आर्थिक तंगी से जूझ रहा नगर निगम, विकास कार्यों पर पड़ सकता है असर

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लगातार हो रहे घाटे की वजह से अब कोलकाता नगर निगम के कामकाज पर असर पड़ता दिखा रहा है. ऐसे में घाटे को कम करने के लिए आय बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

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संवाददाता, कोलकाता

लगातार हो रहे घाटे की वजह से अब कोलकाता नगर निगम के कामकाज पर असर पड़ता दिखा रहा है. ऐसे में घाटे को कम करने के लिए आय बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है. निगम के कुछ अधिकारियों का भी मानना है कि इस परिस्थिति में संपत्ति कर के विभिन्न दरों में बढ़ोतरी किये जाने की आवश्यकता है. पर यह चुनावी वर्ष है. इस साल विधानसभा चुनाव के साथ कोलकाता नगर निगम का भी चुनाव है. ऐसे चाह कर भी संपत्ति कर को नहीं बढ़ाया जा पा रहा है.

इधर, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने रेवेन्यू कलेक्शन पर ज्यादा जोर देने का आदेश दिया है. मेयर ने बुधवार को निगम में कर मूल्यांकन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने इस बैठक पर बकाया संपत्ति कर वसूली पर जोर देने का आदेश दिया है. हालांकि, 2024-25 की तुलना में चालू वित्त वर्ष में कर वसूली बेहतर हुई है. मेयर और अधिक जोर देने का आदेश दिया है. गौरतलब है कि अभी चालू वित्त वर्ष के समाप्त होने में दो महीने बाकी हैं. वहीं निगम सूत्रों के अनुसार, संपत्ति कर वसूली पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 3.22 परसेंट बढ़ी है. वित्त वर्ष 2024-25 में निगम ने अप्रैल से दिसंबर के समय में प्रॉपर्टी टैक्स से 1009.66 करोड़ रुपये वसूले थे. वहीं, इस वित्त वर्ष में अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स से 1,042.17 करोड़ की वसूली की है. यानी, चालू वर्ष में अप्रैल से दिसंबर तक के समय में रेवेन्यू सेक्टर में पिछले साल के मुकाबले 3.22 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है. इसलिए मेयर ने साल के आखिरी दो महीनों में बकाया कर वसूली का निर्देश दिया है.

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