मुश्किल में पर्नो, तनुश्री और कंचना! बंगाल में सत्ता बदलने के बाद टॉलीवुड अभिनेत्रियों के ‘पछतावे’ की क्या है कहानी

Published by :Mithilesh Jha
Updated at :13 May 2026 7:12 AM
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बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्रियां जो चुनाव हारने के बाद भाजपा छोड़ टीएमसी में शामिल हो गयीं थीं.

Parno Mitra BJP: बंगाल में भाजपा की जीत के बाद उन अभिनेत्रियों के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं जिन्होंने 2021 के बाद भाजपा छोड़ दी थी. जानें पार्नो मित्रा, तनुश्री चक्रवर्ती और कंचना मैत्रा के भाजपा छोड़ने की पूरी कहानी और उनका वर्तमान स्टैंड.

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Parno Mitra BJP: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आये ‘सुनामी’ ने उन सितारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, जिन्होंने कभी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा था, लेकिन बाद में ‘दीदी’ के करीब जाने के लिए भगवा चोला उतार दिया. तनुश्री चक्रवर्ती, पर्नो मित्रा और कंचना मैत्रा जैसी अभिनेत्रियां अब चर्चा में हैं.

असमंजस में बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की अभिनेत्रियां

सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें आज भाजपा छोड़ने का मलाल है? वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाली ये अभिनेत्रियां अब बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने के बाद अपने अगले कदम को लेकर असमंजस में हैं.

तनुश्री और पर्नो कभी मोदी की सेना में थीं, फिर बनायी दूरी

वर्ष 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने टॉलीवुड सितारों पर बड़ा दांव खेला था.

  • तनुश्री चक्रवर्ती : हावड़ा के श्यामपुर से भाजपा की उम्मीदवार रहीं तनुश्री ने हार के कुछ समय बाद ही पार्टी से दूरी बना ली थी. उन्होंने राजनीति से संन्यास की बात कही थी, लेकिन बाद में वह टीएमसी के मंचों पर नजर आती रहीं.
  • पर्नो मित्रा : उत्तर दमदम से चुनाव लड़ने वाली पर्नो मित्रा ने भी भाजपा छोड़ दी थी. उनके करीबियों का मानना था कि वे टॉलीवुड में अपने करियर को बचाने के लिए ऐसा कर रही हैं, क्योंकि तब सत्ता का केंद्र कालीघाट था.
  • कंचना मैत्रा : खामोश हैं, पर सवाल बरकरार है. कंचना ने भाजपा के सक्रिय कार्यक्रमों से खुद को दूर कर लिया था. अब जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बन चुके हैं, तो इन अभिनेत्रियों के लिए वापसी का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है. भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में इन अवसरवादी फैसलों को लेकर नाराजगी देखी जा रही है.

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Parno Mitra BJP Left: सत्ता परिवर्तन और ‘घर वापसी’ की चर्चा

टॉलीवुड के गलियारों में 3 प्रमुख सवाल तैर रहे हैं- क्या भाजपा इन्हें माफ करेगी? भाजपा की नयी सरकार अब उन चेहरों को तरजीह दे रही है जो संघर्ष के दिनों में पार्टी के साथ खड़े रहे (जैसे रुद्राक्ष और अग्निमित्रा). टॉलीवुड में अब तक टीएमसी समर्थित यूनियनों का कब्जा था. अब सत्ता बदलने से इन अभिनेत्रियों को डर है कि कहीं वे दोनों तरफ से ‘बेघर’ न हो जाएं. कुछ अभिनेत्रियों ने तो भाजपा के शीर्ष नेताओं से संपर्क करने की कोशिश की भी है, ताकि वे ‘घर वापसी’ कर सकें.

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पाला बदलने वालों के लिए नहीं बिछेगा ‘रेड कार्पेट’

शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट में जिस तरह से कट्टर और वफादार नेताओं को जगह मिली है, उसने यह साफ कर दिया है कि नयी सरकार में ‘पाला बदलने’ वालों के लिए फिलहाल रेड कार्पेट नहीं बिछाया जायेगा. पर्नो, तनुश्री और कंचना की खामोशी इस वक्त बहुत कुछ बयां कर रही है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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