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जघन्य अपराध के दोषियों को खोजकर जल्द कड़ी सजा देनी चाहिए : भागवत

Updated at : 09 Sep 2024 8:52 PM (IST)
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जघन्य अपराध के दोषियों को खोजकर जल्द कड़ी सजा देनी चाहिए : भागवत

महिला डॉक्टर से दरिंदगी की घटना पर आरएसएस सरसंघचालक भी मर्माहत

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महिला डॉक्टर से दरिंदगी की घटना पर आरएसएस सरसंघचालक भी मर्माहत कोलकाता. महानगर के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में जूनियर महिला डॉक्टर से हुई दरिंदगी की घटना पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है. महानगर में एक कार्यक्रम के दौरान श्री भागवत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार को जघन्य अपराध के दोषियों को खोजकर जल्द से जल्द कड़ी सजा देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वह घटना को लेकर समाज के लोगों की भावनाओं की पूरी रीति से कद्र करते हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए भागवत ने कहा, “ ममता बनर्जी को इस मामले पर कैबिनेट की आपात बैठक बुलानी चाहिए और राज्य सरकार को जघन्य अपराध के दोषियों के लिए कड़ी सजा सुनिश्चित करनी चाहिए.” संघ प्रमुख ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में चल रहे विरोध प्रदर्शन पर भी चर्चा की. उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की पहल ‘मिशन साहसी’ का जिक्र किया, जो समाज के हर क्षेत्र की महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गयी है. उन्होंने कहा कि देश में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानूनों की आवश्यकता है. समर्पित भाव से राष्ट्र की सेवा करें स्वयंसेवक: भागवत ने स्वयंसेवकों को नसीहत देते हुए कहा कि आप अगर संघ में आते हैं, तो सेवा भाव से आइये और राष्ट्र के लिए समर्पित रहिये. आप सोचेंगे कि यहां आकर नेता बनेंगे और टिकट मिलेगा, तो यह भूल जाइये. उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी विचार रखे. संघ प्रमुख ने सरकार को सलाह दी कि जनगणना के आंकड़ों का उपयोग विभिन्न विकास योजनाओं के लिए किया जाना चाहिए. यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इन आंकड़ों का दुरुपयोग वोट बैंक की राजनीति के लिए न हो. विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के लिए समाज के विभिन्न तबकों के आंकड़ों की आवश्यकता पड़ सकती है. परंतु इस बात की गारंटी होनी चाहिए कि यह डेटा राजनीतिक लाभ के लिए न इस्तेमाल हो. प्रत्येक व्यक्ति में होनी चाहिए स्वबोध की भावना : डॉ भागवत ने शिक्षा व्यवस्था की औपनिवेशिक मानसिकता पर भी चिंता व्यक्त की और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में समग्र शिक्षा के डिकोलोनाइजेशन (औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति) की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली में ऐसे बदलाव किये जाने चाहिए, जो हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति को समझने और आगे बढ़ाने में सहायक हों. सरसंघचालक ने राष्ट्रहित सर्वोपरि और वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों पर आधारित संघ के दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में स्वबोध (आत्मबोध) की भावना होनी चाहिए और समाज को संघ और उसके कार्यों को हर वर्ग से समझने का प्रयास करना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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