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फंड की कमी से इमारतों की मरम्मत नहीं करा पा रही जेयू

Updated at : 16 Dec 2024 1:35 AM (IST)
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फंड की कमी से इमारतों की मरम्मत नहीं करा पा रही जेयू

पुरानी इमारतों में रिसाव की भी समस्या है. यहां से फॉल्स सीलिंग को हटाने को कहा गया है.

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कोलकाता. जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है. फंड की कमी के चलते विवि की इमारतों की ठीक से मरम्मत नहीं हो पा रही है, जिससे वे जर्जर होती जा रही हैं. जेयू अधिकारियों द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि इन इमारतों में फॉल्स सीलिंग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और छतों पर रखा कबाड़ हटा दिया जाना चाहिए. कुछ पुरानी इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि कंक्रीट के टुकड़े बार-बार उखड़ रहे हैं. जेयू के कार्यवाहक रजिस्ट्रार इंद्रजीत बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस में कहा गया है कि पुरानी इमारतों में ऊपरी छत वाले क्षेत्रों से कंक्रीट के टुकड़े, फ्लेक्स गिरने की घटनाएं अक्सर मिलती हैं. आगे फॉल्स सीलिंग नहीं होनी चाहिए. पुरानी इमारतों में रिसाव की भी समस्या है. यहां से फॉल्स सीलिंग को हटाने को कहा गया है. शिक्षकों से इमारतों की छतों पर अप्रयुक्त फर्नीचर या प्रयोगशाला उपकरण न रखने को कहा गया है. एक अधिकारी ने कहा कि फार्मेसी भवन, केमिकल इंजीनियरिंग भवन और प्रयुक्ति भवन का आधारभूत ढांचा जर्जर हो चुका है. उनकी छतें खराब हो गयी हैं. इमारतों के सामने से कंक्रीट के टुकड़े भी निकल रहे हैं. सीढ़ियों में दरारें पड़ गयी हैं. अंग्रेजी विभाग के प्रमुख व विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद के एक सदस्य ने बताया कि स्टाफ क्वार्टर की स्थिति भी खराब है. रजिस्ट्रार ने कहा कि हमने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर स्टाफ क्वार्टर की तत्काल मरम्मत के लिए लगभग 71 लाख रुपये की मांग की है. लोक निर्माण विभाग के परामर्श से एस्टीमेट तैयार किया गया है. हम अन्य इमारतों की भी पूरी तरह से मरम्मत कराना चाहते हैं. उम्मीद है कि राशि स्वीकृत हो जायेगी. जेयू के अंतरिम वीसी भास्कर गुप्ता ने भी उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर 2024-25 शैक्षणिक वर्ष के लिए आवंटन बढ़ाने का आग्रह किया था. राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक) ने हाल ही में विश्वविद्यालय को मान्यता दी थी. नैक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जेयू की वित्तीय बाधाएं बुनियादी ढांचे के रखरखाव और विकास के रास्ते में आ रही थीं. जेयू के शिक्षकों ने वीसी को पत्र लिखकर कहा था कि कई इमारतें खतरनाक स्थिति में हैं. यह दैनिक उपयोग के लिए जोखिम भरी हैं. इन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाना चाहिए.

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