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ममता बनर्जी 20 साल बाद धरने पर, दावा- बीजेपी-चुनाव आयोग को करूंगी बेनकाब

Updated at : 06 Mar 2026 6:58 PM (IST)
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ममता बनर्जी 20 साल बाद धरने पर, दावा- बीजेपी-चुनाव आयोग को करूंगी बेनकाब

Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए जाने के खिलाफ कोलकाता में धरना शुरू कर दिया है. उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा पर असली मतदातओं को मतदान करने से रोकने की साजिश का आरोप लगाया.

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Mamata Banerjee: कोलकाता. तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने बंगाल में हुए एसआईआर (SIR) में वोटरों के नाम हटाने के लिए भाजपा-चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है. 20 साल बाद धरने पर बैठी तृणमूल नेता ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें बेनकाब करने की कसम खाई. टीएमसी सुप्रीमो ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में कहा- मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की भाजपा-चुनाव आयोग की साजिश को बेनकाब करूंगी. ममता ने भाषण के दौरान कहा कि बंगाल एसआईआर में मृत घोषित किए गए 22 लोग, जो जीवित हैं, उन्हें मंच पर पेश करूंगी.

जीवित वोटरों को मृत बताने का आरोप

मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2 बजे मंच पर चहुंची. विरोध प्रदर्शन में ममता बनर्जी के साथ पार्टी मंत्रियों, विधायकों और अन्य नेतृत्व एस्प्लेनेड स्थित धरना स्थल पर मौजूद दिखे. ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है. बनर्जी ने कहा-मैं उन मतदाताओं को, जिन्हें चुनाव आयोग ने मृत घोषित कर दिया है, इस विरोध स्थल पर प्रस्तुत करूंगी. इसकी घोषणा टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पहले ही कर दी थी. उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक रूप से प्रेरित अभ्यास करने का आरोप लगाया था, जिससे लाखों योग्य मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं.

SIR के मुद्दे पर मुखर रही है ममता बनर्जी

एसआईआर (SIR)के मुद्दे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह धरना दे रही है. तृणमूल सुप्रीमो शुरुआत से ही एसआईआर (SIR)के मुद्दे पर मुखर रही हैं. इस बार अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद ममता बनर्जी एक बार फिर मुखर हो गई हैं. ममता बनर्जी के धरना स्थल पर हजारों समर्थकों की भीड़ देखी गयी. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा-बनर्जी को धरने पर बैठने का अभ्यास शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि 2026 में भाजपा के सत्ता में आने के तुरंत बाद वह विपक्ष की नेता बन जाएंगी.

चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना

तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है, जिसमें मुस्लिम बहुल मालदा और मुर्शिदाबाद की बहुसंख्यक आबादी को “विचाराधीन ” रखने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा-अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है और अकेले मालदा के उन निर्वाचन क्षेत्रों में 42% नाम हैं जिन पर “विचाराधीन” लागू है. मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना में भी बड़ी संख्या में मतदाता “विचाराधीन” हैं.

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इन जिलों में सबसे अधिक मामले

मुख्यमंत्री का धरना ऐसे समय में हो रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक अधिकारियों द्वारा कुल 61 लाख मामलों में से 6.5 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है. इस बीच, ओडिशा और झारखंड के लगभग 200 न्यायिक अधिकारी आठ जिलों – उत्तर और दक्षिण 24 परगना, हुगली, हावड़ा, बीरभूम, पूर्वी और पश्चिमी बर्दवान और नादिया – में न्याय निर्णय की जांच करेंगे. विचाराधीन वोटरों के आंकड़ों में मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक मामले हैं, जहां 11 लाख से अधिक मामले हैं, मालदा में 8 लाख से अधिक, उत्तर 24 परगना में लगभग 6 लाख और दक्षिण 24 परगना में 5 लाख 22 हजार मामले हैं.

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20 साल पहले धरने पर बैठी थी ममता बनर्जी

ममता बनर्जी के राजनीतिक करियर में धरने और आंदोलन बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं. आज लगभग 20-21 साल पहले की बात करें, तो उनका सबसे ऐतिहासिक और चर्चित धरना 2006 में हुआ था. सिंगूर मामले में ममता ने कोलकाता में धरना दिया था. ममता का प्रदर्शन मुख्य रूप से सिंगूर (हुगली जिला) में शुरू हुआ था, लेकिन इसका सबसे बड़ा पड़ाव कोलकाता के धर्मतला (एसप्लेनेड) में देखने को मिला था. तत्कालीन वामपंथी सरकार ने टाटा मोटर्स की ‘नैनो’ कार फैक्ट्री के लिए सिंगूर में लगभग 1,000 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया था. ममता बनर्जी का तर्क था कि सरकार किसानों से उनकी इच्छा के विरुद्ध उपजाऊ जमीन छीन रही है. उन्होंने मांग की थी कि जो किसान स्वेच्छा से जमीन नहीं देना चाहते, उनकी 400 एकड़ जमीन वापस की जाए. इस धरने में ही ममता ने कसम खाई थी कि वो बंगाल से वाममोर्चा की सरकार को उखाड़ फेंकेंगी.

25 दिनों की भूख हड़ताल

दिसंबर 2006 में ममता बनर्जी ने कोलकाता के मेट्रो चैनल पर 25 दिनों तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी. उनकी हालत काफी बिगड़ गई थी, जिसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की अपील पर उन्होंने उपवास तोड़ा था. इस दौरान उन्होंने सिंगूर की घेराबंदी की और सड़कों पर उतरकर “मां, माटी, मानुष” का नारा बुलंद किया. इस आंदोलन ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया. इसी आंदोलन (और बाद में नंदीग्राम आंदोलन) की लहर पर सवार होकर ममता बनर्जी ने 2011 में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंका और मुख्यमंत्री बनीं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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