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चुपचाप हड्डियों की दुश्मन बन जा रही ऑस्टियोपोरोसिस

Updated at : 21 Oct 2025 12:37 AM (IST)
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चुपचाप हड्डियों की दुश्मन बन जा रही ऑस्टियोपोरोसिस

वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे के मौके पर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने पर िदया जोर

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महिलाओं में खतरा अधिक

कोलकाता. ऑस्टियोपोरोसिस हाल के वर्षों में एक गंभीर और तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बनकर उभरी है. इस बीमारी में हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और नाजुक हो जाती हैं, जिससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है. यह तब होता है, जब हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है या उनकी संरचना बदल जाती है.

जहां स्वस्थ हड्डियां शरीर का भार सहने और झटकों को सहने में सक्षम होती हैं, वहीं ऑस्टियोपोरोसिस से ग्रस्त हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती हैं. इसे अक्सर खामोश बीमारी कहा जाता है, क्योंकि अधिकतर मामलों में लक्षण तब तक नजर नहीं आते, जब तक कि कोई हड्डी टूट न जाये. कूल्हे, रीढ़ और कलाई की हड्डियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं.

पुरुष भी हो रहे प्रभावित : हर साल 20 अक्तूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हड्डियों के स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना है. विशेषज्ञों के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र की लगभग आधी महिलाएं और एक-चौथाई पुरुष ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित होते हैं.

भारत में किये गये अध्ययनों के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र की 10-30% महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित हैं और 70 वर्ष की उम्र के बाद यह आंकड़ा 60% तक पहुंच जाता है. चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकतर लोगों को इस बीमारी का तब तक पता नहीं चलता, जब तक उन्हें कोई हड्डी टूटने का अनुभव न हो.

शीघ्र स्क्रीनिंग व जागरूकता है बचाव का उपाय

अपोलो मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स, कोलकाता की रूमेटोलॉजिस्ट डॉ देबांजलि सिन्हा ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस एक आम लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है. खासकर रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में. अक्सर यह तब सामने आती है, जब किसी मामूली दुर्घटना में फ्रैक्चर हो जाता है. भारत में जागरूकता की कमी के कारण इसका समय पर निदान और इलाज नहीं हो पाता, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है. लेकिन अच्छी बात यह है कि नियमित व्यायाम, कैल्शियम और विटामिन डी का सही सेवन, धूम्रपान और शराब से दूरी व समय-समय पर डेक्सा स्कैन जैसे परीक्षणों के माध्यम से इस बीमारी को रोका जा सकता है. डॉ सिन्हा ने 65 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और जोखिम में रहने वाली युवा महिलाओं को डेक्सा स्कैन कराने की सलाह दी है, ताकि समय रहते रोग की पहचान की जा सके और निवारक कदम उठाये जा सकें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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