ममता की 300 रुपए वाली प्रतिज्ञा से उद्योग जगत चिंतित, क्या चुनावी वादे से बंद हो जायेंगे दार्जिलिंग के चाय बागान?

Updated at : 22 Mar 2026 3:42 PM (IST)
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West Bengal Election 2026 TMC Manifesto Tea Workers

चाय बागान श्रमिकों की दिहाड़ी 250 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए करने की घोषणा. फोटो : AI

West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए जारी घोषणा पत्र में ममता बनर्जी ने चाय श्रमिकों की मजदूरी 300 रुपये करने का वादा किया है. इधर, भारतीय चाय संघ (TAI) ने इसे उद्योग की नाजुक स्थिति के लिए खतरनाक बताया है. क्या चुनावी वादे से बंद हो जायेंगे दार्जिलिंग के चाय बागान? पढ़ें विशेष रिपोर्ट.

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West Bengal Election 2026: ममता बनर्जी की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने बंगाल चुनाव 2026 से पहले चाय बागान श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 300 रुपए करने का वादा किया है. इस चुनावी वादे पर उद्योग जगत ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है.

मजदूरी तय करने के लिए परामर्श प्रक्रिया जरूरी – उद्योग जगत

उद्योग जगत का कहना है कि मजदूरी में किसी भी संशोधन के लिए इस क्षेत्र की नाजुक वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए. नौकरी देने वालों, ट्रेड यूनियनों तथा सरकार को शामिल करने वाली स्थापित परामर्श प्रक्रिया का पालन करना चाहिए.

दीदी की 10 प्रतिज्ञा में चाय श्रमिकों की मजदूरी 250 से 300 रुपए करने का वादा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अपने चुनावी घोषणापत्र में सत्तारूढ़ टीएमसी ने चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 250 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए करने का संकल्प लिया है. पार्टी ने यह भी कहा कि वह हरी चाय की पत्तियों पर कृषि आयकर की छूट को 2027 तक बढ़ायेगी और बागान श्रमिकों के लिए ‘चा सुंदरी’ आवास योजना जैसी कल्याणकारी पहल जारी रखेगी.

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बातचीत से तय होता है चाय श्रमिकों का वेतन – टीएआई

उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा है कि चाय क्षेत्र में वेतन निर्धारण पारंपरिक रूप से तय बातचीत प्रक्रिया के माध्यम से होता है. भारतीय चाय संघ (टीएआई) के महासचिव पीके भट्टाचार्य ने कहा कि उत्तर बंगाल में मजदूरी तंत्र एक बहु-हितधारक मंच के माध्यम से तय किया जाता है.

उत्तर बंगाल में वेतन, न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड नामक निकाय द्वारा तय किया जाता है. यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें इम्प्लॉयर, सरकार और ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि भाग लेते हैं.

पीके भट्टाचार्य, महासचिव, भारतीय चाय संघ

कई पहलुओं को ध्यान में रखकर तय होती है मजदूरी

भट्टाचार्य ने कहा कि इसमें उद्योग की भुगतान क्षमता, बाजार की स्थिति और लागू प्रावधानों जैसे सभी पहलुओं पर विचार किया जाता है. इसलिए, उद्योग के रूप में यह आशा की जाती है कि मजदूरी लागू करने से पहले इन सभी पहलुओं पर गौर किया जायेगा.

बंद हो रहे दार्जिलिंग के चाय बागान

नाम न छापने की शर्त पर दार्जिलिंग चाय उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पहाड़ियों के कई बागान पहले से ही वजूद बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. दार्जिलिंग के 78 चाय बागानों में 7-8 बागान नेपाल से सस्ती चाय की डंपिंग के कारण पहले ही बंद हो चुके हैं. ऐसी स्थिति में मजदूरी में वृद्धि बिल्कुल टिकाऊ नहीं है. अगर लागत का दबाव बढ़ता रहा, तो और भी बागान बंद हो सकते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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