खिदिरपुर अग्निकांड में मुआवजे को लेकर आवेदनों की जांच शुरू

Published by : SUBODH KUMAR SINGH Updated At : 05 Jul 2025 1:05 AM

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खिदिरपुर के अरफानगंज बाजार में लगी भीषण आग के बाद पीड़ितों के साथ खड़े होने के लिए कोलकाता नगर निगम ने कदम बढ़ाया है.

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दुकानदाराें को पुनर्वास में भी प्राथमिकता दी जायेगी

संवाददाता, कोलकाता

खिदिरपुर के अरफानगंज बाजार में लगी भीषण आग के बाद पीड़ितों के साथ खड़े होने के लिए कोलकाता नगर निगम ने कदम बढ़ाया है. अब तक मुआवजे के लिए 385 आवेदन दिये गये हैं. आवेदनों की जांच का काम चल रहा है. हालांकि, दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण अधिकारियों को जांच के दौरान कई जटिलताओं का सामना करना पड़ा है. नगर निगम सूत्रों के अनुसार, जिनके दस्तावेज सही हैं, उनके नाम को तेजी से स्वीकृत कर मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. उन्हें पुनर्वास में भी प्राथमिकता दी जायेगी.

हालांकि, कई आवेदकों के मामले में यह देखा गया है कि जमा किये गये कागजात में जिस दुकान का नाम है, उसे वास्तव में कोई और चला रहा है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि दुकान का समय बीतने के साथ हस्तांतरण हो गया है, लेकिन स्वामित्व का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है. नतीजतन, आवेदकों की पहचान का मिलान नगर निगम को मिली पुरानी सूची से करने में समस्या आ रही है. आग में जलकर राख हुए व्यापारियों के लिए अस्थायी दुकानें बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गयी है.

बाजार के बगल में खाली पड़ी जमीन पर 250 अस्थायी दुकानों के निर्माण के लिए परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गयी है. इस कार्य के लिए बहुत जल्द टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे. बाद में और दुकानें बनाने की योजना है. कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि वे इस पूरी पुनर्निर्माण प्रक्रिया को जल्द पूरा करें. उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द मुआवजा मिले और वे अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकें. खिदिरपुर ही नहीं, बल्कि शहर के सभी बाजारों की सुरक्षा की जांच करने की योजना बनायी है.

कोलकाता के 53 बाजारों में ””””फायर ऑडिट”””” शुरू हो चुका है. अग्निशमन विभाग एक महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपेगा कि कहां जलाशय या पंप लगाने की जरूरत है, कहां ट्यूबवेल की जरूरत है. मेयर ने यह भी कहा कि कोलकाता के कई पुराने बाजार बिना किसी योजना के बनाये गये हैं. चूंकि अंदरूनी सड़कें संकरी हैं, इसलिए आग लगने की स्थिति में दमकल गाड़ियों का वहां पहुंचना मुश्किल है. इसलिए, विशेष दिशा-निर्देशों के अनुसार बुनियादी ढांचे में बदलाव करने की योजना पर काम चल रहा है. साथ ही उन्होंने सार्वजनिक बाजारों में नियमित रूप से आग से निपटने के मॉक ड्रिल का भी आदेश दिया है. बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर हाई पावर कमेटी की दूसरी बैठक सात जुलाई को होगी. बैठक में कई कड़े फैसले लिये जा सकते हैं.

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