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कफ सिरप तस्करी में बीएसएफ अफसरों की भूमिका की जांच शुरू

Updated at : 09 Mar 2026 10:49 PM (IST)
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कफ सिरप तस्करी में बीएसएफ अफसरों की भूमिका की जांच शुरू

भारत-बांग्लादेश सीमा पर प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी से जुड़े एक पुराने मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश के बाद की गयी है.

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कोलकाता.

भारत-बांग्लादेश सीमा पर प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी से जुड़े एक पुराने मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) ने जांच शुरू कर दी है. यह कार्रवाई दिल्ली हाइकोर्ट के आदेश के बाद की गयी है. मामला वर्ष 2008 का है, जिसमें आरोप है कि कुछ बीएसएफ अधिकारियों ने तस्करी के मामले में रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर निचले स्तर के जवानों को फंसाने की कोशिश की थी. सीबीआइ द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, 26 दिसंबर 2008 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के दयारामपुर बॉर्डर आउटपोस्ट पर तैनात बीएसएफ के तत्कालीन दो कांस्टेबल बी वेंकटस्वामी और तरसेम सिंह ने ड्यूटी के दौरान एक संदिग्ध तस्कर से प्रतिबंधित कफ सिरप फेंसिडिल की 75 बोतल बरामद की थी. दोनों जवानों ने इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी थी. आरोप है कि इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने के बजाय कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने उल्टे उन्हीं जवानों पर गलत रिपोर्ट देने और तस्करी में शामिल होने का आरोप लगा दिया. यह भी आरोप है कि घटना के बाद दोनों जवानों के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया.

बीएसएफ की विशेष सुरक्षा अदालत (एसएसएफसी) ने बीएसएफ अधिनियम, 1968 की धारा 40 के तहत दोनों को दोषी ठहराया और पांच मई 2009 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया. उनकी अपील भी बाद में बीएसएफ के अपीलीय प्राधिकरण ने खारिज कर दी थी. इसके बाद दोनों पूर्व जवानों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें फंसाने के लिए दस्तावेजों और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की. अदालत में पेश रिकॉर्ड और परिस्थितियों की जांच के दौरान कई विसंगतियां सामने आयीं. अदालत ने यह भी पाया कि उसी दिन की घटना से जुड़े दो अलग-अलग रोजनामचा रिकॉर्ड प्रस्तुत किये गये थे, जिससे रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका मजबूत होती है.

दिल्ली हाइकोर्ट ने आठ सितंबर 2025 को अपने आदेश में कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया व्यापक जांच की आवश्यकता है. अदालत ने टिप्पणी की कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बीएसएफ के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और सीमा पर तस्करी में कुछ अधिकारियों की संभावित भूमिका जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. अदालत के निर्देश के बाद सीबीआई की कोलकाता स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने इस महीने नियमित मामला दर्ज किया है. प्राथमिकी में अज्ञात बीएसएफ अधिकारियों और अज्ञात निजी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 167 तथा एनडीपीएस अधिनियम, 1985 की धारा 8 और 21 के तहत मामला दर्ज किया गया है. जांच की जिम्मेदारी सीबीआइ के इंस्पेक्टर पद के एक अधिकारी को सौंपी गयी है. सीबीआइ सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान उस समय के सभी दस्तावेज, ड्यूटी रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाएगी. साथ ही संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जायेगी. जांच टीम दयारामपुर बॉर्डर क्षेत्र का दौरा भी कर सकती है. जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या वास्तव में कुछ अधिकारी तस्करी में शामिल थे या फिर जवानों को फंसाया गया था.

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BIJAY KUMAR

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By BIJAY KUMAR

BIJAY KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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