बंगाल उपचुनाव: बेबस पुष्पा यूं ही नहीं झुका, फाल्टा के मोर्चे पर अकेले खड़े थे जहांगीर

Published by : Ashish Jha Updated At : 19 May 2026 6:59 PM

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शुभेंदु, जहांगीर और ममता

Jahangir Khan: दक्षिण 24 परगना के फालता विधानसभा सीट पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर ने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि यह फैसला अभिषेक बनर्जा या तृणमूल के उच्च नेतृत्व का है या नहीं.

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Jahangir Khan: कोलकाता. बंगाल चुनाव में डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र का फाल्टा विधानसभा चुनावी दंगल का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है. भवानीपुर के बाद तृणमूल के लिए यह दूसरी महत्वपूर्ण सीट रही है. यहां से तृणमूल के दूसरे सबसे बड़े नेता अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगीर खान उम्मीदवार हैं. भवानीपुर की हार के बाद माना जा रहा था कि किसी भी हाल में तृणमूल यह सीट हारना नहीं चाहेगी, लेकिन मतदान से 48 घंटे पहले तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. उन्होंने साफ कर दिया कि वह फाल्टा से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. बेशक फाल्टा की जनता की शांति और एक सुनहरा फल पैदा करने के लिए जहांगीर ने चुनावी मैदान छोड़ा हैं. लेकिन, सवाल उठता है कि फैसला उनका है या किसके पीछे भी किसी का कोई राजनीतिक स्वार्थ है.

अभिषेक ने दी थी चुनौती

अभिषेक बनर्जी के करीबी जहांगीर खान का अचानक चुनावी मैदान से बाहर होना बंगाल की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिये हैं. विधानसभा चुनाव के दौरान अभिषेक बनर्जी ने ताल ठोक कर रहा था-आपके बांग्ला बिरोधी गुजराती गिरोह और उनके कठपुतली ज्ञानेश कुमार के लिए दस जन्म भी मेरे डायमंड हार्बर मॉडल में जरा सी भी सेंध लगाने के लिए सफल नहीं होंगे. अपनी पूरी ताकत लगा दो. मैं पूरे गिरोह को चुनौती देता हूं, फाल्टा आओ. अपने सबसे ताकतवर नेता को भेजो, दिल्ली से किसी एक गॉडफादर को भेजो. अगर हिम्मत है, तो फाल्टा में चुनाव लड़ो. बंगाल चुनाव में मिली करारी हार के बाद न केवल राजनीतिक परिस्थिति बदली है, बल्कि अभिषेक बनर्जी खुद भी कई मामलों में घिर चुके हैं.

प्रचार को नहीं पहुंचा कोई बड़ा नेता

पिछले लोकसभा चुनावों में जहांगीर ने अभिषेक बनर्जी को 1 लाख 62 हजार वोटों की बढ़त दिलाई थी. हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान अब तक जहांगीर के साथ अभिषेक कहीं नजर नहीं आए. वहीं दूसरी ओर, शुभेंदु अधिकारी प्रचार करने आए. यहां तक ​​कि वाम मोर्चा ने भी फाल्टा में प्रचार किया. यही सवाल बार-बार उठ रहा था कि अभिषेक कहां हैं. शायद पुष्पा भी यह समझ चुके हैं कि पार्टी का कोई बड़ा नेता इस समय साथ नहीं है. वह अकेले व बेबस हैं. इसलिए उन्होंने झुकना स्वीकार कर लिया. वर्ना अभिषेक बनर्जी से आगे बढ़कर जहांगीर खान ने भी दावे किये थे. उन्होंने भरे मंच से उत्तर प्रदेश के एक आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को चुनौती देते हुए कहा था कि वह झुकेंगे नहीं, बल्कि लड़ेंगे.

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अचानक फैसले के सवाल में साधी चुप्पी

जहांगीर खान घर से बाहर नहीं निकले. अपने घर पर ही मीडिया से बात की. जब उनसे पूछा गया कि अचानक यह फैसला किसके निर्देश पर लिया गया, तो वह इस सवाल से अलग दूसरी बात पर चले गये. उन्होंने कहा कि फालता के विकास के लिए, फालता के लोगों के लिए मैं चुनाव से हट रहा हूं. मुझे जो कहना है, मैंने बता दिया है, आगे अब मैं कुछ नहीं कहूंगा. इससे पहले उन्होंने कहा कि मैं फालता का बेटा हूं. मैं चाहता हूं कि फालता शांतिपूर्ण, स्वस्थ और समृद्ध रहे. यहां ज्यादा से ज्यादा विकास होना चाहिए. सफेद शर्ट और काला पेंट पहने पुष्पा ने कहा कि मेरा सपना एक सुनहरे फाल्टा का था. अंत में जहांगीर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने फालता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है, जिसका मैं स्वागत करता हूं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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