ममता बनर्जी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, बदल दिया मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम

Updated at : 07 Feb 2026 10:52 PM (IST)
विज्ञापन
Murshidabad University West Bengal

मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी.

पश्चिम बंगाल विधानसभा में असेंबली इलेक्शन 2026 से पहले बुलाये गये अंतिम असेंबली सेंशन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया. सरकार ने मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदल दिया. विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सरकार के इस प्रस्ताव का विपक्ष ने भी समर्थन किया. इस बिल को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया.

विज्ञापन

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ विश्वविद्यालय, बहरमपुर करने का रास्ता साफ कर दिया है. शनिवार को विधानसभा में मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. इस निर्णय को सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष का भी समर्थन मिला. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले किसी मुद्दे पर सदन में दुर्लभ सहमति देखने को मिली.

1853 में बरहमपुर में हुई थी कृष्णनाथ कॉलेज की स्थापना

इस संशोधन के माध्यम से विश्वविद्यालय को 19वीं सदी के प्रसिद्ध महाराजा कृष्णनाथ राय के नाम से जोड़ा गया है. वर्ष 1853 में उन्होंने ही बहरमपुर में कृष्णनाथ कॉलेज की स्थापना की थी. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को आज भी याद किया जाता है.

ब्रात्य बसु ने फैसले को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताया

विधेयक पेश करते हुए शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर लिया गया है, जिसमें मुर्शिदाबाद के लोगों की महाराजा कृष्णनाथ के साथ भावनात्मक जुड़ाव का सम्मान करने की बात कही गयी थी. उन्होंने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे राज्य की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को उचित सम्मान मिलेगा.

महाराजा कृष्णनाथ राय का उच्च शिक्षा के प्रसार में योगदान अविस्मरणीय है. उनका नाम विश्वविद्यालय के माध्यम से जिले से बाहर तक जाना चाहिए.

ब्रात्य बसु, शिक्षा मंत्री, पश्चिम बंगाल

महाराजा कृष्णनाथ राय ने विश्वविद्यालय के लिए दान में दी थी जमीन

विधानसभा में चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि महाराजा कृष्णनाथ राय ने न केवल शिक्षा को बढ़ावा दिया, बल्कि इसके लिए अपनी बहुमूल्य जमीन भी दान की. उसी जमीन पर विश्वविद्यालय और अन्य एजुकेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हुई.

बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

मात्र 22 साल की उम्र में हो गयी थी महाराजा कृष्णनाथ की मृत्यु

मुर्शिदाबाद के तृणमूल कांग्रेस विधायक मोहम्मद अली चर्चा के दौरान भावुक हो गये. उन्होंने कहा कि महाराजा कृष्णनाथ की मृत्यु मात्र 22 वर्ष की उम्र में हो गयी थी. इतनी छोटी उम्र में उन्होंने ऐसा विजन छोड़ा, जिसका लाभ आज भी जिले के हजारों स्टूडेंट्स को मिल रहा है.

शिक्षा में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्व को सम्मान का प्रयास

विपक्ष के विधायक विश्वनाथ कर ने कहा कि नाम बदलने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए भी समान प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए. विपक्ष ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित नहीं है, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले एक महान व्यक्तित्व को सम्मान देने का प्रयास है.

कृष्णनाथ कॉलेज को अपग्रेड करके हुई थी मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना

जवाबी भाषण में शिक्षा मंत्री ने महाराजा कृष्णनाथ की वसीयत का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी संपत्ति शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए दान कर दी थी. इसे आधुनिक भारत के शैक्षणिक इतिहास में एक दुर्लभ और प्रेरणादायक कदम बताया गया. मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय अधिनियम 2018 के तहत कृष्णनाथ कॉलेज को उन्नत कर की गयी थी.

इसे भी पढ़ें

बंगाल चुनाव से पहले ममता सरकार का बड़ा एलान, मुर्शिदाबाद में खुलेगा एक और विश्वविद्यालय

मुर्शिदाबाद में भी चुनाव पूर्व हिंसा, तृणमूल कार्यकर्ता की बम मारकर हत्या

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola