संजय सुरेका की 210.07 करोड़ की अचल संपत्ति की गयी कुर्क

Updated at : 12 Feb 2025 1:34 AM (IST)
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संजय सुरेका की 210.07 करोड़ की अचल संपत्ति की गयी कुर्क

इडी ने संजय कुमार सुरेका की करीब 210.07 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है.

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एक्शन. कॉनकास्ट ग्रुप के सीएमडी के खिलाफ इडी की कार्रवाई

करीब छह हजार करोड़ रुपये का बैंक ऋण जालसाजी का है मामला

संवाददाता, कोलकाता

करोड़ों रुपये के बैंक ऋण जालसाजी मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के कोलकाता जोनल कार्यालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स कॉनकास्ट स्टील एंड प्राइवेट लिमिटेड एंड पावर लिमिटेड के मालिक, कॉनकास्ट ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) संजय कुमार सुरेका की करीब 210.07 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है. उक्त निजी संस्थान व उससे जुड़े संस्थानों पर करीब छह हजार करोड़ रुपये की बैंक ऋण जालसाजी का आरोप है और उक्त मामले की जांच इडी कर रही है.

इडी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अचल संपत्तियों की कुर्की धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत की गयी है. पिछले साल दिसंबर महीने में इडी अधिकारी ने बैंक ऋण जालसाजी के उक्त मामले की जांच के सिलसिले में दक्षिण कोलकाता के बालीगंज में सुरेका के आवास पर मैराथन छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था.

उस छापेमारी और तलाशी अभियान के बाद इडी अधिकारियों ने उनके आवास से करीब दो करोड़ रुपये की नकदी, करीब 4.5 करोड़ रुपये के आभूषण और दो वाहन जब्त किये थे. इसके बाद इडी के अधिकारियों ने सुरेका को भी गिरफ्तार कर लिया था. सुरेका के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने कई बैंक खातों के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों के एक संघ से करीब छह हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने के बाद, जब भुगतान का समय आया तो उन्होंने भुगतान नहीं किया. उनपर यह भी आरोप लगाया गया कि सुरेका के कॉरपोरेट इकाई के कर्मचारियों और व्यावसायिक सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत बैंक खातों का उपयोग भी ऋण प्राप्त करने में किया गया. इसके अलावा, सुरेका अपने आवास से बरामद नकदी का विवरण देने में भी असमर्थ रहे, साथ ही महंगे आभूषणों और विदेशी निर्मित लग्जरी कारों की खरीद के लिए धन के स्रोतों के बारे में भी नहीं बता सके थे. इस वर्ष जनवरी में इडी अधिकारियों ने कोलकाता और उसके आसपास के दो अन्य स्थानों पर छापे मारे और तलाशी अभियान चलाये, जिनमें से एक स्थानीय व्यवसायी दीपक जैन का आवास था. इडी अधिकारियों ने पूरे कथित घोटाले में धन के लेन-देन का पता लगाया, जिससे उन्हें स्पष्ट जानकारी मिली कि जालसाजी कैसे हुई.

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