ममता बनर्जी को लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई चाई : नंदीग्राम की हार के बाद भवानीपुर में ‘फाटाफाटी खेला’, 60 हजार का टार्गेट

Published by :Mithilesh Jha
Published at :28 Apr 2026 9:18 PM (IST)
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Mamata Banerjee Bhabanipur Election 2026: सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं. नंदीग्राम की हार के बाद उनकी नयी रणनीति, अभिषेक बनर्जी का टार्गेट और उनके परिवार के सदस्यों के नामकरण से जुड़े रोचक तथ्यों पर स्पेशल रिपोर्ट.

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Mamata Banerjee Bhabanipur Election 2026: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की प्रमुख ममता बनर्जी के लिए राजनीति का मतलब सिर्फ सत्ता नहीं, निरंतर ‘संघर्ष’ (लड़ाई, लड़ाई, लड़ाई) है. 71 वर्ष की उम्र में भी उनका जोश वैसा ही है, जैसा दशकों पहले था. इस बार के विधानसभा चुनाव में उनके निशाने पर कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सीधे चुनाव आयोग है.

नंदीग्राम में ‘शांतिकुंज के मंझले बेटे’ से हारीं ममता बनर्जी

‘दीदी’ के बारे में कहा जाता है कि वह बिना लड़ाई के रह ही नहीं सकतीं. पिछले चुनाव में नंदीग्राम के संग्राम में ‘शांतिकुंज के मंझले बेटे’ (शुभेंदु अधिकारी) से मिली हार के बाद, इस बार वह अपनी ‘बड़ी बहन’ यानी भवानीपुर विधानसभा सीट से मैदान में हैं. क्या शुभेंदु अधिकारी ने इस बार यहां उनकी राह कठिन बना दी है?

नंदीग्राम का जख्म और भवानीपुर का भरोसा

ममता बनर्जी की राजनीतिक बिसात हमेशा चौंकाने वाली होती है. 2021 में उन्होंने अचानक नंदीग्राम से लड़ने का फैसला किया था. चोटिल पैर और प्लास्टर के साथ ‘भांगा पाये खेला होबे’ का नारा दिया, लेकिन जीत शुभेंदु अधिकारी की हुई. इस बार ममता बनर्जी ने नारा बदलकर ‘फाटाफाटी खेला होबे’ कर दिया है. वह नंदीग्राम (मंझली बहन) की बजाय अब सिर्फ भवानीपुर (बड़ी बहन) पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं.

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अभिषेक बनर्जी ने तय किया टार्गेट

ममता बनर्जी भले ही एक सीट से लड़ रही हों, लेकिन राज्य की सभी 294 सीटों पर वह खुद को ही उम्मीदवार मानती हैं. उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर में दीदी की जीत का अंतर 60 हजार वोटों का तय किया है. कार्यकर्ताओं पर ‘अदृश्य CCTV’ जैसी नजर रखी जा रही है.

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Mamata Banerjee Bhabanipur Election 2026: क्या दीदी इस बार चिंतित हैं?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ममता बनर्जी इस बार थोड़ी नर्वस हैं, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उन्होंने भवानीपुर के बीएलए (BLA) के साथ करीब 5 बार बैठकें की हैं. उनके करीबियों का कहना है कि यह चिंता नहीं, बल्कि चुनाव के प्रति उनकी गंभीरता है. वह किसी भी लड़ाई को हल्के में नहीं लेतीं.

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अनोखी बात : परिवार के हर सदस्य का नाम ‘A’ से क्यों?

ममता बनर्जी के परिवार में नाम रखने का एक बेहद दिलचस्प और अनोखा चलन है, जो शायद ही किसी को पता हो. ममता बनर्जी ने अपने सभी भतीजे और भतीजियों के नाम अंग्रेजी वर्णमाला के पहले अक्षर ‘A’ से रखे हैं. उदाहरण के लिए- अभिषेक, आकाश, आबेश और अग्निशा. यह सिलसिला अगली पीढ़ी में भी जारी है. अभिषेक बनर्जी के बच्चों के नाम अजानिया और अयांश हैं. उनके भाई कार्तिक के पोते का नाम खुद ‘पिटी दादी’ (ममता बनर्जी) ने आदिरा रखा है.

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राज्य के कोने-कोने में विरोधियों को चुनौती दे रहीं ममता

आदिगंगा के किनारे बसी भवानीपुर की गलियों से लेकर राज्य के कोने-कोने तक, ममता बनर्जी एक बार फिर अपनी सादगी और हवाई चप्पल के साथ विरोधियों को चुनौती दे रही हैं. अब देखना यह है कि ‘फाटाफाटी खेला’ में जनता उन्हें कितना समर्थन देती है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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