ममता बनर्जी सरकार का ऐतिहासिक फैसला, बदल दिया मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम

मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में असेंबली इलेक्शन 2026 से पहले बुलाये गये अंतिम असेंबली सेंशन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया. सरकार ने मुर्शिदाबाद यूनिवर्सिटी का नाम बदल दिया. विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन सरकार के इस प्रस्ताव का विपक्ष ने भी समर्थन किया. इस बिल को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया.
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पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदलकर मुर्शिदाबाद महाराजा कृष्णनाथ विश्वविद्यालय, बहरमपुर करने का रास्ता साफ कर दिया है. शनिवार को विधानसभा में मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. इस निर्णय को सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष का भी समर्थन मिला. बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले किसी मुद्दे पर सदन में दुर्लभ सहमति देखने को मिली.
1853 में बरहमपुर में हुई थी कृष्णनाथ कॉलेज की स्थापना
इस संशोधन के माध्यम से विश्वविद्यालय को 19वीं सदी के प्रसिद्ध महाराजा कृष्णनाथ राय के नाम से जोड़ा गया है. वर्ष 1853 में उन्होंने ही बहरमपुर में कृष्णनाथ कॉलेज की स्थापना की थी. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को आज भी याद किया जाता है.
ब्रात्य बसु ने फैसले को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताया
विधेयक पेश करते हुए शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि यह फैसला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर लिया गया है, जिसमें मुर्शिदाबाद के लोगों की महाराजा कृष्णनाथ के साथ भावनात्मक जुड़ाव का सम्मान करने की बात कही गयी थी. उन्होंने इसे ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताते हुए कहा कि इससे राज्य की शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को उचित सम्मान मिलेगा.
महाराजा कृष्णनाथ राय का उच्च शिक्षा के प्रसार में योगदान अविस्मरणीय है. उनका नाम विश्वविद्यालय के माध्यम से जिले से बाहर तक जाना चाहिए.
ब्रात्य बसु, शिक्षा मंत्री, पश्चिम बंगाल
महाराजा कृष्णनाथ राय ने विश्वविद्यालय के लिए दान में दी थी जमीन
विधानसभा में चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि महाराजा कृष्णनाथ राय ने न केवल शिक्षा को बढ़ावा दिया, बल्कि इसके लिए अपनी बहुमूल्य जमीन भी दान की. उसी जमीन पर विश्वविद्यालय और अन्य एजुकेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हुई.
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मात्र 22 साल की उम्र में हो गयी थी महाराजा कृष्णनाथ की मृत्यु
मुर्शिदाबाद के तृणमूल कांग्रेस विधायक मोहम्मद अली चर्चा के दौरान भावुक हो गये. उन्होंने कहा कि महाराजा कृष्णनाथ की मृत्यु मात्र 22 वर्ष की उम्र में हो गयी थी. इतनी छोटी उम्र में उन्होंने ऐसा विजन छोड़ा, जिसका लाभ आज भी जिले के हजारों स्टूडेंट्स को मिल रहा है.
शिक्षा में योगदान देने वाले महान व्यक्तित्व को सम्मान का प्रयास
विपक्ष के विधायक विश्वनाथ कर ने कहा कि नाम बदलने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए भी समान प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए. विपक्ष ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रेरित नहीं है, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले एक महान व्यक्तित्व को सम्मान देने का प्रयास है.
कृष्णनाथ कॉलेज को अपग्रेड करके हुई थी मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना
जवाबी भाषण में शिक्षा मंत्री ने महाराजा कृष्णनाथ की वसीयत का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अपनी संपत्ति शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए दान कर दी थी. इसे आधुनिक भारत के शैक्षणिक इतिहास में एक दुर्लभ और प्रेरणादायक कदम बताया गया. मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय की स्थापना मुर्शिदाबाद विश्वविद्यालय अधिनियम 2018 के तहत कृष्णनाथ कॉलेज को उन्नत कर की गयी थी.
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By Mithilesh Jha
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