वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में बढ़ रही हैं कई तरह की दिक्कतें

इस सम्मेलन में पश्चिम बंगाल सह देश के विभिन्न राज्यों से 350 से अधिक चेस्ट फिजिशियन सह क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट व वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया.
एसोसिएशन अॉफ चेस्ट फिजिशियन का सम्मेलन संपन्न
कोलकाता. एसोसिएशन ऑफ चेस्ट फिजिशियन की पश्चिम बंगाल शाखा का दो दिवसीय सम्मेलन रविवार को संपन्न हो गया. संगठन का यह 29 वां वार्षिक सम्मेलन था, जो सात फरवरी को शुरू हुआ था. इस सम्मेलन में पश्चिम बंगाल सह देश के विभिन्न राज्यों से 350 से अधिक चेस्ट फिजिशियन सह क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट व वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. जहां बताया गया कि वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में की कई तरह की दिक्कतें बढ़ रही हैं. क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) इनमें से एक है. जो वायु प्रदूषण सह धूम्रपान की वजह से होता है. शहर हो या गांव 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों में यह बीमारी करीब 8.36% देखी जाती है. शहरी इलाकों में स्मोकिंग न करने वाले मरीजों में सीओपीजी का मामला काफी बढ़ रहा है. ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ इंद्रनील हलदर ने बताया कि हमारे देश में पल्मोनरी टीबी से पीड़ित लोगों की संख्या भी बहुत अधिक है.
उन्होंने बताया कि कॉन्फ्रेंस में ट्यूबरकुलोसिस एसोसिएटेड ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (टीओपीडी) और उसके इलाज पर भी चर्चा की गई. डॉक्टरों ने अपने अनुभव सांझा किये. ऑर्गनाइजिंग साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. अंशुमान मुखर्जी ने कहा कि इस सम्मेलन का मुख्य मकसद सभी तरह की फेफड़ों की बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाना और लेटेस्ट इलाज की मदद से बीमारी को बढ़ने से रोकना है. फेफड़ों की बीमारियों का सबसे मुश्किल पहलू सांस लेने में तकलीफ है. ऑक्सीजन की कमी के कारण वेंटिलेशन की जरूरत पड़ सकती है. फेफड़ों की बीमारियों के इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के इस्तेमाल पर एम्स कल्याणी में एक वर्कशॉप हुई. जनरल सेक्रेटरी डॉ. जॉयदीप देब ने कहा कि लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की मदद से मरीजों को ठीक रखने के तरीकों पर भी एक वर्कशॉप हुई.
डॉक्टरों ने इनवेसिव वेंटिलेशन की मदद से गंभीर रूप से बीमार मरीज को वापस जीवन में लाने के अपने अनुभव शेयर किया. फेफड़ों की बीमारियों के लिए प्रिवेंटिव रेस्पिरेटरी मेडिसिन, गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए लेटेस्ट लाइफ सेविंग सिस्टम और पल्मोनरी टीबी के मॉडर्न इलाज पर चर्चा हुई.
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