तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का हुमायूं पर पलटवार, फातेमा बीबी ने दी खुली चुनौती

जिले की महिला तृणमूल नेता फातेमा बीबी ने कबीर को सीधी चुनौती देते हुए कहा : अगर उनमें हिम्मत है, तो तृणमूल का प्रतीक छोड़ कर रेजिनगर से बतौर आम उम्मीदवार चुनाव लड़ें.
कहा : तृणमूल का प्रतीक छोड़ कर हुमायूं चुनाव लड़ें, तो पता चले ताकत कोलकाता. मुर्शिदाबाद के भरतपुर से तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के लगातार विवादित बयानों ने पार्टी के अंदर असंतोष को खुलकर सामने ला दिया है. शनिवार को उनकी एक और टिप्पणी के बाद तृणमूल नेताओं ने तीखा पलटवार किया. जिले की महिला तृणमूल नेता फातेमा बीबी ने कबीर को सीधी चुनौती देते हुए कहा : अगर उनमें हिम्मत है, तो तृणमूल का प्रतीक छोड़ कर रेजिनगर से बतौर आम उम्मीदवार चुनाव लड़ें. मैं जनता की तरफ से उनके खिलाफ मैदान में उतरूंगी. तब पता चलेगा कि जनता किसके साथ है. कबीर ने शनिवार को मुर्शिदाबाद में तृणमूल अध्यक्ष अपूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था : राजनीति में सबकुछ संभव है. जरूरत पड़ी तो मैं उस अधीर चौधरी के साथ भी सीट एडजस्टमेंट कर सकता हूं, जिसे तृणमूल उम्मीदवार ने 2024 में हराया था. उनके इस बयान से जिले में हलचल मच गयी. फातेमा बीबी ने कहा : हुमायूं कबीर पहले तृणमूल छोड़ कर भाजपा में चले गये थे. लेकिन जिले के किसी और अल्पसंख्यक नेता ने भाजपा का रुख नहीं किया. उन्हें जिला स्तर पर कोई नेता पसंद नहीं करता. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व की बदौलत ही हम सब जीत रहे हैं, न कि हुमायूं की वजह से. वहीं, जिला अध्यक्ष अपूर्व सरकार ने बिना नाम लिए प्रतिक्रिया देते हुए कहा : फुटपाथ पर कौन क्या कह रहा है, उस पर न मैं ध्यान देता हूं, न पार्टी. जनता सब देख रही है. इससे पहले, शुक्रवार को हुमायूं कबीर ने पुलिस के एक कार्यक्रम में भी अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था : मैं भरतपुर से 43 हजार वोटों से जीता था, लेकिन लोकसभा में लीड घटकर 17 हजार रह गयी. इसका जिम्मेदार जिला नेतृत्व है. अगर गुटबाजी नहीं रुकी, तो मैं सड़कों पर उतर कर विरोध करूंगा. कबीर की लगातार टिप्पणियों से तृणमूल के भीतर असंतोष और उजागर हो गया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार, कबीर के बयान पर राज्य नेतृत्व भी नाराज है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है. जिले के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि हुमायूं कबीर का यह रुख 2026 विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल के लिए चुनौतीपूर्ण संकेत है, खासकर तब जब पार्टी गुटबाजी रोकने की कोशिश कर रही है.
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