संजय गुप्ता जैसे कई दुकानदारों ने बताया कि किराया और बिजली बिल न भर पाने के कारण इस लाइन की 7-8 दुकानें बंद हो गयीं. आवेदन पत्र, हलफनामे और सरकारी दस्तावेजों की फोटोकॉपी ही इनकी कमाई का मुख्य जरिया थी.
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Writers Building West Bengal Secretariat News: इतिहास और अर्थव्यवस्था का मिलन
250 साल पुरानी यह ऐतिहासिक इमारत ब्रिटिश काल की गवाह रही है. वर्ष 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आयीं, तब कुछ समय सचिवालय यहीं रहा, लेकिन 2013 में इसे ‘नबान्न’ भेज दिया गया. स्थानीय संगठनों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीबीडी बाग का पूरा आर्थिक ढांचा चरमरा गया था. प्रशासनिक केंद्र के हटने से अनौपचारिक क्षेत्र (जैसे फेरीवाले, फल विक्रेता) पर सबसे बुरा असर पड़ता है.
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बीबीडी बाग की फिर जागेगी किस्मत
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि राइटर्स बिल्डिंग को स्थायी रूप से दोबारा राज्य सचिवालय का दर्जा दिया जायेगा. फल विक्रेता अब्दुल रहीम कहते हैं कि हजारों कर्मचारियों के आने का मतलब है कि हर छोटे काम वाले के लिए काम. अब दोपहर में दुकानों के शटर नहीं गिरेंगे, बल्कि देर रात तक रौनक रहेगी.
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By Mithilesh Jha
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