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29 साल पहले काला गाउन पहने कोर्ट पहुंची थी ममता बनर्जी, इस मामले में की थी पैरवी

Updated at : 04 Feb 2026 6:45 PM (IST)
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mamata didi

ममता बनर्जी का फाइल फोटो.

Mamata Banerjee: तृणमूल नेताओं का कहना है कि 1997 में ममता दीदी ने हुगली जज की अदालत में एक परिवार के लिए पैरवी की थी, लेकिन 2026 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बंगाल के सभी परिवारों के लिए पैरवी की है.

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Mamata Banerjee: कोलकाता: बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी 29 साल बाद किसी अदालत में बहस करती दिखी. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते वक्त बेशक वो वकील के यूनिफार्म में नहीं थी, लेकिन 29 साल पहले हुगली जज की अदालत में वो गाउन पहने कोर्ट में दिखी थी. कानून की डिग्री लेने के बाद ममता बनर्जी कई बार अदालत में बहस कर चुकी हैं. बुधवार को भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता के तौर पर बहस करती नजर आईं. उन्होंने सफेद साड़ी और काली चादर पहनी हुई थी, लेकिन उन्हें वकील का काला गाउन पहने हुए भी दलीलें देते देखा जा चुका है. ममता बनर्जी के पास इतिहास में स्नातकोत्तर डिग्री के अलावा कानून की डिग्री भी है। उन्होंने योगेश चंद्र विधि महाविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की है.

1997 में ममता ने गाउन पहन कर की थी बहस

वर्ष 1997 की बात है. हुगली के लोगों ने ममता बनर्जी को एक वकील के रूप में अदालत में बहस करते देखा था. ममता बनर्जी ने चुंचुरा के जिला न्यायाधीश न्यायालय में पैरवी की थी. तृणमूल कांग्रेस के मौजूदा नेताओं को भी वह घटना याद है. लगभग तीन दशकों बाद आज ममता बनर्जी एक बार फिर अदालत में बहस करती नजर आईं. वह अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. ममता ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. ममता ने आज सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के समक्ष इस मामले में बहस की. 1997 में हुई उस अदालती सुनवाई के 14 साल बाद ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं. मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ममता बनर्जी ने कई मौकों पर कहा है कि अगर वह चाहें तो अदालत में वकालत कर सकती हैं, क्योंकि वह वास्तव में एक वकील हैं.

क्या था मामला

6 जुलाई की तरीख थी और रथ यात्रा का दिन था. गुप्तपारा में रथ यात्रा के दौरान पुलिस और स्थानीय व्यापारियों के बीच झड़प हो गयी. पुलिस की ओर से फायरिंग की गयी. गुप्तीपारा के लालपुकुर इलाके के रहने वाले हलधर मंडल और बुरो बाग को गोली मार दी गई. हलधर मंडल की मृत्यु हो गयी. अगले दिन ममता बनर्जी गुप्तपारा पहुंची और मृतक के परिवार से मुलाकात की. परिजनों का आरोप था कि पुलिस मृतक हलधर मंडल के शव का अंतिम संस्कार करना चाहती है. यह जानकारी मिलते ही ममता सीधे चुंचुरा कोर्ट पहुंचीं. उस समय बुद्धदेव भट्टाचार्य पुलिस मंत्री और गृह मंत्री थे. ममता बनर्जी मृतक के परिवार के साथ खड़ी रहीं और चुंचुरा जिला न्यायाधीश न्यायालय में पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दलीलें दीं.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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