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कोलकाता में बोले डेरेक ओब्रायन- नयी शिक्षा नीति संघीय व्यवस्था के खिलाफ

Updated at : 05 Jan 2026 4:05 PM (IST)
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NEP Against Federal System Derek OBrien

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन.

NEP Against Federal Structure: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले जारी एसआईआर पर घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने अब नयी शिक्षा नीति को संघीय व्यवस्था के खिलाफ बता दिया है. उन्होंने आईसीएसई-आईएससी स्कूल के प्रधानाचार्यों से अपील की है कि वे एकजुट होकर नयी शिक्षा नीति (एनईपी) का विरोध करें.

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NEP Against Federal Structure: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार के नेता और मंत्री एक-दूसरे पर आरोपों की बौछार कर रहे हैं. वोटिंग से पहले वोटर लिस्ट को क्लीन करने के लिए चलाये गये विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के विरोध में निर्वाचन आयोग पर लगातार हमला बोलने वाली टीएमसी के राज्यसभा सांसद ने अब नयी शिक्षा नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है.

एकजुट होकर एनईपी का विरोध करें आईसीएसई-आईएससी स्कूल के प्रधानाचार्य -ओब्रायन

राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने नयी शिक्षा नीति (एनईपी) को संघीय व्यवस्था के खिलाफ बताया है. तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने आईसीएसई-आईएससी स्कूल के प्रधानाचार्यों से एकजुट होकर नयी शिक्षा नीति (एनईपी) का विरोध करने का सोमवार को आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यह नीति संघीय ढांचे के खिलाफ है और राज्यों या प्रमुख हितधारकों से परामर्श किये बिना तैयार की गयी है.

नयी शिक्षा नीति ने संघीय ढांचे को किया कमजोर – डेरेक ओब्रायन

स्कूल प्रमुखों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेरेक ओब्रायन ने कहा कि नयी शिक्षा नीति ने भारत के संघीय ढांचे को कमजोर कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और कर्नाटक सहित कई राज्यों की अपनी-अपनी शिक्षा नीतियां हैं. पश्चिम बंगाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में राज्य शिक्षा नीति लागू की, जबकि तमिलनाडु की नीति और कर्नाटक की मसौदा नीति 2025 में जारी की गयी.

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NEP Against Federal Structure: एनईपी से जुड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन हुआ मुश्किल – टीएमसी सांसद

तृणमूल कांग्रेस के नेता ने कहा कि हितधारकों के साथ परामर्श की कमी के कारण स्कूलों के लिए एनईपी से जुड़ी परियोजनाओं का कार्यान्वयन मुश्किल हो गया है. कोलकाता के ला मार्टिनियर गर्ल्स स्कूल में आयोजित एंग्लो-इंडियन स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के संघ के 103वें वार्षिक सम्मेलन में 3,000 से अधिक आईसीएसई-आईएससी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

एनईपी की वजह से अल्पसंख्यक स्कूलों पर हो रहा प्रतिकूल असर – डेरेक

अल्पसंख्यक-संचालित शैक्षणिक संस्थानों के प्रशासन के मुद्दे पर, टीएमसी नेता ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है. एनईपी की सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था के कारण इस पर प्रतिकूल असर हो रहा है. उन्होंने ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक’ पर भी चिंता जतायी. कहा कि ऐसे उपाय संस्थागत स्वायत्तता को और कमजोर करते हैं.

देश के 54000 ईसाई संचालित स्कूलों में पढ़ते हैं 6 करोड़ बच्चे

डेरेक ने ईसाई समुदाय के सदस्यों को ‘सकारात्मक उद्देश्यों’ से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग 54,000 ईसाई-संचालित संस्थानों में प्रतिवर्ष लगभग 6 करोड़ स्टूडेंट्स दाखिला लेते हैं. इनमें से कम से कम तीन-चौथाई छात्र गैर-ईसाई समुदायों से होते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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